Raipur 60th DGP IGP Conference: रायपुर में जारी 60वीं डीजीपी–आईजीपी कॉन्फ्रेंस का पहला दिन देश की सुरक्षा चुनौतियों पर गहन चर्चा के नाम रहा. विदेशी फंडिंग से लेकर घुसपैठियों पर नकेल कसने तक, कई अहम मुद्दों पर विस्तृत मंथन हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पहले दिन की चर्चा को महत्वपूर्ण बताते हुए एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यह मंच सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का बेहतरीन अवसर है.
प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखा कि सम्मेलन के पहले दिन भारत की सुरक्षा व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ. उन्होंने इसे सर्वोत्तम प्रथाओं और नवाचारों को साझा करने का मजबूत मंच बताया.
लगातार 12 घंटे तक चला सेशन
रायपुर IIM में सुबह 8 बजे शुरू हुई बैठक देर शाम तक लगातार चलती रही. अधिकारियों ने बताया कि आज का दिन पूरी तरह से तकनीकी और रणनीतिक सेशनों में बीता, जहां हर मुद्दे पर गहराई से चर्चा हुई. पहले सत्र में देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली विदेशी फंडिंग पर बात की गई. सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसे नेटवर्क पर नकेल कसने के लिए अपने इनपुट और प्लान साझा किए.
नक्सल मुद्दे पर राज्यों ने पेश की रिपोर्ट
नक्सल प्रभावित राज्यों के सभी DGP ने अपनी-अपनी स्थिति रखते हुए मैदान में चल रही कार्रवाई और चुनौतियों पर रिपोर्ट पेश की. नक्सल उन्मूलन को लेकर आगे की रणनीति पर भी बात हुई.
जियो-पॉलिटिकल हालात और काउंटर स्ट्रैटेजी पर तीसरा सेशन
तीसरे सत्र में बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल और भारत की सुरक्षा पर उसके प्रभाव पर चर्चा की गई. विदेशी दखल, साइबर खतरों और काउंटर रणनीतियों पर विशेषज्ञों ने अपने सुझाव दिए.
घुसपैठ और विदेशी फंडिंग—राज्यों की संयुक्त समीक्षा
अलग-अलग राज्यों के भीतर हो रही संदिग्ध विदेशी फंडिंग और घुसपैठियों की गतिविधियों पर भी संयुक्त रूप से चर्चा की गई. यह मुद्दा इस बार कॉन्फ्रेंस में सबसे प्रमुख विषयों में शामिल रहा.
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ED, RAW, IB सहित शीर्ष एजेंसियों की प्रेज़ेंटेशन
चौथे सत्र में ईडी, RAW, IB और अन्य इंटेलिजेंस एजेंसियों ने विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया. इनके इनपुट के आधार पर आने वाले दिनों की सुरक्षा रणनीति तय की जाएगी. ईडी के अधिकारियों ने भी अपने महत्वूर्ण बिंदुओं को सामने रखा.
कई मायनों में विशेष है पीएम मोदी का दौरा
प्रधानमंत्री मोदी हर साल होने वाले DGP–IGP सम्मेलन में हमेशा सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं. उनकी मौजूदगी से अधिकारियों को सीधे शीर्ष स्तर पर संवाद का अवसर मिलता है. यही वजह है कि इस बार छत्तीसगढ़ में हो रहा आयोजन और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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दो दिनों तक करेंगे अध्यक्षता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 और 30 नवंबर को कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता करेंगे. वे सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अधिकारियों से सीधे बातचीत करेंगे. यह पहली बार है जब पीएम लगातार तीन दिन तक छत्तीसगढ़ में रहेंगे.