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MP में अब चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की आउटसोर्स भर्ती पर रोक, मोहन सरकार ने पलटा फैसला, नियमित पर पहले से बैन

MP Chaturth Shreni Outsourcing Bharti: सरकार ने साल 2023 में जारी उस नीति को समाप्त कर दिया है, जिसमें नियमित भर्ती शुरू होने तक चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं ली जा सकती थीं. उस समय यह व्यवस्था तात्कालिक जरूरतों और नियमित भर्ती में देरी को देखते हुए लागू की गई थी.

MP में अब चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की आउटसोर्स भर्ती पर रोक, मोहन सरकार ने पलटा फैसला, नियमित पर पहले से बैन
MP Class IV Employee Outsourcing Bharti News: अब चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की आउटसोर्स भर्ती पर रोक, मोहन सरकार ने पलटा फैसला, नियमित पर पहले से बैन

MP Class IV Employee Outsourcing Bharti News: मध्यप्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Governmnet) ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों (Class IV Employee) की आउटसोर्स भर्ती (Outsourcing Bharti) पर बड़ा फैसला लेते हुए सभी पुराने आदेश निरस्त कर दिए हैं. वित्त विभाग की ओर से जारी नए सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि अब किसी भी विभाग में आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती नहीं की जा सकेगी. जबकि कर्मचारी मोर्चा ने यह मांग की है कि सभी आउटसोर्स और अस्थायी कर्मचारियों को सरकार नियमित करे. वहीं जिन कर्मचारियों को 50 वर्ष की आयु पूरी करने पर हटाया गया है, उन्हें वापस सेवा में लिया जाए. संगठन ने शासन से आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष निर्धारित करने का भी आग्रह किया है, ताकि सभी विभागों में समान नियम लागू हो सकें.

MP Government Order: नए आदेश की कॉपी

MP Government Order: नए आदेश की कॉपी

2023 का आदेश निरस्त, अब ठेके पर नहीं रखे जाएंगे कर्मचारी

सरकार ने साल 2023 में जारी उस नीति को समाप्त कर दिया है, जिसमें नियमित भर्ती शुरू होने तक चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं ली जा सकती थीं. उस समय यह व्यवस्था तात्कालिक जरूरतों और नियमित भर्ती में देरी को देखते हुए लागू की गई थी. नए आदेश के बाद अब प्रदेश के किसी भी विभाग में चतुर्थ श्रेणी के पदों को ठेके के माध्यम से भरने पर पूरी तरह रोक लागू हो गई है.

पहले क्या था प्रावधान

31 मार्च 2023 को जारी वित्त विभाग के निर्देशों में कहा गया था कि

  • आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति जरूरत के आधार पर विभागाध्यक्ष करते थे.
  • सेवाएं उन्हीं बजटीय योजनाओं के तहत ली जा सकती थीं, जिनमें खर्च की अनुमति मौजूद हो.
  • आउटसोर्स एजेंसी का चयन विभागाध्यक्ष या अधिकृत अधिकारी करते थे.
  • निविदा राशि का निर्धारण वेतन, वैधानिक देयताओं (EPF, ESI) और 10% एजेंसी शुल्क को जोड़कर होता था.

अब यह पूरा प्रावधान निरस्त हो चुका है.

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