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This Article is From Dec 04, 2023

Madhya Pradesh Election Results : BJP की सुनामी, ग्वालियर-चंबल में आखिर क्यों जीत से चूक गए 8 सिंधिया समर्थक?

Madhya Pradesh Election Results : ग्वालियर-चंबल की 34 विधानसभा सीट में से जिन 13 सिंधिया समर्थकों को भाजपा का टिकट मिला, उनमें से प्रद्युम्न सिंह तोमर ग्वालियर, मोहन सिंह राठौड़ भितरवार, महेंद्र सिंह यादव कोलारस, जगन्नाथ सिंह रघुवंशी चंदेरी और बृजेन्द्र सिंह यादव मुंगावली से जीते. 

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Madhya Pradesh Election Results : BJP की सुनामी, ग्वालियर-चंबल में आखिर क्यों जीत से चूक गए 8 सिंधिया समर्थक?
ग्वालियर:

Madhya Pradesh Election Results 2023 : विधानसभा चुनावों के परिणामों ने सभी राजनीतिक विश्लेषकों और राजनेताओं को हिलाकर रख दिया है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) की इस सुनामी में बसपा (BSP), सपा (SP) और आप (AAP) जैसे पार्टियां तो बह ही गईं, वहीं कांग्रेस (Congress) के अनेक अभेद्य किले भी ढह गए, लेकिन इस प्रचंड महौल के बावजूद ग्वालियर-चंबल अंचल में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के समर्थक बम्पर जीत में शामिल नहीं हो सके. उनके दो समर्थक मंत्री और छह अन्य प्रत्याशी हार गए. अगर इनकी हार के कारणों को तलाशें तो हर सीट की अलग वजह निकल कर आ रही है. आज हम उन्हीें वजहों को जानेंगे. 

यह रही मंत्रियों की हार की वजह 

सिंधिया को सबसे बड़ा झटका उनके दो समर्थक मंत्रियों की करारी हार के कारण लगा. गुना की बमोरी सीट से कैबिनेट मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया और शिवपुरी की पोहरी से सुरेश धाकड़ राठखेड़ा को भारी अंतर से हार का मुंह देखना पड़ा. सबसे बड़ी बात ये है कि दोनों ही पार्टी के अंदरूनी सर्वे में हार रहे थे, क्योंकि सिसोदिया सदैव विवादित रहे और उनके भाजपा के मूल नेताओं से संबंध अच्छे नहीं हो पाए. दिग्विजय सिंह के खिलाफ उन्होंने मोर्चा संभाला तो राघोगढ़ ने भी उनके खिलाफ मोर्चा खोल लिया. इसी तरह राठखेड़ा मंत्री होते हुए क्षेत्र में लोगों के बीच अपनी कोई छाप नहीं छोड़ सके. बावजूद सिंधिया ने न केवल उन्हें टिकट दिलाया बल्कि बहुत जोर भी लगाया लेकिन सारे प्रयास बेकार गए. उन्हें कोई कामयाबी नहीं मिल सकी.

सिंधिया की रिश्तेदार भी हारीं

ग्वालियर पूर्व सीट से 2018 में सिंधिया समर्थक मुन्नालाल गोयल कांग्रेस से एमएलए चुने गए थे. 2020 में वे इस्तीफा देकर कांग्रेस छोड़कर सिंधिया के साथ बीजेपी में चले गए. भाजपा ने उप चुनाव में टिकट भी दिया लेकिन वे कांग्रेस के सतीश सिकरवार से हार गए. इसके बावजूद सरकार ने उन्हें बीज एवं फार्म विकास निगम का चेयरमैन बनाकर रखा और कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया. लेकिन 2023 में विधानसभा का टिकट काट दिया. इस बार भाजपा से सिंधिया की करीबी रिश्तेदार माया सिंह मैदान में थीं. 74 साल की माया सिंह अपने प्रतिद्वंद्वी युवा कांग्रेस के सतीश सिकरवार के सामने नहीं टिक सकीं. उन्हें 15 हजार 353 मतों के भारी अंतर से पराजय मिली. इसकी वजह थी, एक तो वे बुजुर्ग हैं और लंबे समय से अपने क्षेत्र व कार्यकर्ताओं से कटी हुई थीं. उन्हें कांग्रेस के एक ऊर्जावान नेता के सामने उतार दिया, जिसकी गरीब बस्तियों में घर-घर में एंट्री है. 

इमरती लगातार दूसरी बार हारीं

2013 और 2018 में रिकॉर्ड मतों से जीतने वाली सिंधिया समर्थक इमरती देवी भी फिर चुनाव हार गईं. जब सिंधिया ने कांग्रेस से बगावत की तब वे कमलनाथ सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री थीं. उन्होंने कांग्रेस और विधायक पद छोड़ा. 2020 में उप चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ा तो हार गयीं. सिंधिया ने उन्हें फिर टिकट दिलवाया, खूब मेहनत भी की, लेकिन इस बार भी वे कांग्रेस के सुरेश राजे से 2 हजार 267 मतों से हार गईं. इसकी वजह ये है कि डबरा क्षेत्र कांग्रेस की मानसिकता वाला क्षेत्र माना जाता है. यह बात इमरती देवी सार्वजनिक रूप से भी कह चुकी हैं. उधर भाजपा और उनके समर्थकों के बीच भी उनकी खाई गहरी रही. नरोत्तम मिश्रा वहीं के रहने वाले हैं, लेकिन उनके साथ भी उनका सदैव छत्तीस का आंकड़ा रहा.

इन सिंधिया समर्थकों को मिली जीत

ग्वालियर-चंबल की 34 विधानसभा सीट में से जिन 13 सिंधिया समर्थकों को भाजपा का टिकट मिला, उनमें से प्रद्युम्न सिंह तोमर ग्वालियर, मोहन सिंह राठौड़ भितरवार, महेंद्र सिंह यादव कोलारस, जगन्नाथ सिंह रघुवंशी चंदेरी और बृजेन्द्र सिंह यादव मुंगावली से जीते. 

इन्हें मिली हार

वहीं हारने वाले उम्मीदवारों को देखें तो इसमें रघुराज सिंह कंसाना मुरैना, कमलेश जाटव अंबाह, इमरती देवी डबरा, माया सिंह ग्वालियर पूर्व, सुरेश धाकड़ राठखेड़ा पोहरी, महेंद्र सिंह सिसोदिया बमोरी, जजपाल जज्जी अशोकनगर, हीरेन्द्र सिंह बना राघोगढ़ हैं.

यह भी पढ़ें :  Madhya Pradesh Election Results : मध्य प्रदेश के सभी सियासी अंचलों का हाल, जानिए BJP-कांग्रेस का नफा-नुकसान

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