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बड़ी मुश्किल से हाथ आई बांधवगढ़ की बाघिन, MT-6 को जंगल पसंद नहीं, बार-बार आ रही बाहर 

Bandhavgarh Tiger Reserve: शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व में लाई गई बांधवगढ़ की मादा बाघिन एमटी-6 पिछले कई दिनों से जंगल छोड़कर ग्रामीण इलाकों में घूम रही थी. वन विभाग ने हाथियों की मदद से उसे ट्रेंकुलाइज कर एक बार फिर जंगल में छोड़ दिया. लेकिन, उसे जंगल पसंद नहीं आ रहा है.

बड़ी मुश्किल से हाथ आई बांधवगढ़ की बाघिन, MT-6 को जंगल पसंद नहीं, बार-बार आ रही बाहर 

Shivpuri Tiger Reserve: शिवपुरी माधव टाइगर रिजर्व लाई गई बांधवगढ़ की मादा बाघिन एमटी-6 ने पिछले 11 दिनों से लगातार वन प्रशासन की नाक में दम कर रखा था. यह बाघिन जंगल छोड़कर ग्रामीण इलाकों में चहलकदमी करती नजर आ रही थी और पालतू मवेशियों का शिकार कर ग्रामीणों में दहशत फैला रही थी.   

लेकिन, बीते मंगलवार को वन विभाग ने हाथियों की मदद से बाघिन को ट्रेंकुलाइज कर एक बार फिर जंगल में छोड़ दिया है. हालांकि, उसका ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि बाघिन एमटी-6 को जंगल में रहना पसंद नहीं है, यह ग्रामीण इलाकों के खेतों और पालतू मवेशियों के बीच रहकर उनका शिकार करना ज्यादा पसंद करती है. ऐसे ग्रामीणों की दहशत कुछ कम हुई है, पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. कभी भी वह फिर जंगल छोड़ सकती है.  

रिहायशी इलाकों में घूम रही थी बाघिन

दरअसल, 27 दिसंबर को बांधवगढ़ से लाई गई बाघिन एमटी-6 पिछले कई दिनों से रिहायशी इलाकों में घूम रही थी और मवेशियों का शिकार कर रही थी. वह 31 दिसंबर को रिजर्व के कोर एरिया से बाहर निकलकर सतनबाड़ा थाना क्षेत्र के डोंगर गांव पहुंच गई थी. 1 जनवरी की सुबह उसने गांव के बुजुर्ग शिवलाल बघेल पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था. वन अमले ने काफी मशक्कत के बाद उसे जंगल की ओर खदेड़ा, लेकिन वह दोबारा आबादी वाले इलाकों में वापस आ गई. 2 जनवरी को उसे सुरवाया थाना क्षेत्र के सरदारपुरा, खुटेला और मोहम्मदपुर गांवों के आसपास घूमते देखा गया. इस दौरान उसने कई मवेशियों को अपना शिकार बनाया. बाघिन की मौजूदगी से ग्रामीण घर की छतों पर रहने को मजबूर हो गए. हालात यह थे कि किसान खेतों में पानी देने तक नहीं जा पा रहे थे.

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जंगल में छोड़ा गया  

इधर, ट्रैकिंग टीम, रेंजर और टाइगर रिजर्व का अमला लगातार बाघिन पर नजर बनाए हुए था. 11 दिन गुजर जाने के बाद भी जब बाघिन वापस कोर एरिया में नहीं लौटी और जनहानि की आशंका बढ़ गई, तो उसे ट्रेंकुलाइज करने का निर्णय लिया गया. मंगलवार को सीसीएफ उत्तम शर्मा, डीएफओ, रेंजर, डॉक्टरों और विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंची. सुरक्षा की दृष्टि से आसपास के गांवों में पुलिस बल तैनात किया गया. बाघिन को ट्रेंकुलाइज करने के लिए दो हाथियों की भी मदद ली गई. एक हाथी पर सीसीएफ और डीएफओ सवार थे, जबकि दूसरे हाथी पर डॉक्टरों और रेस्क्यू टीम के सदस्य मौजूद थे. सुबह करीब 11 बजे भरकुली गेट के सामने बाघिन की लोकेशन ट्रैक की गई और उसे ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित रूप से रेस्क्यू किया गया. इसके बाद उसे एक बार फिर माधव टाइगर रिजर्व के जंगलों में छोड़ दिया गया है.

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