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UGC New Rules 2026 Protest: MP में UGC के नए नियमों का विरोध, सवर्ण समाज में भारी आक्रोश, मंत्री तुलसी सिलावट का काफिला रोका

UGC New Rules 2026 Protest: मध्य प्रदेश के विदिशा में प्रदेश सरकार के मंत्री तुलसी सिलावट के काफिले को करणी सेवा ने रोक दिया और जमकर अपना विरोध जताया. वहीं गुना शहर में भी सवर्ण समाज का भारी आक्रोश देखने को मिला.

UGC New Rules 2026 Protest: MP में UGC के नए नियमों का विरोध, सवर्ण समाज में भारी आक्रोश, मंत्री तुलसी सिलावट का काफिला रोका

UGC Rule Protest in Madhya Pradesh : मध्य प्रदेश समेत देशभर में जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स और सवर्ण जाति के लोगों का यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर विरोध तेज है. इस बीच मध्य प्रदेश के विदिशा में प्रदेश सरकार के मंत्री तुलसी सिलावट के काफिले को करणी सेवा ने रोक दिया और जमकर अपना विरोध जताया. वहीं गुना शहर में भी सवर्ण समाज का भारी आक्रोश देखने को मिला.

राष्ट्रीय राजपूत करणी सेवा ने मंत्री तुलसी सिलावट का काफिला रोका

विदिशा में प्रदेश सरकार के मंत्री तुलसी सिलावट के काफिले को रोककर करणी सेवा ने अपना विरोध दर्ज कराया. वहीं बाद में कलेक्ट्रेट तक रैली निकालकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया. प्रदेश सरकार के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट भोपाल से कुरवाई कोटा बैराज के निरीक्षण के लिए जा रहे थे. इसी दौरान विदिशा के विवेकानंद चौराहे पर राष्ट्रीय राजपूत करणी सेवा के कार्यकर्ताओं ने यूजीसी कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया. कार्यकर्ताओं ने मंत्री के समक्ष इस कानून को स्वर्ण समाज के खिलाफ एकतरफा बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की.

राष्ट्रीय राजपूत करणी सेवा अतुल तिवारी ने कहा कि यह कानून स्वर्ण समाज के हितों के खिलाफ है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए. हालांकि मंत्री तुलसी सिलावट ने प्रतिनिधिमंडल की बात सुनी और उचित मंच पर विषय रखने का आश्वासन दिया.

कलेक्ट्रेट तक निकाली रैली

इसके अलावा करणी सेना, राजपूत समाज और स्वर्ण समाज के कार्यकर्ताओं ने UGC के नए नियमों के विरोध में कलेक्ट्रेट तक रैली निकाली. बता दें कि कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा. कार्यकर्ताओं का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा यूजीसी कानून लाया गया, जो सामान्य वर्ग, ओबीसी और एससी-एसटी वर्ग के बीच मतभेद बढ़ाने वाला है और समाज को आपस में लड़वाने का प्रयास है.

उग्र आंदोलन की दी चेतावनी

प्रदर्शनकारी बविता सिंह ने बताया कि इस कानून से स्वर्ण समाज के बच्चों का भविष्य प्रभावित होगा, हम इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेंगे. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि यूजीसी कानून वापस नहीं लिया गया तो देशभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा.

गोविंद राजपूत ने बताया कि सरकार ने अगर समय रहते फैसला नहीं लिया, तो आंदोलन पूरे देश में फैलाया जाएगा. 

सवर्ण समाज का भारी आक्रोश

इधर, गुना शहर में भी सवर्ण समाज का भारी आक्रोश देखने को मिला. सवर्ण आर्मी के नेतृत्व में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने एकजुट होकर यूजीसी के इन प्रावधानों को भेदभावपूर्ण बताते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया. आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सवर्ण छात्रों को अपराधी की तरह प्रस्तुत करने वाले इन नियमों को वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन संसद तक जाएगा.

यूजीसी का पुतला दहन किया

दरअसल, बुधवार दोपहर बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के युवा और पदाधिकारी हनुमान चौराहे पर एकत्रित हुए. यहां प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के नए कानूनों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. साथ ही यूजीसी का पुतला दहन किया.

इस दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर यूजीसी 2026 के नियमों को काला कानून और समानता विरोधी बताते हुए स्लोगन लिखे थे. पुतला दहन के बाद आक्रोशित जनसमूह एक विशाल रैली के रूप में कलेक्ट्रेट कार्यालय की ओर रवाना हुआ. कलेक्टरेट में प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया.

जिला प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

वहीं सवर्ण आर्मी के जिला अध्यक्ष विक्रम सिंह तोमर के नेतृत्व में राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा गया. ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि यूजीसी के नए नियम अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के विपरीत हैं और शैक्षणिक संस्थानों में सवर्ण समाज के छात्रों को संदेह की दृष्टि से देखने का वातावरण निर्मित कर रहे हैं.

UGC नए कानून में संशोधन की मांग

सवर्ण आर्मी ने अपने ज्ञापन में सरकार के समक्ष तीन अनिवार्य संशोधन रखने की मांग की, जिसमें  झूठी शिकायतों पर दंड की मांग की. सवर्ण आर्मी के अनुसार, यदि कोई छात्र दुर्भावनापूर्ण तरीके से सवर्ण छात्र के खिलाफ झूठी शिकायत करता है, तो शिकायतकर्ता पर भी समान दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान हो. वहीं समितियों में संतुलित प्रतिनिधित्व हो. कॉलेजों की शिकायत निवारण समितियों में कम से कम दो सदस्य सवर्ण समाज से अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएं, ताकि निर्णय निष्पक्ष हों.

समाज को बांटने की साजिश

वहीं सवर्णों को विधिक संरक्षण मिले. सवर्ण आर्मी के अनुसार जिस प्रकार अन्य वर्गों को संरक्षण प्राप्त है, उसी प्रकार सवर्ण छात्रों के साथ होने वाले जातिगत अपमान या भेदभाव को भी कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाए.  इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को राजनीति का अखाड़ा बनाना और व्यक्तिगत विवादों को जातिगत रंग देना समाज को बांटने की साजिश है.

सवर्ण आर्मी के जिला अध्यक्ष विक्रम सिंह तोमर ने कहा, 'हम कानून के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसी एक वर्ग को संरक्षित करने के नाम पर दूसरे वर्ग को जन्मजात अपराधी मान लेना न्यायोचित नहीं है. यदि इन संशोधनों पर विचार नहीं किया गया, तो हम उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे. प्रदर्शन के दौरान सवर्ण समाज के कई गणमान्य नागरिक, छात्र और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे.

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