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This Article is From Feb 27, 2025

50% की Tax छूट इस बार भी! उज्जैन व्यापार मेला व विक्रमोत्सव का CM मोहन व केंद्रीय मंत्री ने किया शुभारंभ

Ujjain Vyapar Mela: विक्रमोत्सव-2025 की शुरुआत के साथ ही विक्रम व्यापार मेला उज्जैन भी प्रारंभ हो चुका है. यहां कई कंपनियों ने अपने स्टॉल लगाए हैं. जहां वाहनों पर आकर्षक छूट मिल रही है.

50% की Tax छूट इस बार भी! उज्जैन व्यापार मेला व विक्रमोत्सव का CM मोहन व केंद्रीय मंत्री ने किया शुभारंभ
Vikramotsav 2025, Ujjain Vyapar Mela: वाहन खरीदनों वालों के लिए CM ने दी खुशखबरीं
Ajay Kumar Patel

Vikramotsav 2025: मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन (Ujjian) में महाशिवरात्रि के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (CM Mohan Yadav) और केंद्रीय पर्यटन संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और जिम्बाब्वे के उप मंत्री एमके मोदी की मौजूदगी में उज्जैन के विक्रम व्यापार मेले (Vikram Vyapar Mela Ujjain) का शुभारंभ हुआl. इस दौरान सीएम मोहन यादव ने कहा कि यह व्यापार मेला उज्जैन (Ujjain Vyapar Meal) को व्यापार केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है. उज्जैन पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक नगरी के साथ व्यापार का भी बड़ा केंद्र बन गया है. उज्जैन विकास के नये आयाम स्थापित कर रहा है. बड़ी-बड़ी कंपनियां यहां आकर निवेश कर रही हैं.

उज्जैन नगरी का यह स्वर्णिम काल : केंद्रीय मंत्री शेखावत

केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि आज उज्जैन का विकास दिख रहा है. उज्जैन नगरी का यह स्वर्णिम काल दिख रहा है आने वाले सिंहस्थ-2028 के पहले उज्जैन वास्तव में अपने उसे वैभव को प्राप्त कर लेगा जो हमने इतिहास में पढ़ा है. उन्होंने उज्जैन के व्यापार मेले के नये आयाम स्थापित करने के लिये उज्जैन वासियों को शुभकामनाएं दी. केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की सोच और उनकी परिकल्पना से प्रदेश सभी क्षेत्रों मे प्रगति कर रहा है. दो दिनों तक आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट इसका उदाहरण है.

व्यापार मेले के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री डॉ यादव ने ग्राहकों को शुभकामनाएं देते हुए कार की चाबियाँ भी सौंपी. मेला परिसर में मुख्यमंत्री डॉ यादव और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा जिला पंचायत की ग्राम पंचायत को गीला-सूखा कचरा एकत्रित करने के लिए 10 कचरा वाहन की चाबी भी सौंपी गई.

50% की छूट इस बार भी : CM मोहन

उज्जैन विक्रम व्यापार मेले में 10 से अधिक कार कंपिनयों के द्वारा अपने स्टॉल यहां लगाए गए हैं. इसके साथ ही टू-व्हीलर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, कमर्शियल व्हीकल कंपनी के द्वारा भी अपने स्टॉल लगाए गए हैं. सीएम मोहन यादव ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 30 लाख करोड़ से अधिक का निवेश मध्यप्रदेश को प्राप्त हुआ है. उज्जैन जिले को इसका लाभ मिलेगा उज्जैन में भी अनेक कंपनियों के द्वारा निवेश के प्रस्ताव आए हुए हैं.

सम्राट विक्रमादित्य का व्यापार विस्तृत प्रकार का रहा होगा, यह मेला उज्जैन के उस काल को याद दिलाता है, जब उज्जैनी को स्वर्ण नगरी भी कहा जाता था.

डॉ मोहन यादव

मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश शासन


सीएम मोहन ने कहा कि मेले लोगों का जो उत्साह है वो अलग ही प्रतीत हो रहा है. पिछले साल पहले वर्ष में ही उज्जैन व्यापार मेले मे अनेक उपलब्धियां प्राप्त कर ली थी. इस वर्ष उज्जैन व्यापार मेले में उम्मीद से अधिक व्यापार होने का अनुमान है.

जिम्बाब्वे और मध्यप्रदेश एक-दूसरे से सीख कर आगे बढ़ेंगे : उप मंत्री

जिम्बाब्वे के उप मंत्री एमके मोदी ने कहा कि यहां आकर लग रहा है कि सरकार के द्वारा आम जनता के लिए बेहतर काम किया जा रहा है. मैं पहली बार देख रहा हूँ कि सरकार टैक्स में भी 50% की छूट देती है. उज्जैन वास्तव में व्यापार का केंद्र बने इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ यादव के प्रयास बहुत ही शानदार हैं. जिम्बाब्वे के लोगों को इसके फायदों से भी हम अवगत कराएंगेl आने वाले समय में जिम्बाब्वे और मध्यप्रदेश एक-दूसरे से सीख कर आगे बढ़ेंगे.

सिंहस्थ का प्लान

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि वर्ष-2028 में कुम्भ का आयोजन उज्जैन में होना है, हम वृहद स्तर पर सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में अभी से जुट गए हैं. सिंहस्थ-2028 की तैयारी में जुटी मध्यप्रदेश सरकार भी दुनिया को प्रयागराज की तरह ही भव्यता और दिव्यता का अनुभव दे पाएं, ये सुनिश्चित करने के लिए हमने टास्क फोर्स का गठन किया है. सिंहस्थ-2028 की कार्य योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. हमने संकल्प लिया है कि सिंहस्थ में श्रद्धालु माँ क्षिप्रा के जल से ही स्नान करें. बाबा महाकाल के आशीर्वाद से सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी और कान्ह क्लोज डक्ट परियोजनाओं से यह संकल्प पूरा होने जा रहा है. यह उज्जैन के इतिहास में अविस्मरणीय होगा.

सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना के अंतर्गत वर्षा ऋतु में क्षिप्रा नदी के जल को सिलारखेड़ी जलाशय में एकत्र किया जाएगा और फिर आवश्यकतानुसार इसे वापस क्षिप्रा नदी में प्रवाहित किया जाएगा. इससे क्षिप्रा नदी निरंतर प्रवाहित होगी. क्षिप्रा शुद्धिकरण का संकल्प पूरा करने के उद्देश्य से कान्ह क्लोज डक्ट परियोजना का कार्य चल रहा है. ये सभी परियोजनाएं क्षिप्रा नदी के जल प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. इनसे नदी के जल स्तर को बनाए रखने और उसे प्रदूषण से बचाने में मदद मिलेगी. इन प्रयासों से श्रद्धालु माँ क्षिप्रा में ही आस्था की डुबकी लगाएंगे.

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