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गरीबी ने रोके रास्ते, दोस्तों ने दिए ताने, सिल्वर मेडल जीतकर MP की बेटी सीमा रैकवार ने रचा इतिहास

Power Lifting Championship: अपनी मेहनत और जज्बे से पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीत कर एक बड़ा कीर्तिमान हासिल कर चुकी 25 वर्षीय सीमा रैकवार ने सीहोर में आयोजित पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन किया. सीमा रैकवार ने अपने हौंसले की उड़ान से सीहोर जिले के साथ-साथ पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है.

गरीबी ने रोके रास्ते, दोस्तों ने दिए ताने, सिल्वर मेडल जीतकर MP की बेटी सीमा रैकवार ने रचा इतिहास
MP'S DAUGHTER SEEMA RAIKWAR CREATED HISTORY

 Silver Medel Winner: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले की सीमा रैकवार ने पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया है. गरीबी और दोस्तों के ताने को दरकिनार कर चैंपियन बनीं सीमा रैकवार ने मंगलवार को एक बड़ा मुकाम हासिल कर लिया.सीमा ने अपनी सफलता से सपनों को सीमित रखने के सलाह देने वाले लोगों को करारा जवाब दिया है, जो उसे घर की चारदिवारी में रहने की सलाह देते थे..

अपनी मेहनत और जज्बे से पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीत कर एक बड़ा कीर्तिमान हासिल कर चुकी 25 वर्षीय सीमा रैकवार ने सीहोर में आयोजित पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन किया. सीमा रैकवार ने अपने हौंसले की उड़ान से सीहोर जिले के साथ-साथ पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है.

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सीमा का सपना पुलिस विभाग में भर्ती होकर वर्दी पहनने का था

रिपोर्ट के मुताबिक जिले के बकस्वाहा के वार्ड 2 में एक साधारण परिवार से जन्मीं सीमा रैकवार कक्षा 12 तक की पढ़ाई कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल से की थी. सीमा का सपना पुलिस विभाग में भर्ती होकर वर्दी पहनने का था. सीमा के पिता ने उनके सपनों को साकार करने के लिए उसे सागर भेजा था. एक दिन जिम में पावर लिफ्टिंग करती लड़कियों देखकर सीमा का इस तरफ रूझान बढ़ गया.

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अचानक पावर लिफ्टिंग में करियर बनाने का सपना बना लिया

गौरतलब है पुलिस विभाग में नौकरी के सपने को तोड़कर पावर लिफ्टिंग में करियर बनाने के बेटी सपने के बारे जब पिता को पता चला तो इसका कड़ा विरोध किया. समाज के तानों और परंपराओं का हवाला देते हुए उन्होंने सीमा से दो साल तक बात नहीं की. इतना ही नहीं, पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप की तैयारी का खर्च देना भी बंद कर दिया, लेकिन सीमा ने हार नहीं मानी और पावर लिफ्टिंग की ट्रैनिंग अपने बलबूते करती रहीं.

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शुरुआत में दोस्तों और परिचितों ने सीमा के शरीर में आए बदलावों को लेकर ताने खूब कसे. दोस्तों द्वारा कहा गया कि “लड़कों जैसी दिखने लगी हो”. दोस्तों की इन बातों ने सीमा को मानसिक रूप से झकझोर दिया, लेकिन सीमा नहीं टूटी. पावर लिफ्टिंग के प्रति दीवानगी और मुकाम की ओर बढ़ने की जज्बे ने सीमा का आत्मविश्वास कभी टूटने नहीं दिया.

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पिता की नाराजगी और आर्थिक संघर्ष के बीच जारी रखी ट्रेनिंग

पिता की नाराजगी और आर्थिक संकट के बावजूद चैंपियन बनकर उभरी सीमा के सामने अपना सपना पूरा करने के लिए दोहरी चुनौती खड़ी थी. सीमा ने सागर में मेडिकल स्टोर और ब्यूटी पार्लर में काम करके अपनी ट्रेनिंग और खर्च का इंतजाम किया. ट्रेनिंग के लिए सीमा रोजाना सागर से बीना तक का सफर ट्रेन से करती थीं. कई बार टिकट के पैसे नहीं होने से उन्हें परेशानी का सामना भी करना पड़ा.

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सीमा का लक्ष्य अब गोल्ड मेडल जीतकर राष्ट्रीय पहचान बनाना है

उल्लेखनीय है सीमा रैकवार को उनके कठिन संघर्ष का परिणाम सीहोर में आयोजित पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में मिला. सीमा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए शिवपुरी की खिलाड़ी को कड़ी टक्कर देकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया. सिल्वर मेडल जीतने वाली सीमा का कहना है कि अब उसका लक्ष्य गोल्ड मेडल जीत राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना है.

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