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This Article is From Jan 24, 2026

मध्‍य प्रदेश में इंसानियत शर्मसार. पत्नी को ठेले पर अस्पताल ले जा रहा था पति, रास्ते में महिला की मौत

सागर में एक गरीब सब्जी विक्रेता अपनी बीमार पत्नी को हाथ ठेले पर अस्पताल ले जाने को मजबूर हुआ, लेकिन रास्ते में ही महिला की मौत हो गई. यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों और सामाजिक संवेदनहीनता को उजागर करती है. मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं और प्रशासन ने मदद का आश्वासन दिया है.

मध्‍य प्रदेश में इंसानियत शर्मसार. पत्नी को ठेले पर अस्पताल ले जा रहा था पति, रास्ते में महिला की मौत

Madhya Pradesh News: मध्‍य प्रदेश के सागर शहर से एक ऐसी मार्मिक और हृदयविदारक तस्वीर सामने आई है, जिसने इंसानियत और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है. बीमारी से जूझ रही अपनी पत्नी को इलाज के लिए हाथ ठेले पर अस्पताल ले जा रहा एक वृद्ध उस वक्त टूट गया, जब अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी पत्नी ने बीच रास्ते में दम तोड़ दिया. यह दृश्य जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं और दिल भीतर तक दहल उठा.

सागर में सब्जी बेचकर चल रहा था परिवार का गुजारा

जानकारी के अनुसार उत्तरप्रदेश के ललितपुर जिले के सेसाई गांव निवासी पवन साहू बीते 10 से 12 वर्षों से सागर में रहकर सब्जी बेचने का कार्य कर रहे हैं. रोज़ की कमाई से जैसे-तैसे परिवार का पेट पालने वाले पवन साहू की पत्नी लंबे समय से बीमार चल रही थीं. आर्थिक तंगी के चलते वे अपनी पत्नी को समय पर बेहतर और समुचित इलाज उपलब्ध नहीं करा सके. इलाज के लिए जो भी थोड़ी-बहुत जमा पूंजी थी, वह पहले ही खर्च हो चुकी थी.

एंबुलेंस नहीं मिली, ठेले पर पत्नी को ले जाना पड़ा

मजबूरी और लाचारी की पराकाष्ठा उस समय देखने को मिली, जब पवन साहू अपनी बीमार पत्नी को उसी सब्जी के ठेले पर अस्पताल ले जाने को मजबूर हुए. बताया जा रहा है कि एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं हो सकी और निजी साधन किराए पर लेने की हैसियत भी उनके पास नहीं थी. लेकिन दुर्भाग्य को कुछ और ही मंजूर था. अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनकी पत्नी ने अंतिम सांस ले ली. सड़क पर हाथ ठेले पर पड़ा शव और बेसहारा वृद्ध पति की बेबसी ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया.

स्वास्थ्य व्यवस्था और समाज पर बड़ा सवाल

यह दृश्य केवल एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक संवेदनहीनता और स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है. जहां एक ओर सरकारी योजनाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर एक गरीब व्यक्ति को अपनी पत्नी को हाथ ठेले पर अस्पताल ले जाना पड़ता है.

अंतिम संस्कार कैसे करेगा गरीब परिवार?

सबसे बड़ा सवाल अब यह खड़ा हो रहा है कि जिस व्यक्ति की पूरी कमाई और जमा पूंजी पत्नी के इलाज में खर्च हो चुकी हो, वह अपनी पत्नी का सम्मानजनक अंतिम संस्कार कैसे कर पाएगा? क्या हमारा समाज और प्रशासन इतना असहाय हो चुका है कि एक गरीब को जीवन के साथ-साथ मृत्यु के बाद भी संघर्ष करना पड़े?

CMHO ने जांच के दिए निर्देश

सागर की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ममता तिमोरी ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है. पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है कि दंपत्ति को एंबुलेंस की सुविधा क्यों नहीं मिल पाई. साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि पीड़ित परिवार को हर संभव मदद प्रदान की जाएगी.

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