Twisha Sharma Bhopal: सेवानिवृत्त न्यायाधीश की बहू ट्विशा शर्मा (33) की संदिग्ध मौत के मामले में आज का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला अपडेट सामने आया है. भोपाल की अदालत ने मृतका के परिजनों की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने दिल्ली एम्स (AIIMS) में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की थी. कोर्ट के इस फैसले से न्याय की आस लगाए बैठे मायके पक्ष को बड़ा झटका लगा है.
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि शव का दोबारा पोस्टमार्टम नहीं किया जाएगा. हालांकि, कोर्ट ने परिजनों को यह राहत दी है कि वे ट्विशा के पार्थिव शरीर को मध्य प्रदेश में किसी भी सुरक्षित स्थान या शवगृह (Mortuary) में प्रिजर्व (सुरक्षित) रख सकते हैं.
ट्विशा शर्मा केस: शव को चाहिए माइनस 80 डिग्री तापमान
बता दें कि भोपाल एम्स में माइनस 4 डिग्री तापमान में रखा जबकि एम्स ने कहा है कि शव को गलने से बचाने के लिए माइनस 80 डिग्री तापमान की दरकार है,जो कि भोपाल में कही भी नहीं है. उधर, भोपाल कोर्ट ने समर्थ सिंह को 23 मई को पेश होने के लिए कहा है. कटारा हिल्स पुलिस ने पासपोर्ट निरस्तीकरण पर सुनवाई करते हुए कहा कि नहीं हुए पेश तो पासपोर्ट निरस्त होगा.
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क्यों कोर्ट ने नहीं दी इजाजत?
ट्विशा के परिजनों और उनके अधिवक्ता अंकुर पांडे ने आरोप लगाया था कि पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर पर मौजूद चोट के निशानों को छिपाने की कोशिश की गई है. उन्हें आशंका थी कि ससुराल पक्ष के रसूख के कारण भोपाल में जांच प्रभावित हो सकती है, इसलिए वे शव को दिल्ली एम्स ले जाना चाहते थे. लेकिन अदालत ने केस डायरी और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा करने के बाद दोबारा ऑटोप्सी की मांग को कानूनी आधार पर खारिज कर दिया.
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CM के आश्वासन के बाद भी कानूनी पेंच फंसा
यह फैसला इसलिए भी बेहद चौंकाने वाला है क्योंकि इससे ठीक पहले मृतका के परिजनों ने मंत्रालय में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की थी. मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए परिवार को पूरा भरोसा दिया था कि राज्य सरकार इस हाई-प्रोफाइल मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई (CBI) को पत्र लिखेगी. यदि परिजन चाहते हैं, तो पार्थिव शरीर को दिल्ली एम्स ले जाने के लिए सरकारी परिवहन सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी. हालांकि, मुख्यमंत्री ने मुलाकात के दौरान ही यह साफ कर दिया था कि दोबारा पोस्टमार्टम का अंतिम फैसला अदालत के अधिकार क्षेत्र में है. अब कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद शव को दिल्ली ले जाने और दोबारा जांच कराने की परिजनों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है.

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परिजनों का आरोप है कि संक्षिप्त पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उस फंदे या वस्तु का भी उल्लेख नहीं था, जिससे ट्विशा 12 मई की रात कटारा हिल्स स्थित घर में लटकी मिली थीं. भले ही कोर्ट ने दोबारा पोस्टमार्टम की अनुमति नहीं दी है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित विशेष जांच दल (SIT) की जांच और मुख्यमंत्री द्वारा सीबीआई (CBI) जांच की सिफारिश के बाद, अब पुलिस पर फरार आरोपी पति समर्थ सिंह (अधिवक्ता) और सास गिरीबाला सिंह के खिलाफ सख्त और पारदर्शी कार्रवाई करने का भारी दबाव है.