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आजादी के 76 साल बाद भी नहीं पहुंचा विकास का प्रकाश, आज भी सुविधाओं से महरूम है मजदूरों की यह बस्ती…

Labour Day 2024: मध्य प्रदेश के विदिशा में आजादी के 76 सालों के बाद भी मजदूरों की आबादी वाला जात्रापुरा गांव आज भी सड़क के लिए ना सिर्फ तरस रहा है, बल्कि बिजली और पानी जैसी समस्याओं से भी जूझ रहा हैं.

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आजादी के 76 साल बाद भी नहीं पहुंचा विकास का प्रकाश, आज भी सुविधाओं से महरूम है मजदूरों की यह बस्ती…

हर साल 1 मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है. दुनियाभर में इस दिन को मनाने के पीछे खास उद्देश्य है कि समाज में उन्हें सम्मान व न्याय मिल सके. हालांकि समय के साथ मजदूर दिवस सरकार और सिस्टम के नजरों में सिर्फ कागजों तक ही सिमट कर रह गई. आज भी मजदूरों का संघर्ष बरकरार है. आज भी मजदूर अपनी मजदूरी के लिए सरकारी सिस्टम से गुहार लगाते नजर आते हैं.

बता दें कि मध्य प्रदेश के विदिशा में आये दिन ऐसे मामले सामने आते हैं, जब किसान अपनी मजदूरी के लिए कलेक्ट्रेट ऑफिस में चक्कर लगाते हैं. इन मजदूरों को कोसो किलोमीटर दूर से फसल काटने या अन्य कामों के लिए जाता हैं और उनकी मजदूरी नहीं दी जाती है. इधर, बीते दिनों भी ऐसा ही मामला सामने आया, जब इन मजदूरों से फसल कटा कर मजदूरी नहीं दी गई. जिसके बाद मजदूर कलेक्टर से मजदूरी दिलाने की गुहार लगाते रहे. इतना ही नहीं मजदूरों को कलेक्टर परिसर में दो दिन तक डेरा भी डालना पड़ा. जिसके बाद अधिकारी हरकत में आए.  

अपने शहर से दूसरे शहर पलायन करने को मजबूर हैं मजदूर 

वहीं शहर से दूर दराज ग्रामीणों इलाकों में आज भी सदियों गुजर जाने के बाद भी रोजगार स्थापित नहीं हो पाया है. मजबूरन मजदूरों को अपना शहर छोड़कर कई किलोमीटर दूर मजदूरी करने जाना पड़ता है. वहीं विदिशा जिला मुख्यालय के अधिकतर मजदूर मजदूरी के लिए भोपाल शहर जाते हैं और दूरदराज के गांवों में फसल काटते हैं.

सरकारी योजनाओं से आज भी महरूम है मजदूरों की बस्तियों 

विदिशा जिला मुख्यालय के वार्ड क्रमांक 1 के जात्रापुरा इलाका मजदूरों की बड़ी बस्ती कहलाती है. इस बस्ती में निवास करने वाले रहवासी बताते हैं कि समाज सेवी हो या नेता इन्हें सिर्फ मजदूर दिवस पर ही मजदूरों की याद आती है. सालों गुजर जाने के बाद भी हम लोगों की बस्ती तक सड़क, बिजली और पानी तक नहीं आ पाई है. आज भी घर में पानी जुटाने के लिए कोसों दूर जाना पड़ता है. नेताओं और अधिकारियों से कई बार गुहार लगाने के बाद भी सुनवाई नहीं हो सकी.

जानें मजदूर दिवस का इतिहास 

हर साल 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है. पहली बार मजदूर दिवस  मनाने का फैसला साल 1889 में लिया गया था. हालांकि इसकी शुरुआत 1886 से ही हो गई थी. दरअसल, मजदूर दिवस मनाने की आवाज अमेरिका के शिकागो शहर से बुलंद हुई थी, जब मजदूर सड़क पर उतर आए थे. 

ये आंदोलन 1886 से पहले अमेरिका में शुरू हुआ था, जिसमें मजदूरों ने अपने हक के लिए आवाज उठाते हुए हड़ताल शुरू की थी. आंदोलन की वजह मजदूरों की कार्य अवधि थी. उन दिनों मजदूर एक दिन में 15-15 घंटे कार्य करते थे. जिसके बाद साल1889 में अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें तय किया गया कि हर मजदूर की प्रतिदिन का कार्य अवधि 8 घंटे ही होगी.

भारत में कब मनाया गया था मजदूर दिवस

1 मई 1889 में अमेरिका में मजदूर दिवस मनाने के प्रस्ताव के 34 साल बाद भारत में मजदूर दिवस मनाया गया. भारत में पहली बार 1 मई 1923 में चेन्नई में मजदूर दिवस मनाया गया था. ये ऐलान लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान की अध्यक्षता में मजदूर दिवस मनाने का किया गया.

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