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This Article is From Mar 27, 2025

निगम आयुक्त को तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए... हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती, प्रशासन और निगम को खूब लगाई फटकार 

CG News: बिलासपुर नगर के कार्यप्रणाली को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी की है. हाईकोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि निगम आयुक्त की लापरवाही इतनी गंभीर कि उन्हें तत्काल सस्पेंड किया जाना चाहिए.

निगम आयुक्त को तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए... हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती, प्रशासन और निगम को खूब लगाई फटकार 

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने नगर निगम और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. बुधवार को अतिक्रमण, साफ-सफाई, अव्यवस्थित फुटपाथ और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े मामलों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका की सुनवाई हुई. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायाधीश रविन्द्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने नगर निगम और प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि अतिक्रमण हटाने के लिए पहले से आदेश दिए जा चुके हैं, फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अधिकारी सिर्फ दिखावटी कार्रवाई करते हैं और जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है.

अतिक्रमण और फुटपाथों की बदहाल स्थिति पर नाराजगी

बिलासपुर नगर निगम और जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे शहर में हुए अतिक्रमणों को हटाने की कार्रवाई तेज करें. स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा बनाए गए फुटपाथों की बदहाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ये फुटपाथ इतने अव्यवस्थित हैं कि यहां दिव्यांग तो दूर, एक स्वस्थ व्यक्ति भी आसानी से नहीं चल सकता है.

अदालत ने कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को निर्देश दिया कि वे मौके पर जाकर निरीक्षण करें और रिपोर्ट पेश करें. मुख्य न्यायाधीश ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि निगम आयुक्त की लापरवाही इतनी गंभीर है कि उन्हें तत्काल सस्पेंड किया जाना चाहिए.

मंदिर में कछुओं की मौत पर चिंता

सुनवाई के दौरान बिलासपुर के रतनपुर महामाया मंदिर परिसर में कुंड में मछलियां पकड़ने के दौरान दो दर्जन कछुओं की मौत का मामला भी सामने आया. अदालत ने इस घटना को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन मानते हुए मंदिर ट्रस्ट और जिला प्रशासन की जवाबदेही तय करने की बात कही.

मुख्य न्यायाधीश ने सवाल किया कि मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन क्या कर रहे थे, जो इतनी बड़ी घटना हो गई. उन्होंने कहा कि अगर अधिकारी सिर्फ ऑफिस में बैठकर अखबार पढ़ते, तो भी उन्हें शहर की समस्याओं का अंदाजा हो जाता.

करोड़ों की बर्बादी पर सवाल

हाई कोर्ट ने जरहाभाठा ओमनगर क्षेत्र में सफाई व्यवस्था की खराब स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई। अदालत ने साफ-सफाई के नाम पर खर्च किए गए 4 करोड़ रुपये की खबर पर संज्ञान लिया और नगर निगम से पूछा कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद क्षेत्र में गंदगी क्यों बनी हुई है. कोर्ट ने इस संबंध में जनहित याचिका दर्ज कर ली है और जिला कलेक्टर व नगर निगम आयुक्त से व्यक्तिगत शपथपत्र पर जवाब मांगा है कि इन समस्याओं का समाधान कैसे किया जाएगा.

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9 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई

हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाएं और लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अदालत ने प्रशासन से अपेक्षा की है कि वे बिना किसी बहाने के शहर की सफाई,अतिक्रमण हटाने और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान करें. इस मामले में अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होगी. 

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