Bhojshala Dispute Update: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर सोमवार को इंदौर हाईकोर्ट में करीब दो घंटे तक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. डिवीजन बेंच ने मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए नियमित सुनवाई करने का निर्णय लिया था. इसी के तहत सोमवार से इस मामले पर लगातार सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन ने अदालत में अपना पक्ष विस्तार से रखा. उन्होंने भोजशाला के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्व पर जोर देते हुए कई महत्वपूर्ण तथ्य कोर्ट के सामने प्रस्तुत किए.
इतिहास को लेकर पेश किए गए तथ्य
हिंदू पक्ष ने दलील दी कि भोजशाला का इतिहास 10वीं–11वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है और इसे उस समय की महत्वपूर्ण धरोहर माना जाता रहा है. उन्होंने बताया कि इस परिसर का संबंध प्राचीन भारतीय स्थापत्य और शिक्षा परंपरा से भी रहा है, जिसके प्रमाण विभिन्न ऐतिहासिक दस्तावेजों और संरचनाओं में मिलते हैं.
1935 के बोर्ड का भी हुआ उल्लेख
वकील विष्णु शंकर जैन ने वर्ष 1935 में लगाए गए एक बोर्ड का भी उल्लेख किया, जिसमें भोजशाला से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों का जिक्र था. उनके अनुसार, इस बोर्ड के बाद से ही परिसर को लेकर विवाद और कथित अवैध गतिविधियों की शुरुआत हुई. यह बिंदु सुनवाई के दौरान प्रमुखता से उठाया गया.
एएसआई सर्वे पर भी रखे गए तर्क
हिंदू पक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि परिसर में मौजूद पिलरों और संरचनाओं पर उकेरी गई मूर्तिकारी इसके प्राचीन धार्मिक स्वरूप की ओर संकेत करती है. इन रिपोर्ट्स और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट के समक्ष अपने दावे को मजबूत करने का प्रयास किया गया.
सभी पक्षों को मिलेगा पूरा अवसर
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में सभी पक्षों को अपनी-अपनी दलीलें रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा. अदालत ने निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए हर पक्ष की बात ध्यान से सुनने की बात कही.
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भोजशाला विवाद को लेकर अब अगली सुनवाई मंगलवार को होगी. इसमें अन्य पक्ष भी अपने तर्क और साक्ष्य हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेंगे. लगातार सुनवाई के फैसले के बाद इस मामले में जल्द महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकलने की उम्मीद जताई जा रही है.
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