ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध 2026 का असर भारत में भी देखने को मिल रहा है. बड़ी संख्या में लोग खाड़ी देशों में फंसे हुए हैं और निर्यात प्रभावित हो रहा है. मध्यप्रदेश के बुरहानपुर और महाराष्ट्र के जलगांव से खाड़ी देशों में निर्यात होने वाले केले पर फिलहाल ब्रेक लग गया है. खाड़ी देशों में बुरहानपुर व आसपास के क्षेत्रों में उत्पादित केले की काफी डिमांड है. हालांकि फिलहाल बुरहानपुर से खाड़ी देशों में केला निर्यात करने में थोड़ी देर है, लेकिन अगर यह जंग लंबा खिंचता है, तो बुरहानपुर के केला किसानों को भारी नुकसान होगा.
यहां से एक्सपोर्ट क्वालिटी का केला उगा रहे किसान और केला व्यापारियों की चिंताएं बढ़ गई हैं. उनका कहना है कि केले का निर्यात नहीं होने से उन्हें एक्सपोर्ट क्वालिटी का केला मजबूरन घरेलू बाजारों में बेचना पड़ेगा, जिससे उन्हें प्रति क्विंटल 500 से 700 रुपए का नुकसान झेलना पड़ेगा. किसानों और केला निर्यात करने वाले व्यापारियों ने संकट के इस समय में भारत सरकार से गुहार लगाई है कि वह दखल देकर बुरहानपुर से खाड़ी देशों में होने वाले केले के निर्यात को निर्बाध जारी रखने के लिए कोई पहल करें.
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Impact of Iran-Israel-USA War on Banana Exports from Burhanpur India
Photo Credit: NDTV
खाड़ी देशों में बुरहानपुर के केले की डिमांड
केला एक्सपोर्ट के कारोबार से जुड़े राजेंद्र चौकसे ने बताया कि बुरहानपुर और पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के जलगांव जिले में उत्पादित होने वाले केले की मिठास को खाड़ी देशों में काफी पसंद किया जाता है. हर साल ईरान, इराक, सऊदी अरब, ओमान, यमन और दुबई तक यहां के केले की डिमांड रहती है. खाड़ी देशों में केला एक्सपोर्ट होने से हमारे संबंध भी मजबूत हैं. वर्तमान में चल रहे ईरान, इजरायल और अमेरिका के युद्ध के चलते इसका असर केला उत्पादक किसानों और व्यापारियों पर भी देखने को मिलेगा.
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बुरहानपुर की एक्सपोर्ट क्वालिटी के केले की विदेशों में डिमांड
जानकारी के मुताबिक, बुरहानपुर व जलगांव जिले से लगभग 13 हजार मेट्रिक टन केला खाड़ी देशों सहित विदेशों में सप्लाई होता है. किसान राजेंद्र चौकसे ने बताया कि जिले में तीन क्वालिटी के केले उत्पादित होते हैं:
- पहली क्वालिटी (एक्सपोर्ट क्वालिटी)-विदेश और खाड़ी देशों में जाती है.
- दूसरी क्वालिटी (सुपर क्वालिटी)-पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर को जाती है.
- तीसरी क्वालिटी (स्थानीय/जी-9/बसराई क्वालिटी)-यूपी, बिहार, मध्यप्रदेश और स्थानीय बाजार में सप्लाई होती है.

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केला फसल उत्पादन के दो सीजन
- कलाबाग सीजन: जून-जुलाई से शुरू होकर अगले साल अप्रैल तक चलता है.
- मृगबाग सीजन: फरवरी-मार्च से शुरू होकर अक्टूबर माह तक चलता है.
अप्रैल माह में तैयार होगी एक्सपोर्ट क्वालिटी के केले की फसल
किसान राजेंद्र चौकसे ने बताया कि फिलहाल बुरहानपुर से केला खाड़ी देशों में एक्सपोर्ट नहीं हो रहा है, लेकिन अगले माह अप्रैल से किसानों द्वारा लगाई गई एक्सपोर्ट क्वालिटी की फसल तैयार हो जाएगी. तब भी अगर केले का निर्यात बंद रहा, तो किसानों और व्यापारियों को भारी नुकसान होगा. बुरहानपुर में केले के स्टोरेज की कोई व्यवस्था नहीं है, इसलिए मजबूरन इस एक्सपोर्ट क्वालिटी के केले को पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में सप्लाई करना पड़ेगा. वहां पर प्रति क्विंटल 500 से 700 रुपए का भाव टूटेगा, जिससे किसानों और व्यापारियों को नुकसान होगा.

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बुरहानपुर से केला एक्सपोर्ट की प्रक्रिया
महाराष्ट्र सीमा से लगे होने के कारण बुरहानपुर के केले की विदेशों में डिमांड अधिक है. बुरहानपुर में उत्पादित एक्सपोर्ट क्वालिटी का केला, सीमा से लगे महाराष्ट्र के जलगांव, रावेर, सावदा और नासिक से पैकेजिंग के साथ सीधे कंटेनरों में विदेशों तक पहुंचता है. किसान अच्छा क्वालिटी का केला एक्सपोर्ट के लिए ही पसंद करते हैं, क्योंकि इसकी डिमांड सऊदी अरब, ओमान, यमन, दुबई, इराक और ईरान तक रहती है. जिले में लगभग 30 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में केले की फसल होती है.