
मध्य प्रदेश के उत्तर पूर्वी छोर पर बसा है एक छोटा सा जिला सीधी, अपने प्राकृतिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है. सीधी जिले में प्राकृतिक संसाधनों की कोई कमी नहीं है. यहां की कोयला खदानें देशभर में कई इंडस्ट्रीज की मांग पूरी करती हैं. इसके साथ ही सोन नदी के पास बसे होने के कारण यहां की मिट्टी भी बहुत उपजाऊ मानी जाती है. यह मुगल शासक अकबर के नवरत्नों में से एक और उनके चहेते कहे जाने वाले बीरबल का जन्म स्थान भी है. इस जिले में आदिवासियों की जनसंख्या भी खासी है.
कैसा रहा सीधी का इतिहास
'सीधी' रीवा रियासत का हिस्सा था और यह इलाका जागीरदारों के अधीन था. इस क्षेत्र में बघेलों का राज्य था. वर्ष 1938 में सीधी को प्रशासकीय दर्जा प्राप्त हुआ और साल 1949 में इसे विंध्य प्रदेश का जिला मुख्यालय घोषित किया गया. सीधी में ज्यादातर चौहान जाति के क्षत्रियों की बस्ती होने के चलते इसे 'चौहान खंड' भी कहा जाता है. अभिलेखों के अनुसार नरसिंह नाम के चौहान मैनपुर से यहां आए और चुरहट के राजघराने ने उनको सीधी में 64 ग्राम दिये थे.
औद्योगिक विकास और संस्कृति
सीधी जिले में बहुत बड़ी संख्या में कोयला पाया जाता है, जो देश के कोने कोने में बसी इंडस्ट्रीज के पास भेजा जाता है. यहां विंध्याचल थर्मल पावर स्टेशन भी मौजूद है. यह एक बहुत बड़े क्षेत्र की बिजली की मांग को पूरा करता है. इसके अलावा उपजाऊ भूमि होने के कारण यहां के लोग कृषि पर निर्भर हैं. संस्कृति की ओर नजर डाली जाए तो बघेलखंड का हिस्सा होने के कारण यहां मुख्य रूप से बघेली बोली जाती है.
पर्यटन स्थल और मुख्य आकर्षण
सीधी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है. यहां मौजूद संजय नेशनल पार्क प्रमुख आकर्षणों में से एक है. यह संजय-डुबरी टाइगर रिजर्व का एक हिस्सा है. इसके अलावा बगदरा अभ्यारण, सोन घड़ियाल सेंचुरी आदि जगहें पर्यटकों को अपनी ओर खींचती हैं.
सीधी एक नजर में
- जिला मुख्यालय -सीधी
- क्षेत्रफल -4851वर्ग किमी
- जनसंख्या - 13,97,000
- जनसंख्या घनत्व -232/वर्ग किमी
- लिंगानुपात - 952/1000
- साक्षरता -66.09%
- तहसील -7
- संभाग -रीवा
- विधानसभा क्षेत्र -4
- लोकसभा क्षेत्र-1