SIR Second Phase in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के छुरा, फिंगेश्वर और देवभोग क्षेत्रों में मतदाता सूची से नाम काटे जाने के आरोपों ने सियासी हलचल तेज कर दी है. दरअसल, यहां अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने आरोप लगाया है कि फॉर्म 7 का दुरुपयोग कर उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है.
तहसील कार्यालय से नोटिस मिलने के बाद कई परिवारों में चिंता का माहौल है. प्रभावित लोगों का कहना है कि वे वर्षों से संबंधित वार्डों में रह रहे हैं और उनके पास आधार कार्ड, राशन कार्ड, बिजली बिल जैसे सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं, फिर भी उन्हें अनुपस्थित या स्थानांतरित दिखाया जा रहा है.
मामले में गरमाई राजनीति
मामले ने राजनीतिक रूप ले लिया है. कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुखचंद बेसरा के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने तहसील कार्यालय और थाना पहुंचकर ज्ञापन सौंपा. कांग्रेस का आरोप है कि यह महज प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि सुनियोजित राजनीतिक प्रयास है. जिला अध्यक्ष ने कहा कि यदि बिना निष्पक्ष जांच के नाम विलोपित किए गए तो कांग्रेस व्यापक आंदोलन करेगी.
तीन ब्लॉकों तक फैला मामला
आरोप है कि विवाद केवल छुरा तक सीमित नहीं है, बल्कि फिंगेश्वर और देवभोग जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में नामों पर आपत्ति दर्ज की गई है. स्थानीय लोगों के मुताबिक करीब 300 से अधिक मतदाताओं के नामों को लेकर सवाल खड़े हुए हैं. लोगों का कहना है कि यदि किसी मतदाता के नाम पर आपत्ति है तो उसकी जमीनी जांच होनी चाहिए, न कि एकतरफा कार्रवाई.
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
तहसील कार्यालय में बड़ी संख्या में पहुंचे प्रभावित नागरिकों ने प्रशासन से अपील की है कि किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए. प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है, हालांकि अब तक आधिकारिक रूप से विस्तृत बयान सामने नहीं आया है.
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इस पूरे घटनाक्रम ने जिले का राजनीतिक वातावरण गर्म कर दिया है. एक ओर अल्पसंख्यक समुदाय और कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं, वहीं भाजपा की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज हो सकता है, क्योंकि मतदाता सूची में संशोधन जैसे मुद्दे चुनावी मौसम में बेहद संवेदनशील माने जाते हैं.
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