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This Article is From Mar 31, 2026

गर्भवती ने चलती बस में दिया बच्ची को जन्म, चार दिन जिला अस्पताल में भर्ती होने के बाद घर लौट रही थी महिला

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक प्रसूता को जिला अस्पताल में डिलीवरी के लिए भर्ती कराया गया था, लेकिन 4 दिन तक इलाज के बाद भी डिलीवरी नहीं हो सकी. डॉक्टर ऑपरेशन की बात कह रहे थे, लेकिन महिला के परिजन तैयार नहीं थे.

गर्भवती ने चलती बस में दिया बच्ची को जन्म, चार दिन जिला अस्पताल में भर्ती होने के बाद घर लौट रही थी महिला

Woman Delivery in Bus Shivpur: मध्य प्रदेश शिवपुरी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की क्या हालत है यह अक्सर सामने आ जाता है. ऐसा ही एक मामला एक बार फिर सामने आया है, जहां एक प्रसूता को डिलीवरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया. जिला अस्पताल प्रबंधन उसका 4 दिन तक इलाज करता रहा, लेकिन डिलीवरी नहीं कराई जा सकी. जिला अस्पताल में मौजूद चिकित्सक महिला से ऑपरेशन की बात कहते रहे, लेकिन महिला बार-बार कहती रही कि उसके दो बच्चे नॉर्मल डिलीवरी से हुए हैं तो फिर ऑपरेशन की क्या जरूरत लेकिन प्रशासन नहीं माना तो मजबूरी में अस्पताल छोड़कर महिला और उसके परिजन जब घर वापस लौटने लगे.

इस दौरान महिला को रास्ते में प्रसव पीड़ा के चलते एक बच्ची को चलती बस में जन्म देना पड़ा. इस मामले में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर का कहना है कि प्रसूता को बिना इजाजत परिवार वाले अपने घर वापस ले गए. इसलिए प्रशासन की कोई गलती नहीं है.

जानकारी के अनुसार, करैरा क्षेत्र के बघेदरी गांव आशा (26) पत्नी रविंद्र वंशकार सोमवार दोपहर अपने परिजनों के साथ जिला अस्पताल से गांव लौट रही थी. इसी दौरान अमोला के पास सिरसौद चौराहे पर उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हुई और उन्होंने बस के अंदर ही एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया.

डिलीवरी के बाद परिजनों ने तुरंत प्रसूता को बस से उतारकर टमटम के जरिए सिरसौद अस्पताल पहुंचाया. वहां मां और नवजात को भर्ती कर लिया है. फिलहाल दोनों की स्थिति सुरक्षित बताई जा रही है.

अस्पताल पर लापरवाही के आरोप

इस घटना के पीछे परिजनों ने जिला अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं. प्रसूता की सास कौशल्या के अनुसार, वे पांच दिन पहले डिलीवरी के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे. वहां आशा को प्रसव पीड़ा होने पर भी स्टाफ दवाइयों और इंजेक्शन के जरिए दर्द रोकता था.

ऑपरेशन के लिए डाल रहे थे दबाव

प्रसूता महिला के परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर लगातार ऑपरेशन से डिलीवरी करने की बात कह रहे थे, जबकि आशा के पहले दो बच्चे सामान्य प्रसव से हुए थे. इसी वजह से परिजन ऑपरेशन के लिए तैयार नहीं थे. इसके अलावा अस्पताल में रुकने और देखभाल को लेकर भी परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा. इन सब परेशानियों से तंग आकर परिजन बिना किसी को सूचना दिए प्रसूता को लेकर गांव लौट रहे थे, इसी दौरान रास्ते में बस में ही डिलीवरी हो गई.

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