क्या अब शादियाँ कुंडली देखकर नहीं, बल्कि कानून की किताबें पढ़कर होंगी? दिल्ली, मुंबई, इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहरों में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है. जहाँ पहले शादी से पहले पंडित जी के पास शुभ मुहूर्त और कुंडली मिलान के लिए जाया जाता था, वहीं अब युवा शादी से पहले वकीलों (Lawyers) के चक्कर काट रहे हैं. आखिर क्यों युवाओं को शादी में 'कानूनी जोखिम' नजर आ रहा है? दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा और गुजारा भत्ता (Maintenance) जैसे कानूनी मामलों के डर ने कैसे रिश्तों की बुनियाद बदल दी है?