White Sandalwood Farming: बुरहानपुर के किसान संजय महाजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' से प्रेरित होकर पारंपरिक केले की खेती को छोड़कर अब सफेद चंदन की खेती शुरू की है. अगले 10 सालों में सफेद चंदन के पौधे जब पेड़ बन जाएंगे, जिससे 10 सालों में अनुमानित मुनाफा 5 करोड़ रुपए होगा..
मन की बात के एपीसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी ने किसानों से अपील कि खेती का लाभ का धंधा बनाने के लिए दीर्घकालीन खेती को अपनाए, जिसका किसान संजय महाजन पर गहरा असर हुआ. केले की खेती से जार-जार संजय महाजन प्राकृतिक आपदा से खड़ी फसल बर्बाद होने से लगातार आर्थिक नुकसान झेल रहे थे.
PM नरेंद्र मोदी के मन की बात बुरहानपुर के किसान के मन में घर कर गई
मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील को अमल करते हुए किसान संजय महाजन ने सफेद चंदन की खेती करने का मन बना लिया. सफेद चंदन और दीर्घकालीन मुनाफे पर शोध के बाद किसान संजय ने अपने खेत में सफेद चंदन की खेती शुरू कर की और चंदन के खेतों के बीच में इंटरक्रॉपिंग कर रहा है.

सफेद चंदन की खेती करने वाले जिले के पहले किसान बने संजय महाजन
बुरहानपुर जिले के सफेद चंदन किसान संजय महाजन ने करीब दो एकड में चंदन के पौधे लगाए है. 200 रुपए पौधे के हिसाब से खरीदकर लगाए चंदन के पौधौं को किसान ने 12X 12 के गैप से लगाए है. उन्होंने बताया कि दो एकड़ खेत में पौधे लगाने में 4 लाख की लागत आई है, जिससे 10 साल बाद 10 लाख रुपए के मुनाफे का अनुमान है.
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सफेद चंदन की खेती से मुनाफे के लिए ऐसे की जाती है पौधों की देख-रेख
चंदन के पौधों की नियमित देख-रेख बहुत जरूरी है, जिसमें उनका पूरा परिवार मदद करता है. फसल की सुरक्षा के लिए समय-समय पर कृषि वैज्ञानिकों से मार्गदर्शन की जरूरी है. चूंकि चंदन का पौधा परजीवी पौधा होता है, लिहाजा पौधों के गैप में फल, सब्जी और अनाज की खेती जरूरी है. इसके ग्रोथ के लिए जैविक खाद, पंचामृत आदि का उपयोग किया जाता है.

अगले10 साल में बनेगा करोड़पति बन जाएगा किसान संजय महाजन
किसान संजय महाजन ने बताया दीर्घकालीन सफेद चंदन के पौधे 10 साल में परिपक्व होते हैं, जिससे चंदन की लकड़ी होगी. उन्होंने बताया महाराष्ट्र के संभाजीनगर की मंडी में चंदन की लकडी का भाव 12,500 प्रति किलो है और वर्तमान भाव के हिसाब से उसे 5 करोड की आमदनी होगी जबकि उनकी प्रारंभिक लागत 4 लाख रुपए है.
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बुरहानपुर के किसान की सफद चंदन की खेती देखने पहुंच रहे किसान
किसान संजय महाजन ने बताया कि उसकी सफेद चंदन की खेती पूरे जिले में चर्चा का विषय है और उसकी खेती को देखने के लिए जिले के विभिन्न गांव के किसान उसके खेत पहुंच रहे हैं. पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से भी किसान उसकी खेती को देखने उसके खेत पहुंच रहे हैं. प्रेरित होकर कई किसानों ने अपने खेतों में भी दीर्घकालीन खेती का मन भी बना लिया है.

पारंपरिक खेती से इतर दीर्घकालीन को लेकर क्या कहते है कृषि वैज्ञानिक?
कृषि विज्ञान केंद्र के नोडल अधिकारी अमोल देशमुख ने बताया कि पारंपरिक फसलों के साथ उच्च मूल्य वाली दीर्घकालीन खेती को किसान की आय बढ़ाने में मदद करते हैं. करीब 10 साल में चंदन के पेड़ परिपक्व हो जाते हैं, जिसकी बाजार में मांग हमेशा बनी रहती है और लागत छोड़कर किसानों को पांच करोड़ की आमदनी गारंटीड हैं.
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