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रायसेन में सरपंच के फर्जी हस्ताक्षरों से जारी हो रहे जाति प्रमाण पत्र, सरकारी दस्तावेजों से ऐसे हो रहा खिलवाड़

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले की ग्राम पंचायत धोलश्री में सरपंच के दो अलग-अलग हस्ताक्षर पाए जाने का मामला सामने आया है. ग्रामीणों का आरोप है कि फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर स्कूली बच्चों के जाति प्रमाण पत्र तक जारी कर दिए गए.

रायसेन में सरपंच के फर्जी हस्ताक्षरों से जारी हो रहे जाति प्रमाण पत्र, सरकारी दस्तावेजों से ऐसे हो रहा खिलवाड़

रायसेन जिले की पंचायतों में अनियमितताओं के चौंकाने वाले मामले लगातार सामने आ रहे हैं. उदयपुरा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत धोलश्री में सरपंच के दो अलग-अलग प्रकार के हस्ताक्षर पाए जाने का गंभीर मामला उजागर हुआ है. ग्रामीणों का आरोप है कि फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर स्कूली बच्चों के जाति प्रमाण पत्र तक जारी कर दिए गए. ग्रामीणों ने इस संबंध में 9 दिसंबर और 24 दिसंबर 2025 को कलेक्टर को लिखित शिकायत दी थी. वहीं 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री और पंचायत विभाग की प्रमुख सचिव को भी शिकायत भेजी गई, लेकिन आज तक न तो कोई विभागीय जांच हुई और न ही कोई कार्रवाई.

मामला जब मीडिया के सामने आया तो और भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिसमें सरपंच के साथ-साथ उनके पति के हस्ताक्षर भी सरकारी दस्तावेजों में पाए गए. पंचायती राज व्यवस्था की यह तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है.

दर्जनों आवेदन पर सरपंच के पति के हस्ताक्षर

रायसेन जिले की उदयपुरा जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत धोलश्री में सरपंच के दो अलग-अलग हस्ताक्षर सामने आए हैं. हैरानी की बात यह है कि स्कूली बच्चों के जाति प्रमाण पत्र के आवेदन पत्रों पर दूसरे प्रकार के हस्ताक्षर पाए गए, बावजूद इसके तहसीलदार और एसडीएम स्तर पर हस्ताक्षरों की जांच किए बिना जाति प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए.

जाति प्रमाण पत्र के एक आवेदक ने मीडिया को बताया कि आवेदन पत्र पर सरपंच के पति द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे. ऐसे एक नहीं बल्कि दर्जनों आवेदन सामने आए हैं, जिन पर सरपंच पति के हस्ताक्षर पाए गए.

दबंग प्रवृत्ति का है सरपंच का पति

गांव के सामाजिक कार्यकर्ता प्रीतम सिंह रघुवंशी ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवेदन दिए, लेकिन सरपंच पति की कथित दबंगई के चलते अब तक कोई ठोस जांच नहीं हो सकी. जब इस मामले में कलेक्टर रायसेन से सवाल किया गया तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने के बजाय एसडीएम बरेली से संपर्क करने की बात कहकर जांच का आश्वासन दिया.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि महिला सरपंचों वाली ग्राम पंचायतों की निष्पक्ष जांच की जाए, तो अधिकांश मामलों में दस्तावेजों पर सरपंच पतियों के हस्ताक्षर पाए जाएंगे.

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