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उज्जैन का त्रिवेणी संग्रहालय:400 साल पुराने दीपकों से रोशन हुआ इतिहास, राजमहलों में जलते थे ये दिये

उज्जैन के त्रिवेणी संग्रहालय में 'अभ्यर्धना' प्रदर्शनी के तहत मराठा काल और दक्षिण भारत के 400 साल पुराने दुर्लभ दीपक प्रदर्शित किए गए हैं. सिंहस्थ 2016 में स्थापित यह संग्रहालय अब महाकाल लोक आने वाले पर्यटकों के लिए भारतीय शिल्पकला और ऐतिहासिक धरोहरों को देखने का बड़ा केंद्र बन गया है.

उज्जैन का त्रिवेणी संग्रहालय:400 साल पुराने दीपकों से रोशन हुआ इतिहास, राजमहलों में जलते थे ये दिये

मध्यप्रदेश का उज्जैन सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति का भी अनमोल खजाना समेटे हुए है. ऐसा कुछ आपको तब देखने को मिलता है जब आप महाकाल लोक स्थित त्रिवेणी कला एवं पुरातत्व संग्रहालय में पहुंचते हैं. यहां अलग तरह की दुर्लभ धरोहर सुरक्षित है. ये धरोहरें मराठा काल से लेकर अलग-अलग दौर के राजमहलों की रोशनी और भारतीय शिल्पकला की कहानी सुनाती है.फिलहाल इसमें सबसे खास आकर्षण "अभ्यर्धना" नामक दीप प्रदर्शनी है. इस अनूठी प्रदर्शनी में मराठा काल से लेकर अब तक के करीब 200 पारंपरिक दीपक, प्राचीन चिमनियां और कलात्मक धातु शिल्प प्रदर्शित किए गए हैं. इन धरोहरों को महाराष्ट्र, दक्षिण भारत, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित देश के कई राज्यों से संग्रहित किया गया है, जिनमें कुछ दीपक लगभग 400 वर्ष पुराने हैं.

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कला, समृद्धि और धार्मिक परंपरा के प्रतीक हैं ये ऐतिहासिक दीप

संग्रहालय के जनसंपर्क अधिकारी आदित्य चौरसिया ने बताया कि पहले इन्हीं दीपों और चिमनियों से राजमहलों, मंदिरों और शाही भवनों में प्रकाश किया जाता था. इस प्रदर्शन को देखने से प्रतीत होता है कि उस दौर में दीप केवल रोशनी का साधन नहीं, बल्कि कला, समृद्धि और धार्मिक परंपरा के प्रतीक भी माने जाते थे. प्रदर्शनी में मराठा काल के दुर्लभ दीप सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. मयूर आकृति, बारीक नक्काशी और पारंपरिक डिजाइन वाले ये दीप उस समय की उत्कृष्ट धातु कला और शिल्पकौशल की शानदार झलक दिखाते हैं. इनके अलावा संग्रह में कई ऐसे विशिष्ट दीप भी शामिल हैं, जिनका उपयोग विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और राजकीय आयोजनों में किया जाता था.
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सिंहस्थ महापर्व की धरोहर: एक दशक में बड़ा केंद्र बना  

वर्ष 2016 के सिंहस्थ महापर्व के दौरान स्थापित त्रिवेणी कला एवं पुरातत्व संग्रहालय आज इतिहास, पुरातत्व और भारतीय संस्कृति को करीब से जानने और समझने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है. यहां आने वाले पर्यटक सिर्फ प्राचीन वस्तुएं नहीं देखते, बल्कि सदियों पुरानी भारतीय परंपरा, कला और गौरवशाली इतिहास से भी रूबरू होते हैं. संग्रहालय प्रबंधन द्वारा इस विशेष दीप प्रदर्शनी का आयोजन वर्ष 2023 से निरंतर किया जा रहा है, जो हर साल शोधकर्ताओं और कला प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है.
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