
Wild Fruit Benefits: वन संपदा के लिए मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) पूरे भारत में जाना और माना जाता है. यहां जंगली जानवर या जंगली फूल-फल की संख्या बहुत अच्छी है. ऐसा ही एक फल तेंदू (Tendu Fruits) का होता है. एमपी और छत्तीसगढ़ में खास रूप से मिलने वाला ये फल सेहत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. बालाघाट (Balaghat) जिले का करीब 53% भाग वनों से ढका हुआ है. तेंदू का फल बालाघाट में काफी प्रचलित है. यह दुर्लभ फल खासतौर से मार्च और अप्रैल में ही मिलता है. साथ ही, छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ (Manedragarh) क्षेत्र में भी घने जंगलों में प्राकृतिक रूप से ये फल मिलता है.

बालाघाट में तेंदू की बहुत है डिमांड
तेंदू का फल है काफी लोकप्रिय
बालाघाट के बाजारों में इन फलों को ग्रामीण अंचलों के लोग जंगलों से तोड़ कर लाते हैं. इसके बाद ये व्यापारी शहरों में दुकान लगाकर बेचते हैं. ऐसे में आते-जाते लोगों का ध्यान पड़ते ही दुकान में आ जाते हैं और इसकी खरीदारी करते हैं. ये फल मार्केट में करीब 200 रुपये किलो के हिसाब से बिक रहे हैं. फल के खरीदारों ने बताया कि इन फलों को देखकर बचपन की याद आ गई. बचपन में ये फल काफी देखें जाते थे. अब ये फल अचानक ही दिखने से उत्साहित हो गए. इसका स्वाद भी काफी मीठा है.
आयुर्वेदिक दृष्टि से तेंदू का महत्व
आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीआर नायक ने बताया कि तेंदू फल औषधीय गुणों से भरपूर होता है. उन्होंने बताया कि दुनिया की सभी चीजें पांच भौतिक तत्वों से बनी हैं और जितने भी पेड़-पौधे हैं, वे कहीं न कहीं औषधि के रूप में उपयोग किए जाते हैं. तेंदू फल का भी विभिन्न रोगों में उपयोग किया जाता है. यह त्वचा रोगों को ठीक करने और शरीर की दुर्बलता दूर करने में सहायक है.
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तेंदू फल से ग्रामीणों को मिला नया रोजगार
तेंदू फल की बढ़ती मांग से आदिवासी और ग्रामीण समुदायों को आर्थिक मजबूती मिली है. पहले यह फल जंगलों में बेकार गिर जाता था, वहीं अब यह स्थानीय लोगों की आय का स्रोत बन गया है. इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधर रही है, बल्कि पारंपरिक वन उत्पादों की ओर भी लोगों का रुझान बढ़ रहा है. तेंदू फल न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण साधन भी बन चुका है.
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