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This Article is From Sep 27, 2023

World Tourism Day 2023: सांची से पचमढ़ी तक...विश्‍व पर्यटन दिवस पर इन फेमस टूरिस्ट प्लेस जरूर जाएं घूमने

World Tourism Day 2023: हर साल 27 सितंबर को  विश्व पर्यटन दिवस (World Tourism Day 2023) मनाया जाता है. इस खास मौके पर मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उन जगहों के बारें मेc बताएंगे जहां आप एक बार जरूर घूमने जाएं.

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World Tourism Day 2023: सांची से पचमढ़ी तक...विश्‍व पर्यटन दिवस पर इन फेमस टूरिस्ट प्लेस जरूर जाएं घूमने

World Tourism Day 2023: विश्व पर्यटन दिवस (World Tourism Day 2023) हर साल 27 सितंबर को मनाया जाता है. ये दिन दुनिया के विभिन्न हिस्सों में पर्यटन को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करने के मनाया जाता है. आज हम इस खास मौके पर भारत का दिल कहे जानें वाले शहर मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बारें में बात करेंगे, जहां एक बार जरुर आप घूमने जाएं. दरअसल, यहां पर्यटकों को घूमने-फिरने के लिए कई फेमस जगह है. इनमें प्राकृतिक स्थल भी शामिल हैं तो पुराने किले और मंदिर भी, जो लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं. 

खजुराहो (Khajuraho)

खजुराहों (Khajuraho) मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. खजुराहो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के कारण पूरी दुनिया में पहचाना जाता है. मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड के खजुराहो में मौजूद मंदिरों का निर्माण 950-1050 ईस्वी के दौरान चंदेल वंश के राजाओं ने कराया था. वहीं इस मंदिर की भव्‍यता, सुंदरता और प्राचीनता के कारण साल 1986 में इसे विश्‍व धरोहर की सूची में शामिल किया गया है.

पचमढ़ी (Pachmarhi)

अपनी प्राकृतिक सुंदरता और प्रकृति के अद्भुत नजारों की वजह से प्रसिद्ध पचमढ़ी (Pachmarhi) हिल स्टेशन को 'सतपुड़ा की रानी' भी कहा जाता है. पचमढ़ी हिल स्टेशन मध्य प्रदेश राज्य के होशंगाबाद जिले में स्थित है और ये प्रदेश की राजधानी भोपाल (Bhopal) से 210 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यहां आपको कई पुरानी गुफाएं देखने को मिलेंगी. चारों तरफ से हरियाली भरे जंगल और पहाड़ों की ऊंचाई से गिरते झरने यहां की सुंदरता में चार चांद लगा देता है. बता दें कि ये हिल 1067 मीटर के ऊंचाई पर स्थित है.

ग्वालियर (Gwalior)

ग्वालियर (Gwalior) मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ऐतिहासिक शहरों में से एक है. इसका निर्माण राजा सूरजसेन ने किया था. इस ऐतिहासिक शहर की खूबसूरती, महल, आकर्षित कर देने वाले स्मारक और मंदिर की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है. यहां के मस्जिदों, रॉक मंदिरों और मूर्तियों की बनावट में शानदार वास्तुकला की झलक देखने को मिलती है. यहां आप जय विलास पैलेस, ग्वालियर फोर्ट, तेली का मंदिर, तानसेन का मकबरा, गूजरी महल, मोहम्मद गौस का मकबरा एक बार जरुर देखने जाएं. 

ओरछा (Orchha)

मध्य प्रदेश में स्थित ओरछा (Orchha) एक छोटा-सा कस्बा है, जिसे प्रदेश का शाही शहर भी कहा जाता है. एक समय था जब ओरछा शक्तिशाली बुंदेला राजपूतों की राजधानी हुआ करता था, लेकिन आज ये पर्यटकों के दिलों पर जादू करता है. बता दें कि ओरछा बहुत शांत और सुंदर जगह है और इतिहास से भरा पूरा हुआ है. ओरछा की खूबसूरती को महलों, मंदिरों और किलों के साथ कल-कल बहती वैतरणी नदी (बेतवा नदी) ने चार चांद लगा दिया है. 

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सांची (Sanchi) 

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के प्रमुख पर्यटन स्थलों में सांची (Sanchi) प्रमुख है जो रायसेन जिले में बेतवा नदी किनारे स्थित है. सांची मध्य प्रदेश में बौद्ध धर्म के दर्शनीय स्थलों में से एक है जो प्राचीन पत्थर की संरचना यानी सांची स्तूप के लिए प्रसिद्ध है. सांची स्तूप को संरचना और शिल्पकारिता के कारण साल 1989 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल सूची में शामिल किया था. बता दें कि बौद्ध धर्म के मानने वालों के लिए सांची स्तूप बेहद अहम है, क्योंकि यहां पर भगवान बुद्ध की अस्थियां दफनाई गईं थी. वहीं कलिंग युद्ध के बाद महान सम्राट और बौद्ध धर्म के अनुयायी सम्राट अशोक ने इसका इसका निर्माण कराया था. 

जबलपुर (Jabalpur)

जबलपुर मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटक जगहों में से एक है. ये अपने खूबसूरत नजारों, प्राचीन इतिहास और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए काफी मशहूर है. यहां की ऐतिहासिक जगह, नदियां और प्राकृतिक झरने पर्यटकों को काफी आकर्षित करती है. भेड़ाघाट मार्बल रॉक, जबलपुर का मदन महल किला, जबलपुर धुआंधर जलप्रपात, बैलेंसिंग रॉक, चौसठ योगिनी मंदिर सबका मन मोह लेता है. 

बता दें कि भेड़ाघाट मार्बल रॉक में जब सूरज की रोशनी सफेद और मटमैले रंग के संगमरमर चट्टान पर पड़ती है, तो नदी में बनने वाला इसका प्रतिबिंब अद्भुत होता है. भेड़ाघाट और यहां की संगमरमर की चट्टान की खूबसूरती उस समय चरम पर होती है,जब चांद की रोशनी चट्टान और नदी पर एक साथ पड़ती है. वहीं धुआंधार जलप्रपात को स्मोक कैस्केड के रूप में भी जाना जाता है. 98 फीट की ऊंचाई से गिरने वाली नर्मदा नदी के मनोरम दृश्यों के कारण इस स्थान को अपनी एक अलग पहचान मिली है. 

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