Strawberry Cultivation: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर (Ambikapur) जिले में उद्यानिकी विभाग (Horticulture Department) की प्रोत्साहन योजनाएं किसानों के लिए आमदनी के नए द्वार खोल रही हैं. किसान अब परंपरागत खेती की सीमाओं से बाहर निकलकर उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. धान (Dhan ki Kheti) पर निर्भरता कम कर लाभकारी उद्यानिकी फसलों को अपनाने वाले किसानों में भगवानपुरखुर्द निवासी किसान लाल बहादुर सिंह का नाम अग्रणी रूप से सामने आया है, जिन्होंने नवाचार के जरिए आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है. लाल बहादुर सिंह ने धान की खेती छोड़कर स्ट्रॉबेरी उत्पादन को अपनाया और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है.

Strawberry Cultivation: प्रगतिशील किसान लाल बहादुर सिंह
धान से हटकर किया साहसिक फैसला
लाल बहादुर सिंह बताते हैं कि वर्षों तक धान की खेती करने के बाद भी उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था. बढ़ती लागत और मौसम की अनिश्चितता ने मुनाफा और घटा दिया. इसी दौरान उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने उन्हें स्ट्रॉबेरी जैसी उच्च मूल्य वाली फसल की जानकारी दी. बेहतर बाजार कीमत और कम समय में अधिक आय की संभावना ने उन्हें खेती में बदलाव के लिए प्रेरित किया.
छोटे प्रयोग से बड़ी सफलता तक
लाल बहादुर सिंह ने शुरुआत महज 50 डिसमिल जमीन पर स्ट्रॉबेरी की खेती से की. पहले ही वर्ष अच्छे परिणाम मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा. अगले वर्ष उन्होंने खेती को एक एकड़ तक बढ़ाया और फिर तीसरे व चौथे वर्ष में यह रकबा ढाई एकड़ तक पहुंच गया. वर्तमान में वे ढाई एकड़ क्षेत्र में सफलतापूर्वक स्ट्रॉबेरी का उत्पादन कर रहे हैं.

Strawberry Cultivation: स्ट्रॉबेरी के खेत में किसान लाल बहादुर सिंह
कम लागत, कई गुना मुनाफा
किसान के अनुसार ढाई एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती पर करीब 2 लाख रुपये की लागत आती है, जिससे उन्हें लगभग 9 लाख रुपये की आमदनी होती है. सभी खर्चों के बाद उनका शुद्ध लाभ करीब 7 लाख रुपये तक पहुंच जाता है. वहीं यदि यही जमीन धान की खेती में लगाई जाए तो लगभग 90 क्विंटल उत्पादन होता है, जिससे कुल आमदनी करीब 3 लाख रुपये ही हो पाती है. लागत निकालने के बाद मुनाफा महज 2 लाख रुपये के आसपास रह जाता है.
सब्सिडी और तकनीकी सहयोग ने आसान किया सफर
लाल बहादुर सिंह बताते हैं कि उद्यानिकी विभाग की योजना के तहत पौध, बीज और खाद पर डीबीटी के माध्यम से सब्सिडी मिलती है. उन्हें करीब 80 से 85 हजार रुपये की सहायता राशि मिलने की संभावना है, जिससे लागत और भी कम हो गई है. विभागीय अधिकारी समय-समय पर खेत का निरीक्षण कर तकनीकी मार्गदर्शन देते हैं, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार हो रहा है.
बाकी किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत
अपनी सफलता से उत्साहित लाल बहादुर सिंह अब आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं. उनका कहना है कि यदि किसान पारंपरिक फसलों के साथ उद्यानिकी को अपनाएं, तो आमदनी कई गुना बढ़ाई जा सकती है. उन्होंने अन्य किसानों से भी शासन की योजनाओं का लाभ लेकर आधुनिक खेती की ओर बढ़ने की अपील की है.
शासन की योजनाओं से बदली तस्वीर
लाल बहादुर सिंह ने उद्यानिकी खेती को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ शासन और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार जताया. उनका कहना है कि सरकार की योजनाओं ने किसानों को नई दिशा दी है और आज प्रदेश का किसान आत्मनिर्भरता की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है.
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