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हत्या के दोषी ने जेल से की पोस्ट ग्रेजुएशन, साथी कैदियों को भी पढ़ाया, माफ हो गई उम्रकैद की सजा, 9 कैदी के साथ रिहा

Sagar Central Jail: गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर केंद्रीय जेल सागर से हत्या के मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 9 कैदियों को रिहा किया गया. इस दौरान कैदियों के चेहरे पर खुशी साफ तौर पर झलक रही थी.

हत्या के दोषी ने जेल से की पोस्ट ग्रेजुएशन, साथी कैदियों को भी पढ़ाया, माफ हो गई उम्रकैद की सजा, 9 कैदी के साथ रिहा
Rajendra Singh Lodhi: रिहा होने वाले 9 कैदियों में राजेंद्र सिंह लोधी भी शामिल.

Central Jail Sagar: गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर केंद्रीय जेल सागर से हत्या के मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 9 कैदियों को रिहा किया गया. इन सभी कैदियों की सजा अवधि पूर्ण हो चुकी थी, जिसके बाद जेल प्रशासन द्वारा नियमानुसार उन्हें स्वतंत्रता प्रदान की गई. जेल से बाहर निकलते समय कैदियों के चेहरों पर एक नए जीवन की शुरुआत की उम्मीद साफ दिखाई दी.

हत्या के मामले में काट रहे थे सजा

रिहा हुए कैदियों में सागर जिले के ग्राम बरा निवासी राजेंद्र सिंह लोधी भी शामिल हैं, जिनकी कहानी सुधार और आत्मनिर्भरता का उदाहरण बनकर सामने आई है. राजेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि वो हत्या के एक मामले में केंद्रीय जेल सागर में सजा काट रहे थे. न्यायालय द्वारा उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. जेल में बिताए गए लंबे समय के दौरान उन्होंने निराश होने के बजाय शिक्षा को अपना सहारा बनाया और अपने भविष्य को नई दिशा देने का संकल्प लिया.

Central Jail Sagar

Central Jail Sagar: गणतंत्र दिवस के मौके पर 9 कैदी रिहा...

जेल से की पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई

राजेंद्र ने जेल में रहते हुए डॉक्टर हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. इसके साथ ही उन्होंने समाजशास्त्र (सोशियोलॉजी) में एमए किया और टूर एंड ट्रैवल्स मैनेजमेंट का कोर्स भी सफलतापूर्वक पूरा किया. यह सभी पढ़ाइयां उन्होंने जेल में रहते हुए कीं और अच्छे अंकों के साथ परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं. उनका कहना है कि पढ़ाई ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाया और जीवन को सकारात्मक दृष्टि से देखने की प्रेरणा दी.

24 की उम्र में गए थे जेल

राजेंद्र ने बताया कि वर्ष 2011 में गांव में हुए एक विवाद के दौरान वे हत्या के मामले में जेल गए थे. उस समय उनकी उम्र मात्र 24 वर्ष थी और वो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे थे. एक अचानक हुए विवाद ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और सरकारी नौकरी का सपना अधूरा रह गया. हालांकि जेल में रहते हुए उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई जारी रखी.

रिहाई के बाद राजेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि वे अब अपना खुद का व्यापार शुरू करेंगे और सम्मानजनक जीवन व्यतीत करेंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भविष्य में कभी भी आपराधिक दुनिया की ओर कदम नहीं रखेंगे. राजेंद्र ने यह भी बताया कि केंद्रीय जेल सागर में पढ़ाई करने के इच्छुक कैदियों के लिए पूरी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है, जिससे वे सजा के दौरान भी अपने जीवन को बेहतर बना सकें.

 सागर केंद्रीय जेल से 9 कैदी रिहा

गणतंत्र दिवस पर इन कैदियों की रिहाई न केवल कानून की प्रक्रिया का उदाहरण है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि सुधार, शिक्षा और आत्मविश्वास के माध्यम से जीवन को नई दिशा दी जा सकती है.

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