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चलती बस में जन्मी बेटी, ऑपरेशन की जिद पर अड़ा रहा अस्पताल प्रबंधन, 5 दिन बाद प्रसूता को घर ले जा रहे थे परिजन

Shivpuri Bus Delivery: प्रसूता के परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं. सास ने कहा कि बहू को प्रसव पीड़ा होने पर भी स्टाफ द्वारा दवाइयों और इंजेक्शन के जरिए दर्द रोका गया. डॉक्टर लगातार ऑपरेशन का दबाव बना रहे थे, जबकि दो बच्चे सामान्य प्रसव से हुए थे.

चलती बस में जन्मी बेटी, ऑपरेशन की जिद पर अड़ा रहा अस्पताल प्रबंधन, 5 दिन बाद प्रसूता को घर ले जा रहे थे परिजन
डिलीवरी के बाद अस्पताल में भर्ती महिला.

Shivpuri Bus Delivery Case: शिवपुरी जिले में एक प्रसूता को डिलीवरी के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टर पांच दिन तक उसका इलाज करते रहे, लेकिन डिलीवरी नहीं कराई जा सकी. चिकित्सकों ने महिला से ऑपरेशन की बात कही, लेकर उसका कहना था कि दो बच्चे नॉर्मल डिलीवरी से हुए हैं, तो ऑपरेशन की क्या जरूरत. अस्पताल प्रबंधन के अधिक दबाव बनाने पर परिजन प्रसूता को लेकर चले गए. लेकिन रास्ते में उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गई, जिसके बाद महिला ने बस में बच्ची को जन्म दिया. इस मामले में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर ने कहा कि परिवार वाले बिना इजाजत के प्रसूता को घर वापस ले गए थे, इसलिए प्रशासन की कोई गलती नहीं है.  

वापस घर जा रहा था परिवार  

दरअसल, करैरा क्षेत्र के ग्राम बघेदरी की रहने वाली 26 वर्षीय आशा पत्नी रविंद्र वंशकार सोमवार दोपहर अपने परिजनों के साथ जिला अस्पताल से गांव लौट रही थीं. इस दौरान अमोला के पास सिरसौद चौराहे पर उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हुई और उन्होंने बस के अंदर ही एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया. डिलीवरी के बाद परिजनों ने प्रसूता को बस से उतारकर टमटम के जरिए सिरसौद अस्पताल पहुंचाया, जहां मां और नवजात को भर्ती कर लिया गया है. फिलहाल दोनों की स्थिति सुरक्षित बताई जा रही है.

दो बच्चे बिना ऑपरेशन के हुए

इस घटना को लेकर प्रसूता के परिजनों ने जिला अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं. सास कौशल्या ने कहा कि वे पांच दिन पहले बहू की डिलीवरी के लिए जिला अस्पताल पहुंची थीं. बहू आशा को प्रसव पीड़ा होने पर भी स्टाफ द्वारा दवाइयों और इंजेक्शन के जरिए दर्द रोका गया, इस कारण उसकी डिलीवरी नहीं हो सकी. उन्होंने कहा कि डॉक्टर लगातार ऑपरेशन का दबाव बना रहे थे, जबकि आशा के पहले दो बच्चे सामान्य प्रसव से हुए थे. इसलिए हम ऑपरेशन के लिए तैयार नहीं थे. इससे परेशान होकर हमने अस्पताल छोड़ दिया, लेकिन रास्ते में बस में डिलीवरी हो गई.

इस सवाल खामोश हो गए बीएमओ 

करैरा बीएमओ डॉ. नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि परिजन बिना बताए जिला अस्पताल से चले गए थे. ऐसे में अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी नहीं बनती. लेकिन, जब उनसे पूछा गया कि आखिर पांच दिन तक जिला अस्पताल में प्रसव के लिए लाई गई महिला की नॉर्मल डिलीवरी होनी थी, तो उसे चिकित्सक ऑपरेशन के लिए क्यों मजबूर कर रहे थे, इस सवाल पर बीएमओ खामोश रहे. 
 

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