Gurkirat Singh Body Arrival Ujjain: कनाडा में 20 दिन पहले हत्यारों का शिकार हुए गुरकीरत सिंह मनोचा का पार्थिव शरीर शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे मध्य प्रदेश के उज्जैन पहुंची. इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव भी यहां मौजूद रहे. इस दौरान सीएम डॉ मोहन यादव और सांसद अनिल फिरोजिया ने गुरकीरत सिंह मनोचा के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किए, जिसके बाद शव यात्रा चक्रतीर्थ के लिए रवाना हुई. वहीं आज दोपहर गुरकीरत सिंह का अंतिम संस्कार किया जाएगा.
गुरकीरत का शव सुबह करीब 8 बजे अहमदाबाद से एम्बुलेंस द्वारा उनके पार्श्वनाथ कालोनी स्थित निवास पर पहुंचा. यहां परिजनों ओर समाजजनों ने अंतिम दर्शन कर पुष्प अर्पित कर अरदास की. पश्चात सांसद फिरोजिया ओर सीएम डॉ यादव पहुंचे ओर गुरकीरत को पुष्प अर्पित कर शोक संतृप्त परिवार को सांत्वना दी. इसके बाद शव यात्रा निकली, जो प्रमुख मार्गो से होती हुई चक्रतीर्थ पहुंची, जहां दोपहर अंतिम संस्कार किया जाएगा. इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे.
पिता ने कहा- 'न्याय चाहिए'
गुरकीरत का शव देख परिजनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहा था. उनके पिता गुरजीत ने पार्थिव देह घर लाने में मदद के लिए पीएम मोदी, सीएम यादव ओर सांसद फिरोजिया का आभार माना. साथ ही कहा कि देश के बच्चे भविष्य बनाने जाते हैं... ऐसी घटना होगी तो बच्चों कैसे तरक्की करेंगे? अब सरकार कनाडा सरकार से बात कर हत्यारों को सजा दिलाकर उन्हें न्याय दिलाए.
ऐसे हुई थी घटना
बता दें कि गुरजीत सिंह फूड इंडस्ट्री में काम करते हैं. उनका छोटे बेटे गुरकीरत सिंह मनोचा कनाडा के Fort Saint John, British Columbia स्थित Northern Lights College में अध्ययन करते थे. साथ ही एक मॉल में पार्ट टाइम जॉब भी करते थे, लेकिन 14 मार्च को कुछ बदमाशों ने उनके साथ मारपीट की और फिर कार से रौंदकर हत्या कर दी थी. वहीं गुरकीरत सिंह मनोचा का शव भारत लाने में कनाडा के कानून अड़चने आ रहे थे. साथ ही करीब 50 लाख रुपये का खर्च आ रहा था. जिसके बाद परिजनों ने सरकार से मदद मांगी.
केंद्र सरकार ने शव लाने में की मदद
श्रद्धांजलि देने पहुंचे सीएम यादव ने कहा कि परिवार पर बड़ा आघात हुआ है. भगवान गुरकीरत को अपने चरणों में स्थान दे और परिवार को दुख झेलने की शक्ति दें. उन्होंने बताया कि सरकार के प्रयास से शव घर आया है. वहीं सांसद फिरोजिया ने श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद कहा कि शव लाने में विदेश मंत्री जयशंकर प्रसाद ने काफी प्रयास किया और पूरा खर्च केंद्र सरकार ने वहन किया है.