Success Story: मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के किसान बनेसिंह चंद्रावत ने जैविक खेती के जरिए यह साबित कर दिया है कि रसायन नहीं, प्रकृति के साथ खेती ही असली मुनाफे की कुंजी है. रतलाल पीआरओ के आधिकारिक फेसबुक पेज पर उनकी सक्सेस स्टोरी साझा की गई है, जो अब किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है.
आक्याखुर्द ताल के रहने वाले हैं बनेसिंह चंद्रावत
किसान बनेसिंह चंद्रावत मूल रूप से रतलाम जिले के गांव आक्याखुर्द ताल के रहने वाले हैं. सक्सेस स्टोरी सोशल मीडिया पर वायरल होने पर अब लोग इनसे कम लागते में अधिक मुनाफे वाली संतरे की खेती की तकनीक जानने के मैसेज कर रहे हैं. बनेसिंह चंद्रावत की यह कहानी उन किसानों के लिए बड़ा संदेश है, जो कम लागत में टिकाऊ और लाभकारी खेती की तलाश में हैं.
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Organic santre ki kheti से Ratlam के किसान बनेसिंह बने मिसाल. Photo Credit: PRO Ratlam
Santre Ki Kheti: 15 वर्षों से जैविक खेती
रतलाम पीआरओ के अनुसार किसान बनेसिंह चंद्रावत ने बताया कि वे पिछले 15 वर्षों से लगातार जैविक खेती कर रहे हैं. जैविक खेती के अंतर्गत वे करीब 2 हेक्टेयर भूमि में संतरे के पौधे, गेहूं, चना और राजमा की खेती कर रहे हैं.
उन्होंने बताया कि जैविक खेती अपनाने के बाद उन्हें बाजार से डीएपी और यूरिया जैसी रासायनिक खाद खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. वे खुद वर्मिंग कम्पोस्ट तैयार करते हैं और उसी का उपयोग खेतों में करते हैं, जिससे लागत भी कम होती है और मिट्टी की सेहत भी बनी रहती है.

संतरे की खेती से हर साल बढ़ती गई आमदनी
संतरे की खेती के बारे में बनेसिंह ने बताया कि पहले वर्ष एक हेक्टेयर संतरे के बगीचे से उन्हें लगभग 2 लाख रुपये की आमदनी हुई थी. दूसरे वर्ष यह आमदनी बढ़कर 6 लाख रुपये तक पहुंच गई. वहीं तीसरे वर्ष व्यापारियों ने संतरे की फसल से लगभग 27 लाख रुपये की आमदनी का अनुमान बताया है. किसान का कहना है कि जैविक तरीके से संतरे की खेती में दो से चार गुना तक मुनाफा संभव है.
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Success Story: Ratlam के farmer बनेसिंह कर रहे Santre ki kheti. Photo Credit: PRO Ratlam
रासायनिक खाद से खराब हुई पैदावार
उन्होंने यह भी बताया कि जैविक खेती से एक संतरे के पौधे में लगभग एक से दो क्विंटल तक फल प्राप्त होता है. इसके उलट रासायनिक खेती के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस खेत में उन्होंने रासायनिक खाद का उपयोग किया था, वहां पहले साल संतरे से करीब 5 लाख रुपये की आमदनी हुई थी, दूसरे साल यह घटकर 2 लाख रह गई और अब हालात ऐसे हो गए हैं कि एक लाख रुपये की आमदनी भी मुश्किल हो गई है.
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