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This Article is From Jan 09, 2026

बच्चे की आंखों की रोशनी के लिए अपनाया ईसाई धर्म, 20 साल बाद भी नहीं लौटी, बागेश्वर महाराज ने कराई परिवार की घर वापसी

Bageshwar Maharaj Dhirendra Krishna Shastri katha: महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में बागेश्वर महाराज की कथा में आधे दर्जन से अधिक लोगों ने सनातन धर्म में घर वापसी की. वर्ष 2006 में बच्चे की आंखों की रोशनी ठीक होने की आशा में परिवार ने ईसाई धर्म अपनाया था. लेकिन, ऐसा कुछ नहीं होने पर परिवार ने अपनी भूल स्वीकार की और विधि-विधान से सनातन धर्म में पुनः प्रवेश किया.

बच्चे की आंखों की रोशनी के लिए अपनाया ईसाई धर्म, 20 साल बाद भी नहीं लौटी, बागेश्वर महाराज ने कराई परिवार की घर वापसी

Dhirendra Krishna Shastri katha: महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के आमगांव में  बागेश्वर धाम के महाराज धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा के मंच से आधे दर्जन से अधिक हिंदुओं ने सनातन धर्म में पुनः वापसी की. इस घर वापसी में गोंदिया जिले के निवासी शिवदास, शिमला, कन्हाभगत, संजय भगत, कुंवर अक्षय समेत अन्य सदस्यों ने सनातन धर्म अपनाया. यह सभी लोग जिले के छोटी गांव पोस्ट तुगुड़ी के रहने वाले हैं. 

जानकारी के अनुसार, करीब बीस साल पहले 2006 में बच्चे की आंखों के स्वास्थ्य में सुधार की आशा में उन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया था. शुक्रवार को परिवार के सभी सभी सदस्यों ने फिर से सनातन धर्म में वापसी की. इसे कलेर उन्होंने कहा कि बागेश्वर महाराज ने देश के धर्मांतरित हिंदुओं से अपील करते हुए कहा था कि जिनके पूर्वज रामलाल, श्यामलाल थे, वे पुनः सनातन धर्म में लौट आएं. इससे प्रभावित होकर उन्होंने यह फैसला लिया था.  

ईसाई धर्म के अनुयायियों ने दिया प्रलोभन 

परिवार के सदस्य संजय भगत ने बताया कि मेरे बेटे का जन्म वर्ष 2006 में हुआ था. लेकिन, उसे कम दिखाई देता था. ईसाई धर्म के अनुयायियों ने हमें यह प्रलोभन दिया कि अगर, हम उनके धर्म में सम्मिलित हो जाएंगे, तो हमारे बच्चे की आंखों की रोशनी ठीक हो जाएगी और वह स्वस्थ हो जाएगा. इस प्रलोभन में हमने परिवार सहित ईसाई धर्म अपना लिया था.

अपनी गलती स्वीकार कर की घर वापसी 

संजय ने कहा कि वहां हमें संतोष प्राप्त नहीं हुआ और बच्चे को स्वस्थ करने व दृष्टि प्रदान करने को लेकर जो आश्वासन दिया गया था, वह पूरा भी नहीं हुआ. ऐसे में हमने अपनी गलती स्वीकार करते हुए आज सपरिवार सनातन धर्म में पुनः वापसी की है.

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अब कभी ऐसा नहीं करेंगे 

परिवार ने बताया कि वे पिछले एक वर्ष से बागेश्वर महाराज को टेलीविजन के माध्यम से देख रहे थे, लेकिन घर वापसी के लिए आवश्यक सहयोग के अभाव में यह कदम नहीं उठा पा रहे थे. अब बागेश्वर महाराज के मंच से हमारी घर वापसी संपन्न हुई, जिससे हमें अत्यंत प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है. हमने यह संकल्प लिया है कि भविष्य में किसी अन्य धर्म को नहीं अपनाएंगे और सदैव अपने सनातन धर्म के प्रति निष्ठावान रहेंगे. घर वापसी करने वाले सभी सदस्यों को महाराज श्री की व्यास पीठ के पास खड़ा कर त्रिकुंड चंदन लगाया गया. मंत्रोच्चार किया गया और उनके गले में सनातन धर्म के प्रतीक बागेश्वर बालाजी की पट्टिका पहनाई गई.

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