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This Article is From Jan 13, 2026

'चाइनीज' मौत... बहता सुर्ख लाल खून और दम तोड़ती जिंदगी

उदित दीक्षित
  • विचार,
  • Updated:
    जनवरी 13, 2026 15:06 pm IST
    • Published On जनवरी 13, 2026 07:01 am IST
    • Last Updated On जनवरी 13, 2026 15:06 pm IST
'चाइनीज' मौत... बहता सुर्ख लाल खून और दम तोड़ती जिंदगी

'चाइनीज'... मौत की 'डोर' यानी एक विदेशी धागा भारत में मौत बांट रही हैं, हर साल कई लोगों का गला काट रही है, उन्हें घायल कर रही है. इस डोर का कहर जमीन पर ही आसमान में भी दिखाई दे रहा है. नीले गगन के नीचे पंख फैलाकर उड़ने वाले पक्षी भी इसका शिकार हो रहे हैं, कई मर रहे तो कई घायल होने के बाद तड़प-तड़पकर मर रहे हैं.

खबरें बनती हैं लोग पढ़ते हैं, लेकिन फिर हम रील की दुनिया में खोकर रियल लाइफ से दूर चले जाते हैं. लोगों के गले से बहता वो खून कोई याद नहीं रखता. अखबारों की हेडलाइन और खबरों की डिजिटल दुनिया फिर में नई खबरें होती हैं, सोशल मीडिया भी तभी भरता हैं जब चार बच्चों की मां प्रेमी के साथ भाग गई हो या फिर किसी कपल की ट्रेन में की गई 'बेवकूफी' भरी अश्लील हरकत को एक नासमझ वायरल कर देता है. लेकिन, लोगों के कटे गले और उससे बेहता सुर्ख लाल खून हम पर कोई असर नहीं डालता. तभी तो हम यह सवाल नहीं उठा पाता कि आखिर ये 'चाइनीज'... मौत की 'डोर' यानी चायनीज मांझा बाजार में क्यों बिक रहा है... 

वो मांझा जो सपनों की दौड़ में सर्दी, गर्मी या बरसात के बीच सड़क पर भाग रहे लोगों के गले काटकर उन्हें मार रहा है या फिर घायल कर रहा है. पुलिस, प्रशासन और सरकार क्या एक मौत का मांझा प्रतिबंध के बाद भी शहरों में  बिकना बंद नहीं करा पा रहे हैं? 

कई बार ऐसा देखा गया है कि किसी हादसे के बाद शहरों की पुलिस जागती है और छोटी दुकानों पर कार्रवाई करती है, जैसे ये बताना हो कि हमारी सख्ती जारी है. ज्यादा हो तो पुलिस किसी दिन शहर में कुछ बाइक सवारों को एंडी डोर प्रोटेक्टर बांट देती है. लेकिन, क्या यह इंतजाम जान बचाने के लिए काफी है. 

बुधवार, 14 जनवरी को मकर संक्रांति है, देश के तमाम शहरों में पतंगें उड़ेंगी, पता नहीं कितनों में चाइनीज मांझा होगा जो लोगों और पक्षियों को घायल करेगा. हो सकता हैं कई जगह से जान जानें जैसे दुखद खबरें भी आएं. मेरी आपत्ति मकर संक्रांति पर नहीं, चाइनीज मांझे पर है. आसमान में रंग-बिरंगे उड़नी चाहिए, लेकिन पुलिस, प्रशासन और सरकार यह तय करे कि उनमें 'चाइनीज'... मौत की 'डोर' नहीं है. यह दर्द मैं इसलिए भी समझ सकता हूं, क्योंकि इसका शिकार हो चुका हूं. किसी बाइक सवार के पास सिर्फ चंद सेकेंड होते हैं खुद को जिंदा या घायल होने से बचाने के लिए. अक्सर जान बच जाती है, लेकिन गला फिर भी कट जाता है.    

प्रतिबंध और हादसे... 

NGT (राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण) ने साल 2017 में चाइनीज मांझे प्रतिबंध दिया था. लेकिन आठ साल बाद 2026 में भी इसकी अवैध बिक्री देश के कई शहरों में हो रही है.  
         
दिल्ली पुलिस के एक रिकॉर्ड के अनुसार, चाइनीज मांझे से अगस्त 2019 से अगस्त 2022 तक आठ मौतें हुई. इसी तरह जुलाई 2023 में एक और जून 2025 में एक युवक की मौत हुई. इनमें एक साल साल का मासूम बच्चा भी शामिल था. 

महाराष्ट्र में मकर संक्रांति के दौरान जनवरी 2025 में नायलॉन मांझे से एक बच्चे समेत तीन की जान चली गई थी. इसी तरह, गुजरात में भी जनवरी 2025 में चार लोगों की मौत हुई थी. 

हैदराबाद के गच्चीबोवली और उप्पल में भी जनवरी में दो हादसे सामने आए हैं. 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर सूर्यतेजा के हाथ को चाइनीज मांझे ने बुरी तरह काट दिया. वहीं, उप्पल में एक और सॉफ्टवेयर इंजीनियर साई वर्धन रेड्डी का गला मांझे से कट गया. गनीमत रही कि उसकी जान बच गई. 

मध्य प्रदेश के इंदौर और उज्जैन दो बड़े शहरों में जनवरी महीने में ही तीन बड़े हादसे सामने आ चुके हैं. इंदौर में एक 45 साल के व्यक्ति की जान चली गई. वहीं, एक नीट का अभ्यर्थी गंभीर रूप से घायल हो गया. इस तरह उज्जैन में एक पुजारी का चाइनीज मांझे से गला गया था, दो घंटे की लंबी सर्जरी के बाद उनकी जान बचाई जा सकी थी. उज्जैन में छह हफ्तों में ऐसे आठ मामले सामने आए है. नवंबर महीने में भी इंदौर में एक 16 साल के बच्चे मी मौत हो गई थी. 

नोट: ये आंकड़े मीडिया रिपोर्टिंग पर आधारित हैं.

डिस्क्लेमर : इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं.

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