
Madhya Pradesh News : मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के अशोक नगर जिले में NDTV की खबर का बड़ा असर देखने को मिला है. हाल ही में चैनल ने स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग की लापरवाही के कारण एक आदिवासी परिवार के पांच में से चार बच्चों की मौत की खबर को प्रमुखता से दिखाया था. इस खबर के प्रसारित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और बचे हुए कुपोषित बच्चे को बचाने के लिए जरूरी कदम उठाए गए. खबर के बाद महिला बाल विकास विभाग के जिला परियोजना अधिकारी चंद्रसेना भिड़े ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रीति आदिवासी और उसके कुपोषित बच्चे को खोजकर सिविल अस्पताल मुंगावली के NRC (पोषण पुनर्वास केंद्र) में भर्ती कराया.
रिपोर्ट में हुई कुपोषण की पुष्टि
जांच में यह पाया गया कि महिला का हीमोग्लोबिन स्तर अभी भी मात्र 7 ग्राम है, जबकि बच्चा भी कुपोषित है. अब मां और बेटे दोनों को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है. गौरतलब है कि प्रीति आदिवासी 15 अगस्त को सिविल अस्पताल में भर्ती हुई थीं, उस समय उनके शरीर में मात्र 1.5 ग्राम हीमोग्लोबिन पाया गया था. इस स्थिति को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया था.
नवजात बच्चे की हुई थी मौत
.... लेकिन 21 अगस्त को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया और उसके बाद उनकी कोई मॉनिटरिंग नहीं की गई. दुर्भाग्यवश, डिस्चार्ज के दो दिन बाद उनके नवजात बच्चे की मौत हो गई, लेकिन इस मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों को नहीं थी.
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खबर के बाद जागा प्रशासन
NDTV की तरफ से इस घटना को उजागर करने के बाद, प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया और अब प्रीति आदिवासी और उनके बच्चे को NRC वार्ड में भर्ती करवा दिया है, जहां उनकी स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है. यह घटना आदिवासी क्षेत्र और दूरस्थ इलाकों में सरकारी योजनाओं और दावों की असलियत को उजागर करती है, जहां जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण कई मासूम जिंदगियों का नुकसान हो रहा है.
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