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Behcet's Disease: ग्वालियर में मिला रेयरेस्ट बीमारी का मरीज, एमपी का यह पहला केस 

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में “बैचेट डिजीज” नाम की दुर्लभ ऑटोइम्यून बीमारी का पहला मामला सामने आया है. जयारोग्य अस्पताल में 26 वर्षीय युवक में इस रेयर बीमारी की पुष्टि हुई, जो आमतौर पर विदेशों में पाई जाती है.

Behcet's Disease: ग्वालियर में मिला रेयरेस्ट बीमारी का मरीज, एमपी का यह पहला केस 

Behcet's Disease India case: मध्य प्रदेश के ग्वालियर से चिकित्सा जगत के लिए एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां एक 26 वर्षीय युवक में “बैचेट” नाम की अत्यंत दुर्लभ ऑटोइम्यून बीमारी की पुष्टि हुई है. डॉक्टरों के अनुसार यह न सिर्फ ग्वालियर-चंबल संभाग, बल्कि संभवतः पूरे मध्य प्रदेश का पहला मामला है. यह बीमारी आमतौर पर भारत में बेहद कम देखने को मिलती है और दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों में ही इसके केस सामने आते हैं.

ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में मामला

यह मामला ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल समूह के न्यूरोलॉजी विभाग का है. यहां इलाज के लिए पहुंचे युवक में जांच के दौरान “बैचेट डिजीज” की पुष्टि हुई. अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों के मुताबिक यह बीमारी अब तक मध्य प्रदेश में सामने नहीं आई थी, जिससे यह केस और भी महत्वपूर्ण हो जाता है.

क्या है ‘बैचेट' बीमारी?

बैचेट एक दुर्लभ ऑटोइम्यून और मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी डिसऑर्डर है. इस बीमारी में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता ही शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करने लगती है. इसका असर दिमाग, नसों, आंखों और शरीर के अन्य हिस्सों पर भी पड़ सकता है. आमतौर पर यह बीमारी जापान, चीन, कोरिया, तुर्की, ईरान और इराक जैसे देशों में पाई जाती है और खासकर युवा इसकी चपेट में आते हैं.

कैसे सामने आए लक्षण?

जानकारी के मुताबिक, 20 जनवरी को 26 वर्षीय युवक न्यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में पहुंचा था. उसे तेज सिरदर्द, चेहरे में कमजोरी और हाथ-पैरों में सुन्नपन की शिकायत थी. शुरुआती तौर पर मरीज के लक्षण ब्रेन अटैक जैसे नजर आ रहे थे, जिससे डॉक्टर भी सतर्क हो गए.

जांच में हुआ खुलासा

न्यूरोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. दिनेश उदेनिया की निगरानी में मरीज की एमआरआई और खून की विस्तृत जांच कराई गई. जांच रिपोर्ट में LHA-51 पॉजिटिव पाया गया, जिसके बाद डॉक्टरों ने पुष्टि की कि मरीज बैचेट नाम की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है.

इलाज और मरीज की हालत

बीमारी की पुष्टि होते ही मरीज का तुरंत इलाज शुरू कर दिया गया. डॉक्टरों की टीम ने लगातार मॉनिटरिंग की और समय पर दवाएं दी गईं. इलाज का असर दिखा और मरीज की हालत में सुधार हुआ. फिलहाल मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है और आगे की फॉलोअप जांच की सलाह दी गई है.

डॉक्टर का बयान

न्यूरोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. दिनेश उदेनिया ने बताया कि यह बीमारी बेहद दुर्लभ है और समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी होता है. सही समय पर इलाज मिलने से मरीज को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि इस तरह के लक्षण दिखने पर मरीज को तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

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