Success Story CRPF Chhattisgarh: दिनभर मजदूरी, सुबह-शाम तैयारी, आंखों में सपने और चेहरे पर आत्मविश्वास. यह सब खामोशी से चलता रहा, मगर अब सफलता ने शोर मचा दिया है. दोनों सगे भाइयों का एक साथ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में चयन हुआ है. ताने मारने वाले भी आज गर्व महसूस कर रहे हैं. प्रशिक्षण के लिए विदाई का वक्त आया तो पूरा गांव शुभकामनाएं देने पहुंचा. तब बेटों के गले में फूल मालाएं और माथे पर जीत का तिलक देख गरीब माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू बह निकले. यह सक्सेस स्टोरी छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के मगरलोड इलाके के ग्राम दुधवारा के पवन कुमार ध्रुव (22) और उनके छोटे भाई नकुल कुमार ध्रुव (19) की है.
गांव में रहकर भी भरी सफलता की ऊंची उड़ान
इनके पिता राजाराम ध्रुव मिस्त्री का काम करते हैं. माता आशो बाई भी कम पढ़ी-लिखी हैं, मगर इन्होंने बेटों के स्कूल-कॉलेज की ओर बढ़ते कदम कभी नहीं रोके. शिक्षा के दम पर आज नतीज हम सबके सामने है. परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, इसलिए दोनों भाइयों ने स्कूल-कॉलेज की छुट्टियों में दिहाड़ी मजदूरी की. दिन में मजदूरी और सुबह-शाम प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी. यही उनकी दिनचर्या थी.

Success Story Two Brothers Pawan Kumar Dhruv & Nakul Kumar Dhruv Selected in CRPF from Dhamtari Chhattisgarh
कई असफलताओं के बाद मिली सफलता
दोनों भाइयों ने छत्तीसगढ़ आरक्षक भर्ती, CRPF भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कई बार प्रयास किया, लेकिन शुरुआती वर्षों में सफलता नहीं मिली. बीते तीन-चार वर्षों में लगातार असफल होने के बावजूद उन्होंने किताबों से दूरी नहीं बनाई. असफलताओं को ही अपनी ताकत बनाया और आखिरकार CRPF में चयन हासिल कर लिया. पवन कुमार ध्रुव ने फाइनल ईयर तक की पढ़ाई पूरी कर ली है, जबकि नकुल कुमार ध्रुव सेकंड ईयर में अध्ययनरत थे. उनका छोटा भाई भी अब पढ़ाई पर ध्यान दे रहा है और बड़े भाइयों से प्रेरणा ले रहा है.

Success Story Two Brothers Pawan Kumar Dhruv & Nakul Kumar Dhruv Selected in CRPF from Dhamtari Chhattisgarh
18 फरवरी 2026 को बिलासपुर ट्रेनिंग के लिए रवाना
दोनों भाई 18 फरवरी 2026 को बिलासपुर प्रशिक्षण केंद्र के लिए रवाना हुए. यहां उन्हें 11 माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके बाद फील्ड पोस्टिंग मिलेगी. विदाई के समय गांव के लोगों ने फूल-मालाओं और शुभकामनाओं के साथ उनका सम्मान किया.
माता-पिता को नहीं पता CRPF की फुल फॉर्म, मगर गर्व अपार
मीडिया से बातचीत में राजाराम ध्रुव और आशो बाई ने बताया कि उन्हें CRPF की फुल फॉर्म तक नहीं पता. वे यह भी नहीं जानते कि उनके बेटे देश के किस हिस्से में सेवाएं देंगे. लेकिन उन्हें इस बात की बेहद खुशी है कि उनके बेटों को देश सेवा का अवसर मिला है. गांव के लिए भी यह गर्व का क्षण है. मजदूरी से लेकर वर्दी तक का यह सफर आज पूरे इलाके के लिए प्रेरणा बन गया है.
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