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सीहोर के 11 गांवों में चुनाव बहिष्कार की चेतावनी, नर्मदा-पार्वती लिंक परियोजना पर क्यों भड़के ग्रामीण? 

Sehore Election Boycott: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र के 11 गांवों के ग्रामीण नर्मदा-पार्वती लिंक परियोजना से वंचित रहने और प्रशासन की अनदेखी से नाराज हैं. अधिकारियों के जनसंवाद में नहीं पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने आगामी चुनावों में मतदान का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है.

सीहोर के 11 गांवों में चुनाव बहिष्कार की चेतावनी, नर्मदा-पार्वती लिंक परियोजना पर क्यों भड़के ग्रामीण? 

Sehore Election Boycott: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर विधानसभा क्षेत्र में प्रशासनिक अनदेखी और वादाखिलाफी को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है. नर्मदा-पार्वती लिंक परियोजना से वंचित 11 गांवों के ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तनाव उस समय बढ़ गया, जब तय कार्यक्रम के बावजूद अधिकारी जनसंवाद के लिए गांव नहीं पहुंचे. घंटों इंतजार के बाद नाराज ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है.

अधिकारियों के नहीं पहुंचने से भड़का आक्रोश

ग्रामीणों के अनुसार 2 मार्च को जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भरोसा दिलाया था कि 6 मार्च को वे गांवों में आकर जनसंवाद करेंगे और परियोजना से जुड़ी समस्याओं का समाधान करेंगे. लेकिन 6 मार्च को जब 11 गांवों के लोग उम्मीद लेकर एकत्र हुए, तब कोई भी जिम्मेदार अधिकारी वहां नहीं पहुंचा. ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन देकर शांत करने की कोशिश की गई. इससे उनका गुस्सा और बढ़ गया है.

योजनाओं का लाभ नहीं लेने और वोट बहिष्कार की चेतावनी

अधिकारियों के इस रवैये से नाराज ग्रामीणों ने सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है. ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा है कि वे केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की मोहन यादव सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं लेंगे.

उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आगामी चुनावों में 11 गांवों के मतदाता मतदान का बहिष्कार करेंगे. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उन्हें सिंचाई के लिए नर्मदा का पानी नहीं मिलेगा, तब तक वे किसी भी सरकारी गतिविधि में सहयोग नहीं करेंगे.

स्मार्ट मीटर का विरोध, कर्मचारियों को लौटाया

ग्रामीणों की नाराजगी का असर अन्य सरकारी कामों पर भी दिखने लगा है. ग्राम दुदलाई में स्मार्ट मीटर लगाने पहुंचे बिजली कंपनी के कर्मचारियों और ठेकेदारों को ग्रामीणों ने विरोध कर वापस लौटा दिया.

किसानों का कहना है कि पाइपलाइन गांव के सामने से गुजर रही है, फिर भी उन्हें पानी नहीं मिल रहा है. ऐसे में गांव में किसी भी तरह का नया काम नहीं होने दिया जाएगा. इसके अलावा जनगणना के लिए मकान सूचीकरण करने पहुंचे पटवारी और सचिव को भी ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा और उन्हें वापस लौटना पड़ा.

दिग्गज नेताओं के क्षेत्र में अनदेखी से निराशा

ग्रामीणों का कहना है कि यह इलाका केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संसदीय क्षेत्र और प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का विधानसभा क्षेत्र है. इसके बावजूद किसानों की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है. किसानों का कहना है कि वे कई बार जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं.

ग्राम दुदलाई, दौलतपुर, रूगनाथपुरा, रूपदी, रूपादेह, गादिया, बोदरीखुर्द, डूण्डलावा, बावडियागौसाई, लालियाखेड़ी और कुण्डीखाल के ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सिंचाई के लिए नर्मदा का पानी नहीं मिला तो वे आगामी चुनावों में मतदान का बहिष्कार करेंगे.

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