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'आदिमानव' बने अन्नदाता! शरीर को पत्तों से ढका, मुआवजे की मांग को लेकर किया अनोखा प्रदर्शन

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में पांगरी बांध प्रभावित किसानों ने आदिमानव का रूप धरकर दोगुना मुआवजे की मांग की. तीन साल से गांधीवादी तरीके से आंदोलन कर रहे किसान भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत अपने अधिकार की मांग कर रहे हैं.

'आदिमानव' बने अन्नदाता! शरीर को पत्तों से ढका, मुआवजे की मांग को लेकर किया अनोखा प्रदर्शन

Unique Farmer Protest: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर के खकनार इलाके में पांगरी मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित किसानों ने गुरुवार को ऐसा अनोखा प्रदर्शन किया, जिसने प्रशासन और समाज दोनों का ध्यान खींच लिया. किसानों ने शरीर पर केले और सागवान के पत्ते लपेटकर ‘आदिमानव' का रूप धारन किया और सरकार से अपनी जमीन के बदले दोगुना मुआवजा देने की मांग की. 

दरअसल, तीन साल से शांतिपूर्वक गांधीवादी तरीके से आंदोलन कर रहे ये किसान कह रहे हैं कि उन्हें भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में मिलने वाला दो गुना मुआवजा और तोषण का अधिकार अब तक नहीं मिला है.

शांतिपूर्ण सत्याग्रह से आवाज बुलंद

पांगरी बांध के डूब प्रभावित किसान पिछले तीन वर्षों से अलग-अलग तरीकों से सत्याग्रह कर रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार ने जिस तरह से उनकी जमीन अधिग्रहित की है, उसके बदले उचित और न्यायसंगत मुआवजा दिया जाना चाहिए. किसान लगातार धरना, ज्ञापन और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के जरिए अपनी मांगों को सामने रखते आ रहे हैं. उनका स्पष्ट तर्क है कि ग्रामीण क्षेत्रों में दो गुना मुआवजे का प्रावधान उन्हें मिलना चाहिए.

पत्तों से ढका शरीर, सिर पर सागवान

इस बार किसानों ने अपने आंदोलन को नए प्रतीक के साथ रखा आदिमानव का रूप बनकर. कमर में केले के पत्ते और सिर पर सागवान के पत्ते बांधकर वे सड़क पर उतरे. इस प्रतीक का संदेश साफ था: “अगर सरकार किसानों को उनके अधिकार नहीं देगी, तो क्या वे फिर आदिम जीवन जीने को मजबूर होंगे?” यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन अपनी तीक्ष्णता और प्रतीकात्मकता से प्रशासन का ध्यान खींचने में सफल रहा.

कानून और संवैधानिक अधिकार

किसानों की मांग का आधार भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में दोगुना मुआवजा और तोषण का प्रावधान माना जाता है. किसानों ने Article 21 (राइट टू लाइफ विद डिग्निटी) और Article 300A (संपत्ति पर संवैधानिक अधिकार) का भी हवाला दिया. उनका कहना है कि बिना पारदर्शिता और उचित मुआवजे के भूमि का अधिग्रहण जबरन नहीं किया जा सकता, और इसी सिद्धांत पर वे अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं.

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‘सरकार का रवैया बदलना होगा'

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ. रवि कुमार पटेल ने तीखे शब्दों में कहा कि “सरकार चाहती है कि किसान आदिमानव हो जाए ना स्वास्थ्य, ना शिक्षा, ना सुविधा, ना रोटी-कपड़ा-मकान. इसलिए न्यूनतम मुआवजा देकर बात टाल रही है. यदि यही रवैया रहा, तो हमें उग्र आंदोलन के लिए विवश होना पड़ेगा और उसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी. उनकी बातों में किसानों की निराशा और दृढ़ता दोनों झलकती हैं.

‘मांगों पर गंभीरता से विचार'

गुरुवार को जिले के प्रभारी मंत्री और जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट बुरहानपुर के दौरे पर थे. किसानों के प्रदर्शन के बीच मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है. किसानों का मानना है कि यह बयान आश्वासन भर न रहे, बल्कि ठोस निर्णय और भुगतान के रूप में सामने आए तभी संघर्ष का उद्देश्य पूरा होगा.

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