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लटकती छत और दरकती दीवारों के बीच झूल रहा बच्चों का भविष्य, शिक्षकों से लेकर बच्चे तक परेशान

Schools in Bad Condition: आगर मालवा के सरकारी स्कूलों की स्थिति देखकर ही लगता है कि लापरवाही की हदें किस हद तक पार हो गई हैं. यहां के स्कूल की छतें किसी भी समय गिर सकती है. आइए आपको इसके बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं.

लटकती छत और दरकती दीवारों के बीच झूल रहा बच्चों का भविष्य, शिक्षकों से लेकर बच्चे तक परेशान
सरकारी स्कूल की हालत बहुत जर्जर

Agar Malwa News: पिछले महीने राजस्थान (Rajashtan) के झालावाड़ जिले में स्कूल की छत गिरने से सात बच्चों की दब कर मौत हो गई थी और करीब 30 बच्चे घायल हो गए थे. ऐसे ही घटना को मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के आगर मालवा जिले के सरकारी स्कूल न्योता दे रहे हैं. प्रदेश की राजधानी भोपाल (Bhopal) से करीब 250 किलोमीटर दूर आगर मालवा के सुठेली के खेड़ा के प्रायमरी स्कूल (Primary School) का नजारा किसी को भी परेशान कर सकता है. यहां प्रवेश द्वार से लेकर कक्षाओं तक जाने में डर बना रहता है. दो कमरे के इस स्कूल में बैठने लायक एक भी कक्ष नहीं है. क्लासरूम में संविधान निर्माता बाबा साहब आंबेडकर और विद्या की देवी कही जाने वाली सरस्वती मां की तस्वीरें दीवार पर टंगी हुई है. छत से पानी की बूंदे टपक रही है. छत की हालत देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि कब गिर जाए कुछ भरोसा नहीं. फर्श जगह-जगह से उखड़ा हुआ मिलता है.

सरकारी स्कूल की छत पर तिरपाल लगा

सरकारी स्कूल की छत पर तिरपाल लगा

एक ही शिक्षक के भरोसे पूरा स्कूल

यहां के शिक्षक राकेश चौधरी ने एनडीटीवी को बताया कि यहां बैठने के लिए कोई जगह नहीं है. इसलिए बरामदे में बैठाना पड़ता है. छत पूरी खराब हो कर टपकती रहती है और फर्श पूरा उखड़ता जा रहा है. राकेश इस स्कूल में अकेले शिक्षक है. पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं अकेले ही बच्चों को पढ़ाते है. सरकार एक अकेले शिक्षक की इतना पारंगत मानती है कि हिंदी, अंग्रेजी, गणित, सामाजिक विज्ञान सब कुछ एक ही शिक्षक पढ़ा ले.

स्कूल के बरामदें में पढ़ने को मजबूर हुए छात्र

स्कूल के बरामदें में पढ़ने को मजबूर हुए छात्र

सेना में जाने का सपना देखता है राजपाल

इसी स्कूल की पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाला राजपाल सेना में भर्ती हो कर देश की सेवा करने का सपना देखता है. लेकिन, मुकाबला दुश्मन देश की सेना से नहीं, बल्कि उसके मुस्तकबिल की आड़ में आने वाले सिस्टम से कर रहा है. टपकती छत, दरकती दीवार और उखड़ी जमीन पर बैठ नहीं सकते... बरामदे में बनी पाली के ऊपर बैठ कर तालीम का झंडा बुलंद करने की कोशिश कर रहे हैं.

सुठेली गांव के प्राइमरी स्कूल का भी यही हाल

सुठेली गांव का प्राइमरी स्कूल बाहर से ठीक-ठाक हालत में दिखा. जैसे ही अंदर दाखिल हुए, एक कमरे में पांच कक्षाएं चलती दिखी. एक छोर पर सरिता राठौर पहली से तीसरी क्लास के बच्चों को संभाले हुई थी, तो दूसरी तरफ स्कूल के प्रभारी मोहन लाल मालवीय मोर्चा संभाले हुए चौथी और पांचवीं के बच्चों को अपने अनुभव का लाभ दे रहे थे. दरअसल, यह कमरा स्कूल का अतिरिक्त कक्ष है. मूल स्कूल भवन तो बगल में है, जो पूरी तरह से जर्जर हो चुका है.

सरकारी प्राइमरी स्कूल का जर्जर हालत

सरकारी प्राइमरी स्कूल का जर्जर हालत

एक रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश में 1,23,412 स्कूलों में एक करोड़ 53 लाख 61 हजार विद्यार्थी पढ़ रहे हैं. जबकि, इन स्कूलों में 6 लाख 39 हजार 525 शिक्षक पदस्थ हैं. यानी देश में संचालित कुल स्कूलों में 8.33 प्रतिशत स्कूल मध्य प्रदेश में ही हैं. लेकिन, यहां के गांवों में मौजूद स्कूलों की हालत इतनी खराब है.

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जिला शिक्षा अधिकारी ने कही ये बात

इस पूरे मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी एमके जाटव ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत शासन ने कक्षा एक से आठ तक की शालाओं के लिए स्कूल कंपोजिट ग्रांट की 25 प्रतिशत राशि स्कूल को जारी की जा चुकी है. ये राशि छात्र संख्याओं की संख्या के मान से है, जो करीब तीन हजार से लेकर 18 हजार रुपये तक की है. ये राशि अप्रैल में जारी हो चुकी है. निर्देश भी शासन की तरफ से जाती हुए है कि स्कूलों का जो रिपेयरिंग है, वो करा ली जाए.

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