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This Article is From Jul 08, 2023

उज्जैन: महाकाल की नगरी से ही शुरु हुआ विक्रम संवत, कृष्ण से भी नाता

उज्जैन में में महाकाल का मंदिर स्थित है. जो भगवान शिव का ही एक स्वरूप है. इस स्वरूप से जुड़ी सबसे दिलचस्प और विचित्र बात ये है कि शिवलिंग पर प्रतिदिन सुबह ताजे भस्म से अभिषेक होता है.

उज्जैन: महाकाल की नगरी से ही शुरु हुआ विक्रम संवत, कृष्ण से भी नाता

मध्यप्रदेश के मालवांचल में बसा उज्जैन प्रदेश के प्राचीनतम शहरों में से एक है. इसे प्राचीन काल में अवंतिका के नाम से जाना जाता था. कुछ ऐतिहासिक कथाओं के अनुसार 101 ईसा वर्ष पूर्व इस नगरी पर विक्रमादित्य का राज था. गीता प्रेस, गोरखपुर भविष्य पुराण के पेज नंबर 245 के अनुसार उन्होंने यहां सौ सालों तक राज का किया. हिंदू पंचांग देखते हुए हम जिस विक्रम संवत की बात करते हैं. उसकी शुरुआत भी विक्रमादित्य से ही होती है.

कालों में काल महाकाल की महिमा से ये शहर महाकाल की नगरी कहलाता है. जिससे कई दिलचस्प तथ्य भी जुड़े हुए हैं. जो ऐतिहासिक और धर्म की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस शहर को और खास और दिलचस्प बनाते हैं.

कृष्ण, शिव और शक्ति से जुड़ा शहर

  • इस शहर में महाकाल का मंदिर स्थित है. जो भगवान शिव का ही एक स्वरूप है. इस स्वरूप से जुड़ी सबसे दिलचस्प बात ये है कि शिवलिंग पर प्रतिदिन सुबह ताजे भस्म से अभिषेक होता है. भस्म आरती के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ रोज जुटती है.
  • शिव की शक्ति का भी यहां अहम स्थान है. इस शहर में हरसिद्धि माता का शक्तिपीठ है. जो देवी सती के अंगों पर स्थापित शक्तिपीठों में से एक है.
  • पौराणिक कथाओं के अनुसार जहां भी ये शक्तिपीठ स्थापित है वहां काल भैरव का मंदिर भी स्थापित होगा. सो उज्जैन में कालभैरव का मंदिर भी स्थित है. जिन्हें मदिरा का भोग लगता है. उन्हें भोग लगने के बाद मदिरा कहां जाती है इस दिलचस्प रहस्य की खोज आज तक नहीं हो सकी है.
  • इस शहर से श्रीकृष्ण का भी गहरा नाता है. श्री कृष्ण ने जिस आश्रम में आकर शिक्षा ग्रहण की. सुदामा जैसे मित्र बनाए, वो सांदीपनि आश्रम भी उज्जैन में ही स्थित है.

ऐतिहासिक महत्व

क्षिप्रा नदी के किनारे बसे इस शहर राजा विक्रमादित्य ने बरसों राज किया है. दंत कथाओं में मशहूर सिंहासन बत्तीसी, जो राजा विक्रमादित्य का सिंहासन माना जाता है. उसका नाता भी इसी शहर से रहा है.

विक्रमादित्य का दरबार भी रुद्रसागर के बीच टीले पर, इस शहर में ही देखा जा सकता है. जिसमें नवरत्न हुआ करते थे. जिनके नाम थे

1. धनवंतरी

2. क्षिपाका

3. अमरसिम्हा

4. शंकु

5. वेताल भट्ट

6. घटकारपारा

7. कालीदासा

8. वराहमिहिर

9. वररुचि

विक्रमादित्य का राज तुर्की के इस्ताम्बुल शहर की प्रसिद्ध लायब्रेरी मकतब-ए-सुल्तानिया में रखी एक ऐतिहासिक किताब 'सायर-उल-ओकुल' में भी दर्ज है. जिसमें उसे सबसे न्यायप्रिय, उदार समय बताया गया है. इसी के आधार पर कहा जाता है कि महाकाल की नगरी में रात गुजारने की हिम्मत सिर्फ वही राजा कर सकता है जो विक्रमादित्य जैसा न्यायप्रिय, उदार और प्रजा का हितैषी हो.

महाकाल लोक

आधुनिक समय में महाकाल के इस शहर का मुख्य आकर्षण है महाकाल लोक. इस भव्य लोक में भगवान शिव से जुड़ी अलग अलग कथाओं का वर्णन है. ये वर्णन सुंदर और सटीक मूर्तियों के जरिए किया गया है. जिन्होंने शिव चालीसा नहीं पड़ी या शिव से जुड़ी किंवदंतियां नहीं सुनी हैं वो महाकाल  लोक में आकर भगवान शिव की महिमा को महसूस कर सकते हैं.

अन्य जानकारी -

क्षेत्रफल-  6091 वर्ग किमी

जनसंख्या : 19,86,864

गांव: 1112

पुरुष: 10,16,289

महिला: 9,70,575

वि‍कासखंड -6

पंचायत – 609

विधानसभा क्षेत्र- 7

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