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Movable Ramlila: 125 साल की हुई विदिशा की अनोखी रामलीला, विश्वयुद्ध-कोरोना में भी नहीं रुकी, चलते-फिरते होता है मंचन

Unique Moveable Ramlila: आज से 125 साल पहले शुरू हुई विदिशा की अनोखी रामलीला का पहला मंचन साल 1901 में हुआ था. इस ऐतिहासिक रामलीला में भगवान हनुमान का किरदार आज भी छह साल का बच्चा निभाता है और राम और सीता की भूमिका क्लास 9वीं और 12वीं की छात्र निभाते हैं.

Movable Ramlila: 125 साल की हुई विदिशा की अनोखी रामलीला, विश्वयुद्ध-कोरोना में भी नहीं रुकी, चलते-फिरते होता है मंचन
VIDISHA'SUNIQUE MOVABLE RAMLILA CELEBRATING125TH ANNIVERSARY

Vidisha Ramlila: विदिशा की ऐतिहासिक रामलीला आज अपने 125वें साल में प्रवेश कर गई. विश्वयुद्ध और कोरोना महामारी के दौरान भी अनवरत चलती आई विदिशी की अनोखी रामलीला अपने अनोखे अंदाज के लिए प्रसिद्ध है. भगवान श्री राम की लीलाओं का मंचन आमतौर पर मंच पर होता है, लेकिन यह एकलौता है, जो चलते-फिरते मंचित होता है. 

आज से 125 साल पहले शुरू हुई विदिशा की अनोखी रामलीला का पहला मंचन साल 1901 में हुआ था. इस ऐतिहासिक रामलीला में भगवान हनुमान का किरदार आज भी छह साल का बच्चा निभाता है और राम और सीता की भूमिका क्लास 9वीं और 12वीं की छात्र निभाते हैं.

विदिशा जिले के मेला ग्राउंड में मंचित होने वाली अनोखी चलति रामलीला परंपरा पिछले 125 साल से अनवरत चली आ रही है. विदिशा के मेला ग्राउंड में मंचित होने वाली रामलीला को कलाकारों द्वारा चलते-फिरते मेला ग्राउंड में बीच भीड़ के बीच खेला जाता है.

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कलाकारों को दो घंटे पहले ही भेषभूषा में ढाला जाता है

रिपोर्ट के मुताबिक विदिशा जिले के ऐतिहासिक चलित रामलीला शुरू होने करीब दो घंटे पहले ही कलाकारों को भेषभूषा में ढाला जाता है. रामलीला में हिस्सा ले रहे कलाकारों के किरदारों का मेकअप कर लिया जाता है. रामलीला में मां सरस्वती का किरदार करने वाली बच्ची 8 साल की इतासी शर्मा स्कूल से छुट्टी लेकर भूमिका निभाती हैं. 

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चलित रामलीला में निःशुल्क सेवा देते हैं सभी कलाकार

पिछले 36 सालों से नारद मुनि का किरदार निभा रहे सुधांशु मिश्रा कहते हैं कि वो बिना गैप एक ही किरदार को निभाते आ रहे हैं. उन्होंने बताया कि चलित रामलीला में हिस्सा लेने वाले सभी कलाकार निःशुल्क सेवा देते हैं. रामलीला में हनुमान का किरदार निभाने वाले बच्चे को बचपन से रामभक्ति सिखाई जाती है. 

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विदिशा की अनोखी रामलीला पहली ऐसी रामलीला है, जो स्थिर नहीं,  बल्कि चलते-फिरते मंचित किया जाता है. चलते-फिरते मंचित होने वाले रामलीला में हर कदम पर कलाकार रामायण को जीवंत करते हुए चलते है, जिसे देखने के लिए दूर-दराज के गांवों से लोग विदिशा पहुंचते है.

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125 सालों में एक बार भी नही ंथमा है चलित रामलीला

इतिहास गवाह है कि पिछले 125 सालों से चली आ रही विदिशा की चलित रामलीला पिछले 125 सालों के अपने इतिहास में एक बार भी नही ंथमी. उसका सफर तब चलता रहा जब विश्व युद्ध हुआ और तब भी नहीं थमा जब कोरोना काल में लोग घरों में दुबकने को मजबूर हो गए थे. 

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फ्लैश लाइट तक जारी है मशालों से शुरू हुई रामलीला

मशालों से शुरू हुई विदिशा की अनोखी रामलीला आज मोबाइल की फ्लैश लाइट तक पहुंच चुकी है, लेकिन चलित रामलीला आज भी प्रासंगिक बनी हुई है. 125 साल पुरानी श्रद्धा और संस्कारों से मंचित रामलीला आज भी 125 साल पहले मंचित हुए रामलीला की तरह अलहदा हैं, जिसे देखा नहीं सिर्फ महसूस किया जा सकता है.

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