Amit Shah Chhattisgarh Visit: केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah 7 फरवरी को छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के जगदलपुर (Jagdalpur) पहुंचेंगे. उनके इस दौरे को सुरक्षा और राजनीतिक, दोनों नजरियों से अहम माना जा रहा है. शाह यहां बस्तर के पारंपरिक सांस्कृतिक आयोजन Bastar Pandum के उद्घाटन में शामिल होंगे. इसके साथ ही वे नक्सल मोर्चे पर चल रहे अभियानों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक भी लेंगे.
बैठक में मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai, राज्य के गृह मंत्री Vijay Sharma, डीजीपी, आईजी और केंद्रीय सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे. माना जा रहा है कि इस बैठक में नक्सल विरोधी अभियानों की रणनीति और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा होगी.

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नक्सलवाद के खिलाफ ‘डेडलाइन मिशन'
केंद्र सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है कि देश से माओवाद खत्म करने के लिए 31 मार्च 2026 की समयसीमा तय की गई है. सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि बस्तर क्षेत्र में नक्सल प्रभाव अब अपने अंतिम चरण में है. हाल ही में सुकमा क्षेत्र में एक बड़े इनामी नक्सली कमांडर के आत्मसमर्पण को भी इसी दिशा में बड़ी सफलता माना जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार अब सुरक्षा बलों की रणनीति “क्लियर, होल्ड और डेवलप” मॉडल पर केंद्रित है, जिसमें सुरक्षा के साथ-साथ विकास कार्यों को भी गति दी जा रही है.
बैठक में क्या होगा खास?
शाह की अध्यक्षता में होने वाली समीक्षा बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा संभावित है:
- नक्सल प्रभावित इलाकों में चल रहे ऑपरेशन की स्थिति
- आत्मसमर्पण नीति के नतीजे
- नए सुरक्षा कैंपों और सड़क कनेक्टिविटी की प्रगति
- स्थानीय युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की योजनाएं
राज्य सरकार की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी योजनाओं को तेज़ी से लागू किया जा रहा है.
दौरे पर सियासत भी तेज
शाह के दौरे को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. कांग्रेस प्रवक्ता Dhananjay Thakur ने तंज कसते हुए कहा कि नक्सल मोर्चे की वास्तविक स्थिति की जानकारी अधिकारी दे सकते हैं, ऐसे में गृह मंत्री के लगातार दौरों के पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं. कांग्रेस का कहना है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि बस्तर में सुरक्षा अभियानों के साथ विकास और स्थानीय संसाधनों की सुरक्षा को लेकर उसकी क्या नीति है.
बस्तर के भविष्य पर नजर
नक्सल समस्या के कमजोर पड़ने के साथ अब बस्तर के विकास को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. सरकार का दावा है कि आने वाले समय में बस्तर क्षेत्र में आधारभूत ढांचे, उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा. हालांकि राजनीतिक बहस जारी है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इसे निर्णायक दौर मान रही हैं. अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले महीनों में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही कार्रवाई किस दिशा में जाती है और बस्तर की तस्वीर कितनी बदलती है.
- 7 फरवरी को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आएंगे छत्तीसगढ़
- नक्सलवाद को लेकर छग में करेंगे हाई लेवल बैठक,
- 31 मार्च की डेडलाइन को लेकर होगी चर्चा,
- सीएम साय, गृहमंत्री विजय शर्मा रहेंगे बैठक में मौजूद,
- डीजीपी, आईजी समेत तमाम अधिकारी होंगे मौजूद,
बस्तर पंडुम कार्यक्रम में भी शामिल होंगे शाह
बस्तर पंडुम के उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय मंत्री अमित शाह 7 फरवरी को जगदलपुर दौरे पर रहेंगे. और बस्तर पंडुम का शुभारंभ करेंगे साथ ही नक्सल मोर्चे पर निर्णायक लड़ाई की सुरक्षा बलों के अधिकारी के साथ समीक्षा करेंगे. अमित शाह के दौरे को लेकर सियासत शुरू हो गई है कांग्रेस अमित शाह के दौरे पर सवाल उठा रही हैं कि आखिर अमित शाह छत्तीसगढ़ बार-बार क्यों आ रही है. देश से माओवाद के खत्में 31 मार्च 2026 की तारीख नजदीक आ गई है बस्तर से माओवाद अपनी अंतिम सांस गिन रहा है बुधवार को भी सुकमा में 25 लाख के इनामी LOC कमांडर सुखराम ने हथियार डाल कर आत्मसमर्पण कर दिया है. डेड लाइन के दो महीने सभी कम समय बचा है इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 7 फरवरी को बस्तर पंडुम के आयोजन के साथ ही माओवाद के खिलाफ एन्टी नक्सल आपरेशन की समीक्षा करने वाले है इस बैठक में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा समेत सुरक्षा बल से जुड़े अधिकारी शामिल होंगे.
अमित शाह के दौरे पर उठ रहे ये सवाल
अमित शाह के दौरे को लेकर सियासत भी तेज हो गईं है, कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने कटाक्ष करते हुए कहा नक्सल मोर्चे पर कितनी प्रगति है, उसकी जानकारी अधिकारी दे सकते है. कही उनकी नजर बस्तर के खनिज पर तो नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश से नक्सलवाद खत्म हो, ये पूरा प्रदेश चाहता है और फोर्स के द्वारा नक्सल खत्म करने के लिए जो अभियान चल रहा है, वह स्वागत योग है. इस बीच बार-बार केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ आते हैं. बस्तर जाते है. कहा जाता है कि नक्सलवाद खात्मे की रिपोर्ट लेने आते हैं कि नक्सलवाद कितना बचा है. इसके आगे उन्होंने कहा कि ऐसे में सवाल ये है कि क्या केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ पूरी कार्यवाही की रिपोर्ट नहीं मिलती है, जो गृहमंत्री बार-बार छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ आना पड़ता है या अमित शाह का मकसद कुछ और है कि वहां पर खनन संपदा को उद्योगपतियों को जो दिया जाना है, उसका रास्ता क्लियर हुआ कि नहीं ये देखने आते हैं. विपक्ष ने ये भी कहा कि नक्सलवाद को खत्म करनी है, इसके लिए सभी फोर्स की कार्रवाई के पक्ष में खड़े हैं. भाजपा को अपनी नीति और नियत स्पष्ट करनी चाहिए. बस्तर के नक्सलवाद खत्म होने के बाद जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा सुरक्षित रहेंगी या नहीं?
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नक्सल समस्या अपने अंतिम चरण में है, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री के दौरे पर सियासत जारी है. अब देखना ये है कि नक्सल समस्या खत्म होने के बाद बस्तर का किस तरह विकास होता है.
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