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Madhya Pradesh Election Results : मध्य प्रदेश के सभी सियासी अंचलों का हाल, जानिए BJP-कांग्रेस का नफा-नुकसान

Madhya Pradesh Election Results : 2018 के परिणाम बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सबसे ज्यादा नुकसान ग्वालियर-चंबल और मालवा-निमाड़ में झेलना पड़ा था. वहीं इस बार पार्टी ने इन दोनों ही अंचल में दमदार वापसी करते हुए कुल सीटों पर वापसी की है. आइए मध्य प्रदेश के सभी सियासी अंचलों के आकंड़ों की पड़ताल आपको बताते हैं.

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Madhya Pradesh Election Results : मध्य प्रदेश के सभी सियासी अंचलों का हाल, जानिए BJP-कांग्रेस का नफा-नुकसान

Madhya Pradesh Election Results 2023 : मध्य प्रदेश की सियासत भी अजब-गजब रंग दिखाती है. पिछली बार के विधानसभा चुनाव (Madhya Pradesh Assembly Election 2018) में जहां कांग्रेस (Congress 114 सीट) और भारतीय जनता पार्टी (BJP 109 सीट) के बीच महज कुछ सीटों का ही अंतर था, वहीं इस बार के चुनाव में दोनों ही प्रमुख दलों बीच बड़ा अंतर देखने को मिला. इस बार 54 सीटों के फायदे के साथ जहां बीजेपी को 163 सीटों पर विजय मिली हैं वहीं 48 सीटों के नुकसान के साथ कांग्रेस 66 सीटों पर सिमट गई. मध्य प्रदेश के सियासी आंकड़ों की बात करें तो वो छह प्रमुख अंचलों से तय होते हैं. 2018 के परिणाम बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सबसे ज्यादा नुकसान ग्वालियर-चंबल और मालवा-निमाड़ में झेलना पड़ा था. वहीं इस बार पार्टी ने इन दोनों ही अंचल में दमदार वापसी करते हुए कई सीटों पर वापसी की है. आइए मध्य प्रदेश के सभी सियासी अंचलों के आकंड़ों की पड़ताल आपको बताते हैं.

पहले जानिए मध्य प्रदेश की सत्ता के 6 प्रमुख सियासी अंचल कौन से हैं?

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मध्यप्रदेश को अगर भौगोलिक रूप बांटते हुए देखा जाए तो प्रदेश से 6 प्रमुख अंचल निकलते हैं, जो इस प्रकार हैं. निमाड़-मालवा (66 सीट), ग्वालियर-चंबल (34 सीट), मध्य भारत (36 सीट), महाकौशल (38 सीट), विंध्य (30 सीट) और बुंदेलखंड (26 सीट). इन्हीं अंचलों की सभी सीटों को मिलाकर प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों का गणित बनता है. आज हम मध्य भारत, महाकौशल, विंध्य और बुंदेलखंड के इस बार के और पिछले परिणामों पर नजर दौड़ाएंगे.

BJP-कांग्रेस का फायदा-नुकसान, इस बार ऐसा रहा गणित

Madhya Pradesh Election Results 2023 सभी अंचलों में बीजेपी-कांग्रेस की स्थिति

Madhya Pradesh Election Results 2023 सभी अंचलों में बीजेपी-कांग्रेस की स्थिति

हालिया परिणाम बताते हैं कि इस बार 2023 में बीजेपी को सभी अंचलों में फायदा हुआ है, चाहे विंध्य में 1 सीट का हो या मालवा निमाड़ में 19 सीटों का, हर अंचल में भवगा लहर दिखी है. वहीं कांग्रेस को 1 से लेकर 17 सीटों तक नुकसान देखना पड़ा. ग्वालियर-चंबल में बीजेपी को 11 सीटों का फायदा कांग्रेस को 10 सीटों का घाटा हुआ. मालावा-निमाड़ में  बीजेपी को 19  सीटों का फायदा कांग्रेस को 17 सीटों का घाटा हुआ. मध्य भारत में बीजेपी को 7 सीटों का फायदा कांग्रेस को 7 सीटों का घाटा हुआ. महाकौशल में बीजेपी को 8 सीटों का फायदा कांग्रेस को 7 सीटों का घाटा हुआ. विंध्य में  बीजेपी को 1 सीट का फायदा कांग्रेस को 1 सीट का घाटा और बुंदेलखंड की बात करें तो  बीजेपी को 4 सीटों का फायदा तो कांग्रेस को 2 सीटों का घाटा हुआ.  

मालवा-निमाड़ (66 सीट)

मालवा-निमाड़ यानी उज्जैन-इंदौर संभाग की बात करें तो यहां से 66 सीटों का भाग्य तय होता है. पिछले बार के चुनाव में यहां पर कांग्रेस-बीजेपी (BJP-Congress) दोनों में ही टक्कर देखनी मिली थी, लेकिन बाजी कांग्रेस के पक्ष में गई थी. इस क्षेत्र में 22 सीटें एसटी उम्मीदवारों (ST Candidate) के लिए रिजर्व हैं. मालवा-निमाड़ BJP का प्रमुख गढ़ रहा है, लेकिन 2018 के चुनाव में यहां की 66 में से 35 सीटों पर कांग्रेस ने बाजी मारी थी. जबकि बीजेपी के खाते में 28 सीटें ही आ सकीं.

इस बार के चुनाव में यहां की 66 में से 48 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने बाजी मारी जबकि कांग्रेस को 17 सीट मिली और अन्य के खाते में एक सीट गई.

पिछले चुनाव की तुलना में इस बार सीटों की बढ़त और कटौती की बात करें तो यहां, बीजेपी को 19 सीटों पर फायदा हुआ जबकि कांग्रेस को 17 सीटों का घाटा हुआ है. 

ग्वालियर-चंबल (34 सीट)

ग्वालियर-चंबल अंचल ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के प्रभाव वाला क्षेत्र है. सिंधिया राजघराने का यहां दबदबा है. इलाके से 34 सीटों का भाग्य तय होता है. 2018 में ग्वालियर-चंबल संभाग में सर्वाधिक सीटें कांग्रेस को मिली थीं. ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ ग्वालियर-चंबल में कांग्रेस ने 2018 में जोरदार प्रदर्शन किया था. यहां के 8 जिलों की कुल 34 सीटों में 26 कांग्रेस के खाते में गई थीं, जबकि BJP को 7 और BSP को एक सीट मिली थी.

इस बार के चुनाव में यहां की 34 में से 18 सीटों पर बीजेपी ने कब्जा जमाया जबकि कांग्रेस 26 में से 16 सीटों पर आ गई.

मध्य भारत (36 सीट)

मध्य प्रदेश के मध्य में स्थित मध्य भारत अंचल में राजधानी भोपाल और नर्मदापुरम (पहले होशंगाबाद) संभाग आता है. इन दोनों संभाग के आठ जिलों (भोपाल, सीहोर, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, नर्मदापुरम, हरदा और बैतूल) में से 36 विधानसभा सदस्य चुने जाते हैं. 2018 में मध्य भारत की 36 में 24 सीटें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास गइ थीं, जबकि 12 सीटें कांग्रेस के हिस्से में रहीं.

इस बार के चुनाव में यहां की 36 में से 31 सीटों पर बीजेपी ने कब्जा जमाया जबकि कांग्रेस 12 में से 7 सीटों पर आ गई.

जिलेवार सीटों का गणित देखें तो इस क्षेत्र में भोपाल की 7 सीट (भोपाल उत्तर, भोपाल दक्षिण, भोपाल मध्य, गोविंदपुरा, हूजूर, बैरसिया, नरेला), सीहोर की 4 सीट (बुधनी, सीहोर, इच्छावर, आष्टा), राजगढ़ की 5 सीट (राजगढ़, ब्यावरा, नरसिंहगढ़, खिलचीपुर, सारंगपुर), रायसेन की 4 सीट (सांची, सिलवानी, उदयपुरा, भोजपुर), विदिशा की 5 सीट (विदिशा, शमशाबाद, कुरवाई, सिरोंज, बासोदा), नर्मदापुरम की 4 सीट (नर्मदापुरम, पिपरिया, सोहागपुर, सिवनी-मालवा) हरदा की 2 सीट (हरदा, टिमरनी) और बैतूल की 5 सीट (बैतूल, मुलताई, घोड़ाडोंगरी, भैंसदेही, आमला) आती है. वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का गृह जिला इसी क्षेत्र में आता है.


महाकौशल (38 सीट)

महाकौशल क्षेत्र की बात करें तो यहां से विधानसभा की 38 सीटें आती हैं. इस क्षेत्र में जबलपुर संभाग के आठ जिले (जबलपुर, छिंदवाड़ा, कटनी, सिवनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडोरी और बालाघाट) शामिल हैं. 2018 के चुनाव में इस क्षेत्र से भी भारतीय जनता पार्टी को नुकसान हुआ था. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का गृह जिला भी इसी क्षेत्र में आता है. 2018 में महाकौशल के आठ जिलों की कुल 38 विधानसभा सीटों में से 24 कांग्रेस के खाते में गई थीं, जबकि बीजेपी को सिर्फ 13 सीट पर संतोष करना पड़ा था.

इस बार के चुनाव में यहां की 38 में से 21 सीटों पर बीजेपी ने कब्जा जमाया जबकि कांग्रेस 27 में से 17 सीटों पर आ गई.

विंध्य (30 सीट) 

विंध्य क्षेत्र मध्य प्रदेश की सियासत में कितना मायने रखता है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस बार बीजेपी के विधायक नारायण त्रिपाठी अलग विंध्य प्रदेश की मांग को लेकर अपनी पार्टी ही बना डाली. इसे बघेलखंड के नाम से भी जाना जाता है. चुनावी आंकड़ों की बात करें तो विंध्य में 30 सीटें आती हैं. उत्तरप्रदेश से सटे हुए इस क्षेत्र में 9 जिले (रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, मैहर और मऊगंज) जिले आते हैं. 2018 के चुनाव में इस इलाके में कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था. विंध्य की जनता ने 30 में से सिर्फ 6 सीटें कांग्रेस को दी थीं, जबकि बीजेपी को 24 सीटों पर विजयी बनाया था.

इस बार के चुनाव में यहां की 30 में से 25 सीटों पर बीजेपी ने कब्जा जमाया जबकि कांग्रेस 6 में से 5 सीटों पर आ गई.

विभिन्न जिलों को मिलाकर विंध्य अंचल की 30 सीटें इस प्रकार बनती हैं. रीवा जिले में आठ सीट हैं (रीवा, सिरमौर, सेमरिया, त्योंथर, मऊगंज, देवतालाब, मनगवां, गुढ़),  सतना में 7 सीट (सतना, चित्रकुट, रैगांव, नागौद, मैहर, अमरपाटन, रामपुर-बघेलान) हैं. सीधी में 4 सीट (सीधी, चुरहट, सिंहावल, धौहनी) हैं. सिंगरौली में 3 सीट (सिंगरौली, चितरंगी, देवसर) हैं. शहडोल में 3 सीट (ब्योहरी, जयसिंहनगर, जैतपुर) हैं. अनूपपुर में 3 सीट (अनूपपुर, कोतमा, पुष्पराजगढ़) हैं. वहीं उमरिया में  2 सीट (बांधवगढ़, मानपुर) हैं.

बुंदेलखंड (26 सीट)

मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड में छह जिले आते हैं. इसमें सागर, दमोह, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और निवाड़ी शामिल हैं. यहां की 26 सीटों में से 6 अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं. बुंदेलखंड को प्रदेश का पिछड़ा इलाका माना जाता है. यहां कुपोषण का आंकड़ा ज्यादा है. पानी की कमी के कारण खेती का भी बुरा हाल है. बेरोजगारी के कारण पलायन भी यहां का बड़ा मुद्दा है. 2018 के चुनाव परिणाम के अनुसार यहां 26 में से 17 विधायक BJP के थे, 7 कांग्रेस के थे जबकि 2 अन्य पार्टियों के थे. 

इस बार के चुनाव में यहां की 26 में से 21 सीटों पर बीजेपी ने कब्जा जमाया जबकि कांग्रेस 7 में से 5 सीटों पर आ गई.

चुनावी परिणाम के आंकड़ों पर गौर करें तो इस बार मध्य प्रदेश में 48.5 फीसदी वोट शेयर के साथ बीजेपी 163 सीटों पर विजयी रही है जबकि 40.4 फीसदी वोट शेयर के साथ कांग्रेस को 66 सीटें मिली है.

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