
Unemployment in MP: मध्यप्रदेश में दिव्यांग्य बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं.प्रदेश में दिव्यांगों के लिये आरक्षित 37 हज़ार पदों में से 21 हज़ार से अधिक पद खाली हैं जबकि 9,000 से अधिक पदों पर भर्ती के लिये कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है. हालात ये हैं कई युवा नौकरी की तलाश में अब ओवर एज होने की कगार पर हैं. ये हालत तब है जबकि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने साल भर पहले आदेश दिया था कि दिव्यांगों के लिए आरक्षित पद भरे जाएं. लेकिन, आज भी 21 हजार से ज्यादा पद खाली पड़े हैं. विधानसभा में सरकार ने खुद बताया कि स्पर्श पोर्टल पर 8.99 लाख दिव्यांग पंजीकृत हैं, लेकिन नौकरियों के नाम पर स्पर्श से ज्यादा धक्का-मुक्की मिल रही है.
विभागों में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के जरिए लोगों ने नौकरियाँ हथिया लीं। जब जाँच हुई तो इनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई, लेकिन असली दिव्यांग आज भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। मामला शिवपुरी और मुरैना से जुड़ा हो या अन्य जिलों से, 'योग्यता' से ज्यादा 'जुगाड़' की ताकत यहाँ साफ दिखती है. आगे बढ़ने से पहले सरकार के ही आंकड़ों के आईने में स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगा लीजिए.

D.Ed किया, शिक्षक पात्रता परीक्षा पास की पर नौकरी नहीं मिली
जाहिर है ये आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश के दिव्यांग युवाओं के लिए सरकारी दफ्तरों के दरवाजे पक्के तौर पर 'ऑटोमैटिक लॉक' मोड में हैं. NDTV ने कई दिव्यांग युवाओं से उनका दर्द भी साझा किया. मसलन- जबलपुर के दिव्यांग युवक राहुल गढ़ेवाल. वे तीन सालों से कलेक्ट्रेट और एमपी ऑनलाइन सेंटर के चक्कर लगा-लगा कर थक चुके हैं. अनुसूचित जाति से आने वाले राहुल को लगता था कि आरक्षण और दिव्यांग योजनाएं उनकी मदद करेंगी, लेकिन हर सुबह वे एक नई उम्मीद के साथ निकलते हैं, लेकिन हर शाम हाथ में वही फॉर्म और वही निराशा लिए लौटते हैं. वे बताते हैं कि कई सरकारी डिपार्टमेंट में मैंने कोशिश की लेकिन कहीं से कोई जानकारी नहीं मिलती. यहां तक की वैकेंसी की जानकारी भी उन्हें नहीं मिल पाती.

जबलपुर के दिव्यांग्य राहुल गढेवाल 3 साल से कलेक्ट्रेट और एमपी ऑनलाइन के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उनकी बेरोजगारी दूर नहीं हो रही है.
कुछ ऐसा ही हाल भोपाल के बैरसिया में रहने वाले दिव्यांग राहुल वंशकार का भी है. साल 2019 से ही सरकारी नौकरी की तलाश में उनका'मैराथन दौड़' जारी है. उन्होंने D.Ed किया, शिक्षक पात्रता परीक्षा पास की, चार परीक्षाएं दीं और 25 विभागों में वॉक-इन इंटरव्यू भी दिया लेकिन नौकरी का दरवाजा अब तक नहीं खुला. उनके पिता मजदूरी करते हैं, और अब हालात ऐसे हैं कि पढ़ाई आगे जारी रखना बड़ी चुनौती बन चुकी है. सवाल पूछने पर वे कहते हैं- दिव्यांग आज ऐसी स्थिति में आ गए हैं कि पढ़े-लिखे होने के बावजूद वह भीख मांगने को मजबूर हो रहे हैं. सरकार की मंशा ही भर्ती करने की नहीं है. राहुल कहते हैं कि सीधी भर्ती का अभियान चल रहा है लेकिन ये भी सरकारी स्टंट से ज्यादा कुछ भी नहीं.

ये हैं भोपाल के बैरसिया में रहने वाले दिव्यांग राहुल वंशकार. D.Ed किया, शिक्षक पात्रता परीक्षा पास की पर सालों से बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं.
सरकार बोली- भरे जा रहे हैं रिक्त पद
इस मुद्दे पर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस सरकार को कठघरे में खड़ा कर रही है, तो सरकार कहती है कि भर्ती प्रक्रिया जारी है. कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने बताया- मध्यप्रदेश में डेढ़ साल में एक भी दिव्यांगजनों को नौकरी नहीं मिल पाई है. 9 लाख दिव्यांगजनों ने आवेदन दिया है फिर भी एक को भी नौकरी नहीं दी गई. कांग्रेस की मांग है कि एक महीने में इन पदों को भरा जाए. दूसरी तरफ सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने हालात इतने खराब होने से इनकार किया है. उन्होंने बताया है कि सरकार के सभी विभागों में दिव्यागों के लिए 6% आरक्षण व्यवस्था के तहत विशेष भर्ती अभियान को चलाया जा रहा है. कई विभागों में पद भरे भी गए हैं. एक सतत प्रक्रिया है जो निरंतर चल रही है. इन चीजों पर सीधे मुख्यमंत्री की नजर रहती है और वे इसकी समीक्षा भी करते हैं.
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