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Private School: छत्तीसगढ़ में वार्षिक परीक्षा को लेकर नए आदेश पर बवाल, प्राइवेट स्कूलों ने दी तालाबंदी की चेतावनी

Chhattisgrah Private School: निजी स्कूलों का कहना है कि मार्च में वार्षिक परीक्षाएं प्रस्तावित हैं और फरवरी में नियमों में बदलाव करना प्रशासनिक दृष्टि से गलत है. इससे स्कूलों की तैयारी, परीक्षा कार्यक्रम और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होगी. स्कूल प्रबंधन का तर्क है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय में निर्णय पहले से और समुचित चर्चा के बाद लिए जाने चाहिए.

Private School: छत्तीसगढ़ में वार्षिक परीक्षा को लेकर नए आदेश पर बवाल, प्राइवेट स्कूलों ने दी तालाबंदी की चेतावनी

Private School Examination: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में निजी स्कूलों की वार्षिक परीक्षाओं को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से स्थानीय स्तर की वार्षिक परीक्षाएं जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के माध्यम से कराए जाने के फैसले पर निजी स्कूल प्रबंधन ने कड़ा विरोध जताया है. प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन का कहना है कि यह निर्णय न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में अनावश्यक दखल भी है.

“होम एग्जाम हमेशा स्कूल ही लेते आए हैं”

एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा कि परीक्षाएं दो तरह की होती हैं—एक बोर्ड परीक्षा और दूसरी होम परीक्षा. बोर्ड परीक्षाएं संबंधित बोर्ड कराते हैं, जबकि होम परीक्षाएं स्कूल अपने स्तर पर आयोजित करते आए हैं. ऐसे में अचानक डीईओ को यह जिम्मेदारी देना शिक्षा प्रणाली की स्थापित परंपरा के खिलाफ है.

CBSE और ICSE को बाहर क्यों रखा गया?

राजीव गुप्ता ने इस फैसले में भेदभाव का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि यदि यह नियम लागू किया जा रहा है, तो CBSE और ICSE बोर्ड के स्कूलों को इससे बाहर क्यों रखा गया है. उन्होंने तीखे अंदाज़ में कहा कि अगर विभाग को इतना ही नियंत्रण चाहिए, तो यह भी तय कर दें कि स्कूल क्या खाएगा और क्या पहनेगा.

परीक्षा से पहले नियम बदलना अनुचित

निजी स्कूलों का कहना है कि मार्च में वार्षिक परीक्षाएं प्रस्तावित हैं और फरवरी में नियमों में बदलाव करना प्रशासनिक दृष्टि से गलत है. इससे स्कूलों की तैयारी, परीक्षा कार्यक्रम और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होगी. स्कूल प्रबंधन का तर्क है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय में निर्णय पहले से और समुचित चर्चा के बाद लिए जाने चाहिए.

आंदोलन की चेतावनी

एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि यदि यह आदेश वापस नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा. उन्होंने यहां तक कहा कि आवश्यकता पड़ने पर स्कूलों की चाबियां स्कूल शिक्षा विभाग को सौंप दी जाएंगी.

राजनीतिक प्रतिक्रिया भी शुरू

इस फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं. कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने इस निर्णय को “तानाशाही रवैया” बताते हुए कहा कि इससे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है.

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फिलहाल, निजी स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर चर्चा और तेज हो सकती है. वहीं, आंदोलन की संभावना से शिक्षा जगत में हलचल बढ़ गई है.

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