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This Article is From Aug 02, 2023

गुना में पांच महीने से शिक्षकों को नहीं मिला वेतन, गहराया रोज़ी-रोटी का संकट

गुना में 467 से अधिक नव नियुक्त शिक्षक पांच महीने से अपने वेतन का इंतज़ार कर रहे हैं. वेतन न मिलने की वजह इन शिक्षकों के ऊपर रोज़ी रोटी का संकट गहराता जा रहा है.

गुना में पांच महीने से शिक्षकों को नहीं मिला वेतन, गहराया रोज़ी-रोटी का संकट
प्रतीकात्मक फोटो
गुना:

मध्य प्रदेश के गुना में 467 से अधिक नव नियुक्त शिक्षक पांच महीने का लंबा समय बीत जाने के बाद भी वेतन के लिए भटक रहे हैं. राज्य में साल 2019 में  शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए सरकार ने आवेदन निकाले थे. जिसकी परीक्षा में 2 लाख 40 हज़ार अभ्यार्थी शामिल हुए थे. इस परीक्षा के बाद 22 हज़ार शिक्षकों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिये गए थे. जिसके नतीजे मार्च 2022 में आ गए थे और इसके वेरिफ़िकेशन के काम में दो महीने का समय लग गया. जिसमें 30 हज़ार शिक्षक चयनित हुए और 22670 को नियुक्ति दी गई.   

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दरअसल, दस्तावेज ऑनलाइन है सत्यापन ऑफलाइन हो गया है, यूनिक कोड जारी हो गए हैं बावजूद इसके शिक्षकों की फ़ाइल गुना के वित्तीय कार्यालय में रुकी पड़ी है. जबकि कार्यालय आयुक्त कोष एवं लेखा मध्य प्रदेश ने भी पूरे कोषालय अधिकारियों को भुगतान के लिए अनिवार्य रूप से 31 दिसम्बर 2023 तक जानकारी पूरी करने के आदेश दिए हैं लेकिन अभी तक काम लटका हुआ है. 

गुना ज़िले में 467 से अधिक नव नियुक्त शिक्षक पांच महीने का लंबा समय बीत जाने के बाद भी वेतन के लिए भटक रहे हैं. ज़िम्मेदारों को ज्ञापन देने के बाद भी शिक्षकों की समस्याओं का कोई समाधान नहीं हुआ है. सूत्रों का कहना है कि वेतन में देरी भ्रष्टाचार की वजह से लटकी हुई है. जबकि दस्तावेज़ ऑनलाइन होने के बाद ट्रेजरी कोड 24 घंटे में जेनरेट हो जाता है लेकिन पांच महीने बीत गये. अधिकारियों की लापरवाही की वजह से शिक्षकों का वेतन अधर में लटका हुआ है. वहीं, गुना जिले के सभी संकुल प्राचार्यों ने दस्तावेज़ों को पूरा कर DDO कार्यालय में जमा कर दिया है. 

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वहीं, गुना ज़िले के फ़तेहगढ में हायर सेकेंडरी एवं माध्यमिक विद्यालय की शिक्षिका राजेश्वरी बिना वेतन के चार महीने से स्कूल में पढ़ा रही है, लेकिन अब इनके सामने रोज़ी रोटी का संकट खड़ा हो गया है. राजेश्वरी 300 किलोमीटर दूर राजस्थान के झालावाड़ ज़िले से आई हैं. वह फ़तेहगढ में रहकर पांच महीने से माध्यमिक विद्यालय फ़तेहगढ में पढ़ा रही हैं. अपने साथ राजेश्वरी एक महीने का खर्च घर से लेकर आईं थीं लेकिन अब उन्होंने एक महीने का उधार ले लिया. किराये के मकान का भी तीन महीने का किराया देना है किराना दुकानदार की भी उधारी हो गई है, लेकिन उन्हें अबतक सैलरी नहीं मिली, क्योंकि इनकी फ़ाइल ट्रेजरी कार्यालय गुना में पांच महीने से अटकी पड़ी है.  
 

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