PWD Office Seized: मध्य प्रदेश के गुना जिले में एक रिटायर्ड कर्मचारी के हक को दबाने की कोशिश करने वाले लोक निर्माण विभाग दफ्तर को उसकी लापरवाही बहुत महंगी पड़ी है. बुधवार को जिला न्यायालय के सख्त आदेश पर विभाग के दफ्तर में कुर्की की अभूतपूर्व कार्रवाई की गई. मंगलवार को कोर्ट ने पीड़ित रिटायर्ड कर्मचारी के बकाया वेतन और एरियर के भुगतान के लिए दफ्तर के सामान की कुर्की का आदेश जारी किया था.
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करीब 40 लाख रुपए आंकी गई रिटायर्ड कर्मचारी का बकाया वेतन और एरियर
गौरतलब है जिला न्यायालय के आदेश पर पीडब्ल्यूडी दफ्तर पर हुई कुर्की की कार्रवाई विभाग के रिटायर्ड क्लर्क कौशल किशोर राठौर की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद की गई है. रिटायर्ड कर्मचारी ने विभाग से अपने बकाया वेतन और एरियर के भुगतान को लेकर कोर्ट में वाद दायर किया था. कर्मचारी के बकाया वेतन और एरियर कुल राशि लगभग 36.68 लाख रुपए आंकी गई है.

एसडीओ की कार भी उठा ले गई टीम
अपने अधिकार के लिए कर्मचारी ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़कर जीत हासिल की
रिपोर्ट के मुताबिक साल 1995 में पीडब्ल्यूडी विभाग में एलडीसी के पद पर कार्यरत रहे पीड़ित कौशल किशोर राठौर को उनके पद के अनुसार उचित वेतन नहीं दिया जा रहा था. अपने अधिकार के लिए उन्होंने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और अब जीत हासिल की है. विभाग ने साल 2013 तक के एरियर का भुगतान किया था, लेकिन 2014 से लेकर दिसंबर 2025 में उनके रिटायरमेंट तक की करीब 40 लाख की बकाया राशि को रोककर रखा हुआ था.
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पीडब्ल्यूडी कार्यालय की कुर्सियां, टेबल, पंखे और कंप्यूटर सिस्टम को जब्त किया
जिला नाजिर टीम ने कार्रवाई करते हुए पीडब्ल्यूडी कार्यालय की कुर्सियां, टेबल, पंखे और कंप्यूटर सिस्टम को जब्त करना शुरू कर दिया. इसी दौरान एसडीओ की गाड़ी को भी कुर्की की जद में ले लिया गया. न्यायालय टीम ने स्पष्ट संदेश दिया है कि फिलहाल चल संपत्ति की कुर्की की जा रही है, लेकिन बकाया राशि की भरपाई नहीं होती है, तो विभाग की जमीन और भवन को भी कुर्क किया जा सकता है.
3 दशक पुराने़ केस में हुई कार्रवाई से अधिकारियों-कर्मचारियों में मचा हड़कंप
उल्लेखनीय है करीब तीन दशक पुराने़ मामले में हुई कार्रवाई ने सरकारी विभागों में कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के बीच हडक़ंप मचा दिया है. पीड़ित पीडब्ल्यूडी कर्मचारी कौशल किशोर राठौर द्वारा लड़ी गई लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिली सफलता ने साबित कर दिया कि न्याय में देर जरूर हो सकता है, लेकिन न्याय जरूर मिलता है.
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