छतरपुर जिले में बड़ा मलहरा क्षेत्र के हजारों किसानों ने सोमवार को अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते थाना परिसर के सामने चक्का जाम कर दिया. किसानों ने कहा कि वर्षों से लंबित समस्याओं, मुआवजा वितरण में अनियमितताओं और फसलों के उचित मूल्य न मिलने के विरोध में अब वे खामोश नहीं बैठेंगे. इसी क्रम में किसानों ने मौके पर कलेक्टर को बुलाने की मांग की और जाम खोलने से साफ इनकार कर दिया.

किसानों के अचानक विरोध-प्रदर्शन और चक्काजाम के कारण जिले में अफरा-तफरी जैसे हालात बन गए. कानपुर-सागर नवनिर्मित NH-934 पर कई मील तक लंबी कतार में वाहन घंटों तक फंसे रहे. इस दौरान बसों, एंबुलेंस, स्कूल वाहनों और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. कई यात्री पैदल ही सड़क पर चलने लगे.
किसान बोले- हमारा धैर्य अब जवाब दे चुका
प्रदर्शन में शामिल किसान नेताओं ने कहा कि सरकारी घोषणाएं सिर्फ कागजों में हैं. जमीनी स्तर पर हालात बदतर हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है.
प्रशासन की समझाइश और वार्ता के बाद खुला जाम
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राजस्व एवं पुलिस अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और किसानों से वार्ता की. लगभग दो घंटे की चर्चाओं और आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने चक्काजाम हटाया. प्रशासन ने किसानों की मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है और कहा है कि सभी बिंदुओं की रिपोर्ट जिला स्तर पर प्रेषित की जाएगी.
जाम खुला पर सवाल अभी भी खड़े
हालांकि, मार्ग अब सुचारू रूप से शुरू हो गया है, लेकिन किसानों के सवाल अब भी जस के तस हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में इस घटना के बाद चर्चा तेज है कि क्या प्रशासन किसानों की मुश्किलें खत्म करेगा या यह सिर्फ एक और आश्वासन बनकर रह जाएगा.
निष्कर्ष-बड़ा मलहरा में किसानों का यह आंदोलन सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि एक चेतावनी है. प्रशासन यदि समय रहते समाधान नहीं करता तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं.
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