Twisha Sharma Bhoipal MP: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा मौत मामला अब एक नए कानूनी और मेडिकल विवाद में फंस गया है. कड़े सुरक्षा घेरे और एसआईटी (SIT) की जांच के बीच, भोपाल पुलिस की एक ऐसी बड़ी लापरवाही उजागर हुई है जिसने कानून के जानकारों और मृतका के परिजनों को हैरान कर दिया है. पता चला है कि जिस पट्टे (फंदे) से ट्विशा की मौत हुई थी, उसके निरीक्षण और मिलान के बिना ही डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी.
क्या है 'लिगेचर मटेरियल' की वो बड़ी गलती?
फॉरेंसिक साइंस और कानून के नियमों के मुताबिक, जब भी कोई संदिग्ध फांसी का मामला सामने आता है, तो पुलिस को शव के साथ वह 'लिगेचर मटेरियल' (यानी वह फंदा, रस्सी या पट्टा जिससे फांसी लगाई गई हो) भी अस्पताल को सौंपना अनिवार्य होता है. इस लिगेचर मटेरियल का सबसे मुख्य काम यह होता है कि डॉक्टर इसके साइज, चौड़ाई और टेक्सचर का मिलान मृतका के गले पर बने फांसी के निशान से करते हैं. इससे यह साबित होता है कि मौत वाकई उसी फंदे से हुई है या फिर गला दबाकर हत्या करने के बाद शव को फंदे पर लटकाया गया है. लेकिन भोपाल पुलिस ने ट्विशा के पोस्टमार्टम के समय डॉक्टरों को यह लिगेचर मटेरियल दिया ही नहीं, और बिना इसके ही पीएम रिपोर्ट तैयार हो गई.
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अब दोबारा होगा निशानों का मिलान
भोपाल पुलिस सूत्रों के अनुसार इस गंभीर चूक के सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है. चौतरफा दबाव के बीच, भोपाल पुलिस ने रविवार लिगेचर मटेरियल (पट्टा) भोपाल एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों को सौंप दिया है. अब फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स इस पट्टे की चौड़ाई और बुनावट का मिलान ट्विशा के गले पर मिले निशानों से दोबारा करेंगे. संभावना जताई जा रही है कि कल तक इसकी विस्तृत रिपोर्ट आ जाएगी, जिससे मौत की गुत्थी सुलझाने में मदद मिलेगी.
पुलिस की दलील: बिना फंदे के भी आ सकती है रिपोर्ट
हालांकि, इस मामले में घिरती नजर आ रही भोपाल पुलिस ने अपना बचाव करते हुए दलील दी है कि लिगेचर मटेरियल के बिना भी मौत के प्राथमिक कारणों (जैसे दम घुटना या फांसी) को लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट दी जा सकती है. लेकिन पुलिस ने यह भी माना कि केस को अदालत में मजबूत करने और किसी भी संशय को दूर करने के लिए फंदे का गले के निशानों से मिलान करना बेहद जरूरी प्रक्रिया है.
एम्स की मर्चुरी में ही रखा है शव, बढ़ सकता है विवाद
12 मई 2026 को भोपाल में ससुराल में ट्विशा शर्मा का शव फांसी के फंदे से लटका मिला था. इसके बाद से शव भोपाल एम्स की मर्चुरी में रखा हुआ है और वह डीकंपोज (गलने) लगा है. मृतका के पिता नवनिधि शर्मा पहले ही आरोप लगा चुके हैं कि ट्विशा की सास रिटायर्ड जज हैं और पति समर्थ सिंह वकील हैं, इसलिए उनके रसूख के कारण जांच को भटकाया जा रहा है. अब पोस्टमार्टम जैसी बेहद संवेदनशील प्रक्रिया में पुलिस की इस "लापरवाही" या "जल्दबाजी" ने परिजनों के उस शक को और मजबूत कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर सबूतों के साथ ढिलाई बरती जा रही है.
इस नई लापरवाही के सामने आने के बाद ट्विशा के परिवार की उस मांग को और बल मिल गया है, जिसमें उन्होंने दिल्ली एम्स में दोबारा पोस्टमार्टम कराने और इस पूरे मामले की कानूनी सुनवाई मध्य प्रदेश से बाहर किसी अन्य राज्य में ट्रांसफर करने की गुहार मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से लगाई है. बता दें कि ट्विशा शर्मा मूल रूप से यूपी के नोएडा की रहने वाली थी. शादी डॉट कॉम के जरिए ट्विशा शर्मा और भोपाल के वकील समर्थ सिंह ने दिसबर 2025 में शादी की थी.
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