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This Article is From Feb 04, 2026

डिंडोरी में विधायक ओमकार मरकाम समेत 2588 किसान धान बेचने से रह गए वंचित, अंतिम तारीख से पहले बंद हो गया पोर्टल

MP Dhan Kharidi: डिंडोरी विधायक ओमकार मरकाम स्वयं भी उन किसानों में शामिल हैं, जो पोर्टल की तकनीकी समस्या के कारण अपनी धान नहीं बेच पाए. विधायक मरकाम ने इस लापरवाही को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है. साथ ही किसानों की इस गंभीर समस्या को विधानसभा में उठाने का वादा किया है.

डिंडोरी में विधायक ओमकार मरकाम समेत 2588 किसान धान बेचने से रह गए वंचित, अंतिम तारीख से पहले बंद हो गया पोर्टल

Madhya Pradesh Dhan Kharidi: मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले में सरकारी पोर्टल की तकनीकी खामी किसानों पर भारी पड़ गई है. समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए पंजीकृत 2588 किसान धान विक्रय से वंचित रह गए हैं. किसानों का आरोप है कि शासन द्वारा तय अंतिम तिथि से दो दिन पहले ही पोर्टल बंद हो गया, जिसके कारण वे स्लॉट बुक नहीं कर पाए. धान नहीं बिकने से किसानों के सामने कर्ज चुकाने और आर्थिक संकट की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है.

पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन से मदद की लगाई गुहार

पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाते हुए शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है. इस पूरे मामले को जिलापंचायत अध्यक्ष रुदेश परस्ते ने गंभीरता से लिया है. उन्होंने कलेक्टर के साथ-साथ क्षेत्रीय सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और जिले की प्रभारी मंत्री प्रतिमा बागरी को भी स्थिति से अवगत कराते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की है. साथ ही किसानों को हरसंभव मदद का भरोसा भी दिलाया है.

इस कारण किसान नहीं बेच पाए धान

इतना ही नहीं डिंडोरी विधायक ओमकार मरकाम स्वयं भी उन किसानों में शामिल हैं, जो पोर्टल की तकनीकी समस्या के कारण अपनी धान नहीं बेच पाए. विधायक मरकाम ने इस लापरवाही को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए किसानों की इस गंभीर समस्या को विधानसभा में उठाने का दावा किया है.

23,232 किसानों ने धान का किया विक्रय

वहीं नागरिक आपूर्ति निगम के प्रभारी जिला प्रबंधक व डिप्टी कलेक्टर वैजनाथ वासनिक ने बताया कि जिले में धान उपार्जन के लिए कुल 25,820 किसानों ने पंजीयन कराया था. इनमें से 23,669 किसानों ने स्लॉट बुक कराया और 23,232 किसानों ने धान का विक्रय किया.

ये किसान धान बेचने से रह गए वंचित

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जिले में 879 किसान ऐसे हैं, जो स्लॉट बुक नहीं हो पाने के कारण धान बेचने से वंचित रह गए. इस संबंध में जिला प्रशासन द्वारा शासन को प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण किसानों को अब तक राहत नहीं मिल सकी है. अब बड़ा सवाल यही है कि पोर्टल की तकनीकी खामी का खामियाजा किसान क्यों भुगतें? और क्या शासन इन पीड़ित किसानों को समय रहते राहत देगा? 

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