Success Story Paridhi Soni: एक दिन में सब कुछ नहीं होता... लेकिन प्रयास जारी रहे तो एक दिन वो सब मिल जाता है जो आप पाना चाहते हैं. फिर चाहें इस बीच कितनी भी परेशानियां क्यों न आए. MPPSC की असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में 38वीं रैंक पाने वाली भोपाल की परिधि सोनी की कहानी भी दुख, दर्द, जिम्मेदारियों से घिरी रही. समझदार होने से पहले उनके पिता का निधन हो गया. घर में बीमार मां और तीन छोटी बहनों की जिम्मेदारी परिधि पर ही थी, साथ ही वो सपने जो खुद परिधि और उनके पिता ने देखे थे. इसके बाद मां भी परिवार का साथ छोड़कर चली गईं. लेकिन, परिधि ने हार नहीं मानी, उन्होंने खुद को और अपनी बहनों को समझाया- एक दिन सब ठीक हो जाएगा और फिर हुआ भी ऐसा ही. आइए, अब सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं MPPSC Assistant Professor Exam में झंडे गाड़ने वाली परिधि सोनी की कहानी...

परिधि सोनी के माता-पिता.
मां बीमार, घर का माहौल नहीं रहा सामान्य
मूल रूप से मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में जन्मी परिधि सोनी के पिता डॉ. मुन्नालाल सोनी भोपाल के शासकीय हमीदिया महाविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे. ऐसे में जन्म के बाद परिधि भी भोपाल में आकर रहने लगी थीं. उनके साथ उनकी मां रजनी सोनी और तीन छोटी बहने पल्लवी सोनी, पूर्वी सोनी और प्रांजल सोनी भी रहती थीं. मां रजनी स्किज़ोफ्रेनिया (Schizophrenia) की मरीज थीं, इस कारण वे कभी पूरी तरह सामान्य नही रहीं. अक्सर वे चिड़चिड़ी रहती, बिना किसी कारण के भी बच्चों पर चिल्ला देती. मां की बीमारी के कारण घर का माहौल पूरी तरह सामान्य नहीं थी. डॉ. मुन्नालाल सोनी को पिता के साथ-साथ एक मां के फर्ज भी निभाने होते थे. वे ही बेटियों को स्कूल के लिए तैयार करते, टिफिन बनाते और घर के अधिकतर काम निपटाने के बाद कॉलेज जाते थे.

पिता डॉ. मुन्नालाल सोनी के साथ तीनों बेटियां.
पिता के निधन ने बेटी परिधि को दिया झटका
परिधि सोनी की स्कूली शिक्षा भोपाल के सेंट मैरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल (St. Mary's Sr. Sec. School) से हुई. परिधि पढ़ने में बचपन से ही तेज थी. 12वीं के बाद उन्हें मध्य प्रदेश के नंबर-1 कॉलेज इंस्टीट्यूट फॉर एक्सीलेंस इन हायर एजुकेशन भोपाल में दाखिला मिल गया. जहां से उन्होंने B.Com किया. सब कुछ अच्छा चल रहा था, फाइनल ईयर की परीक्षा भी खत्म हो गई थी. लेकिन, एग्जाम के दो दिन बाद 17 मई 2016 को परिधि को एक बड़ा झटका लगा. उनके पिता डॉ. मुन्नालाल सोनी का अचानक निधन हो गया. इस समय परिधि सोनी 19 साल की थीं, उनकी तीन बहनें पल्लवी 17, पूर्वी 14 और प्रांजल 11 साल की थी. इसके अलावा घर में एक बीमार मां और 98 साल की दादी भी थीं. मां के बीमार होने के कारण बहनों और परिवार की जिम्मेदारी परिधि पर ही आ गई थी.
घर की जिम्मेदारी और अनुकंपा नियुक्ति
NDTV से बात करते हुए परिधि सोनी बताती हैं कि अचानक पिता के जाने के बाद उनके दोस्तों ने परिवार का भरपूर साथ दिया. उस कठिन समय में हमीदिया कॉलेज का पूरा स्टॉफ हमारे साथ खड़ा था. पिता के अंतिम संस्कार से लेकर तेरहवीं तक का कार्यक्रम सभी ने मिलकर संपन्न कराया, घर में किसी चीज की कमी नहीं होने दी. उस समय मैं सिर्फ 19 साल की थी, ज्यादा समझदार नहीं लेकिन, घर की बड़ी बेटी होने के नाते सब कुछ मुझे ही संभालना था. इस बीच अगर, कुछ अच्छा था तो वह यह कि पिताजी के करीबियों का साथ लगातार मिल रहा था. कुछ दिन बाद पापा के दोस्तों ने बताया कि परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) मिल सकती है. सभी ने तय कि यह जिम्मेदारी मुझे ही निभानी चाहिए, ताकि बीमार मां, बुजुर्ग दादी और छोटी बहनों की अच्छे से देखभाल हो सके. इसके बाद 3 सितंबर 2016 को मैंने लिपिकीय पद (Clerical Post) पर कार्यभार ग्रहण कर लिया.

मां के पास परिधि और तीनों बहनें.
नौकरी के साथ-साथ जारी रखी पढ़ाई, यूनिवर्सिटी टॉपर बनी
परिधि बताती हैं कि उन्होंने नौकरी जरूर ज्वाइन कर ली थी, लेकिन पिता जी एक सपना पूरा करने के लिए पढ़ाई कभी नहीं रोकी. घर की जिम्मेदारियों और नौकरी के साथ-साथ उन्होंने प्राइवेट मोड में अपनी पढ़ाई जारी रखी. वर्ष 2016–18 के बीच एम.कॉम (M.Com) किया, इसी दौरान 2016–17 में पीजीडीसीए (PGDCA ) किया, जिसमें विश्वविद्यालय स्तर पर टॉप किया. सीपीसीटी (CPCT) टाइपिंग परीक्षा भी पास की. दिसंबर 2018 में एम.कॉम के फाइनल सेमेस्टर के साथ यूजीसी नेट (UGC NET– Commerce) की परीक्षा दी. जिसमें परिधि ने केवल तीन महीने की मेहन से 99.6 फीसदी के साथ टॉप किया. इसके बाद एमपी सेट 2019 (MP SET) की परीक्षा भी 99 प्रतिशत अंकों के साथ पास की. परिधि यहीं नहीं रुकी, 2018–20 में उन्होंने एमए अर्थशास्त्र (M.A. Economics) किया. इसके बाद 2020 में भोपाल बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय (Barkatullah University) में पीएचडी (Ph.D.) के लिए नामांकन लिया. पीएचडी के Coursework Exam में भी परिधि ने 95% अंकों के साथ यूनिवर्सिटी में टॉप किया.

पति और बेटी के साथ परिधि सोनी.
MPPSC 2020 में असफलता, वकील ईशान से लव-अरैंज मैरिज
साल 2020 आते-आते परिधि ने सिविल सेवा का रुख किया. उन्होंने एमपीपीएससी परीक्षा 2020 (MPPSC 2020) की तैयारी में जी जान लगा दी. परीक्षा परिणाम में इसका असर में भी दिखा. परिधि ने पहले ही प्रयास में प्रीलिम्स (MPPSC Prelims) क्वालिफाई किया. मेंस (MPPSC Mains) की परीक्षा दी, लेकिन इंटरव्यू (Interview) के लिए चयन नहीं हो पाया. यह परिधि के लिए पहली असफलता थी. इसी बीच परिधि ने शादी करने का फैसला किया. वे जिसके साथ जीवन बिताने जा रहीं थी उनका नाम ईशान उपाध्याय था, ईशान पेशे से वकील (Advocate) थे. जो एक दूसरे को कॉलेज के समय से जानते थे. परिधि बताती हैं कि ईशान जीवन के हर अच्छे और बुरे दौर में मेरे साथ खड़े थे, वे मुझे और मैं उन्हें अच्छे से समझती थी. ऐसे में हमने एक दूसरे का साथ चुना और 12 मई 2022 को शादी कर ली.
MPPSC Mains का एग्जाम नहीं दिया, मां का निधन
विवाह के बंधन में बंधने के बाद भी परिधि ने MPPSC की तैयारी जारी रखी. उन्होंने MPPSC 2022 की परीक्षा दी और Prelims क्वालिफाई किया. इसके बाद परिधि मेंस की तैयारी में जुट गईं. लेकिन, तभी कहानी में एक और मोड़ यह आया कि MPPSC Assistant Professor की परीक्षा की तारीख आ गई. यह वो परीक्षा थी जिसका सपना परिधि के पापा ने अपनी बेटी के लिए देखा था. काफी सोच-विचार के बाद परिधि ने MPPSC Mains को ड्रॉप किया और पूरी तरह Assistant Professor Exam की तैयारी में जुट गई. लेकिन, अभी कुछ और भी होना बाकी था. फरवरी 2023 में परिधि की मां रजनी सोनी का हार्ट अटैक से निधन हो गया. यह परिधि के लिए बहुत बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और अपनी तीन छोटी बहनों को सहारा देते हुए अपनी मेहनत जारी रखी.

एग्जाम से पांच दिन पहले ऑपरेशन से दिया बेटी को जन्म
इस समय परिधि गर्भवती थी, उनका प्रेग्नेंसी पीरियड (Pregnancy Period) चल रहा था. एमपीपीएससी सहायक प्रोफेसर परीक्षा (Assistant Professor Exam) जनवरी में होनी थी, लेकिन वह पोस्टपोन (Postponed) हो गई, फिर मार्च में तारीख आई, लेकिन परीक्षा एक बार फिर टल गई. आखिर में परीक्षा की तारीख 9 जून तय हुई और उनकी डिलीवरी की तारीख 15 जून थी. परिधि बताती हैं कि यह समय मेरे लिए बड़े ही तनाव का था. इसके पीछे प्रेग्नेंसी, एग्जाम समेत और भी कई कारण थे. धीरे-धीरे समय गुजर रहा था, परीक्षा और डिलीवरी की तारीख नजदीक आ रही थी. लेकिन, 3 जून 2024 को ही मुझे लेबर पेन (Labour Pain) होने लगा, सासू मां को बताया, उसी रात अस्पताल में भर्ती हो गई. दर्द के बीच भी हाथ में किताब लेकर पढ़ने की कोशिश कर रही थी. 4 जून की शाम को ऑपरेशन (c-section) से बेटी को जन्म दिया, जिसने हमारे पूरे परिवार की तकदीर बदल दी.
दर्द में दिया एग्जाम, एक साथ आईं दो खुशियां
परिधि बताती हैं कि 8 जून 2024 को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होकर आई थी. सी-सेक्शन ऑपरेशन हुआ था, पेट में टांके लगे (Stitches) थे और गोद में 4 दिन की बेटी थी. अगले दिन नौ जून को एग्जाम देने जाना था. अगले दिन पति, सासू मां, और मेरी छोटी बहन परीक्षा दिलाने लेकर गए. असहनीय दर्द में थी, बैठना मुश्किल था, लेकिन उस दिन मैंने खुद से कहा- अब नहीं तो कभी नहीं. इसके मैंने पूरे मन और लगन से परीक्षा दी. इसके करीब 15 दिन बाद परिध को MPPSC- Taxation Assistant Officer का इंटरव्यू कॉल आया. वे अपनी 20 दिन की बेटी को लेकर गुड़िया को लेकर इंटरव्यू देने गई. इसमें उन्हें सफलता भी मिली. इसी दौरान परिधि को एक और खुशखबरी भी मिली कि उनका MPPSC Assistant Professor का Exam भी क्वालिफाई हो गया है.

अपना और पिता का सपना किया पूरा, पहली बार का अनुभव कमाल
फरवरी 2025 में परिधि सोनी ने Taxation Assistant Officer के पद पर ज्वाइन किया. इस दौरान उनकी बेटी मृद्वी सात महीने की थी, जिसे घर छोड़कर परिधि 40 किलोमीटर का सफर तय करती और रोजाना भोपाल (Bhopal) से सीहोर (Sehore) जाती. इसके लिए वे सुबह 9 बजे घर से निकलती और शाम 7:30 बजे तक लौटती. फिर आया 13 जून 2025 का वो दिन, जिसका परिधि को इंतजार था. यह वो दिन था जिसने परिधि ही नहीं उनके पिता का भी सपना पूरा किया था. परिधि Assistant Professor बन गई थीं. 13 दिसंबर 2025 को परिधि ने भोपाल के Dr. Shyama Prasad Mukherjee College, ज्वाइन किया. यह वही कॉलेज था जिसमें परिधि के पिता को भी पहली पोस्टिंग मिली थी. इसे परिधि कोई संयोग नहीं, भगवान और अपने पिता के आशीर्वाद का प्रतीक मानती हैं.

काश उनकी आंखों में यह खुशी देख पाती
जीवन में आईं तमान चुनौतियां और संघर्ष के बाद मिली सफलता को लेकर परिधि कहती हैं कि मैं Assistant Professor बन गई. यह मेरे पापा का सपना था, जो पूरा हो गया. तब कई लोगों ने बधाइयां दी थी, लेकिन फिर भी उस रात मुझे नींद नहीं आई थी. सब कुछ था मेरे पास, लेकिन मम्मी-पापा की कमी बहुत खल रही थी, आज भी उनकी कमी खलती हैं, लेकिन उस दिन दिमाग में बस एक ही बात थी कि काश, उनकी आंखों में भी यह खुशी देख पाती.