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Magh Mela 2026: "संघ प्रमुख को Z+ सुरक्षा; धर्मगुरु के स्नान पर रोक", शंकराचार्य से बदसलूकी पर भड़की कांग्रेस

Jagadguru Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati: कांग्रेस का दावा है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का दोष सिर्फ इतना है कि वे सरकार की नीतियों और व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते रहे हैं. पार्टी के मुताबिक शंकराचार्य ने आधे‑अधूरे राम मंदिर की प्राण‑प्रतिष्ठा, महाकुंभ की व्यवस्थाएं और कोविड काल के दौरान गंगा में तैरती लाशों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा था.

Magh Mela 2026: "संघ प्रमुख को Z+ सुरक्षा; धर्मगुरु  के स्नान पर रोक", शंकराचार्य से बदसलूकी पर भड़की कांग्रेस
Magh Mela 2026: "संघ प्रमुख को जेड प्लस सुरक्षा और धर्मगुरु के स्नान पर रोक", शंकराचार्य से बदसलूकी पर भड़ी कांग्रेस

Prayagraj Magh Mela 2026: प्रयागराज माघ मेले में जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Jagadguru Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati) को शाही स्नान से रोके जाने के मामले ने राजनीतिक रूप से तूल पकड़ लिया है. इस घटना को लेकर कांग्रेस (Congress) ने भाजपा सरकार (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं. कांग्रेस का कहना है कि यह केवल एक धर्माचार्य का अपमान नहीं, बल्कि सनातन परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं पर सीधा प्रहार है. कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुमित्रा घृतलहरे ने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले करीब 40 वर्षों से नियमित रूप से शाही स्नान करते आ रहे हैं और यह पहली बार है जब उन्हें इस सदियों पुरानी परंपरा से रोका गया है. उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या का शाही स्नान एक ऐतिहासिक धार्मिक परंपरा है, जिसे न तो मुगल शासकों ने रोका और न ही अंग्रेजों ने, लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार ने इस परंपरा को बाधित किया है.

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सरकार की ओर से संवाद की कोई पहल नहीं : कांग्रेस

कांग्रेस का आरोप है कि शंकराचार्य के साथ इस दौरान दुर्व्यवहार किया गया. उनके शिष्यों को जबरन रोका गया और कथित तौर पर बाल पकड़कर घसीटे जाने तक की घटनाएं सामने आई हैं. इतना ही नहीं, शंकराचार्य को उनकी पालकी तक ले जाने की अनुमति भी नहीं दी गई. पार्टी का कहना है कि हालात इतने गंभीर हो गए कि शंकराचार्य को अपनी सुरक्षा को लेकर आशंका जाहिर करनी पड़ी और वे पिछले 36 घंटे से अनशन पर बैठे हुए हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक संवाद का कोई प्रयास नहीं किया गया है.

कांग्रेस ने इस पूरी घटना को लेकर दोहरे मापदंड का आरोप भी लगाया है. पार्टी का कहना है कि एक ओर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को जेड प्लस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है, वहीं दूसरी ओर एक प्रतिष्ठित शंकराचार्य और उनके समर्थकों के साथ कथित रूप से मारपीट की जाती है.

कांग्रेस का दावा है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का दोष सिर्फ इतना है कि वे सरकार की नीतियों और व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते रहे हैं. पार्टी के मुताबिक शंकराचार्य ने आधे‑अधूरे राम मंदिर की प्राण‑प्रतिष्ठा, महाकुंभ की व्यवस्थाएं और कोविड काल के दौरान गंगा में तैरती लाशों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा था, जिससे भाजपा असहज है और इसी वजह से उनके खिलाफ यह रवैया अपनाया गया. इस मामले को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार से स्थिति स्पष्ट करने और शंकराचार्य के सम्मान एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है.

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