Gwalior Roop Singh Stadium Lease: ग्वालियर में भाजपा सांसद भारत सिंह कुशवाह और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच चल रही सियासी जंग अब खुलकर सामने आ गई. सिंधिया परिवार के वर्चस्व वाले कैप्टन रूप सिंह स्टेडियम की लीज बढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर जहां सांसद ने नगर निगम महापौर और सभापति को इसकी लीज आगे ना बढ़ाने को लेकर आग्रह पत्र भेजा, बल्कि परिषद की बैठक में भाजपा के चार पार्षदों ने लीज बढ़ाने के प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया.
उन्होंने तो आसंदी तक घेरी. मजेदार बात ये रही कि इस प्रस्ताव का कांग्रेस मेयर सहित सभी कांग्रेसियो ने समर्थन किया. हालांकि, सदन ने बहुमत से इस प्रस्ताव को पास करके लीज बढ़ाने का प्रस्ताव बहुमत से पारित कर दिया. इस मामले में सिंधिया की बड़ी जीत हुई.
सचिन ने वनडे में पहला दोहरा शतक यहीं लगाया
कैप्टन रूप सिंह स्टेडियम (Captain Roop Singh Stadium) ग्वालियर नगर निगम का है और इसे हॉकी के लिए बनाया गया था, लेकिन अस्सी के दशक में जब माधव राव सिंधिया ने ग्वालियर डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन (Gwalior Division Cricket Association) का गठन किया तो यहां क्रिकेट गतिविधियां शुरू हुई. फिर उन्होंने इस स्टेडियम को नगर निगम से लीज पर ले लिया था. तब से यहां अनेक अंतर्राष्ट्रीय मैच हो चुके हैं. एक दिवसीय क्रिकेट में पहला दोहरा शतक सचिन तेंदुलकर ने इसी स्टेडियम में लगाया था.
सांसद चाहते हैं हॉकी की गतिविधि शुरू हो
वर्तमान में जीडीसीए (GDCA) और एमपीसीए (MPCA) की बागडोर महाआर्यमन सिंधिया (Mahaaryaman Scindia) के हाथ में है. अब जीडीसीए का अपना स्टेडियम शंकरपुर में बन चुका है और रूप सिंह स्टेडियम की लीज भी खत्म हो रही है, ऐसे में सांसद भारत सिंह कुशवाह (BJP MP Bharat Singh Kushwah) लगातार मांग कर रहे हैं कि लीज आगे ना बढ़ाकर इसे नगर निगम खुद संचालित करे और इसमें फिर से हॉकी की गतिविधियां शुरू की जाएं.
ग्वालियर डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन ने लीज बढ़ाने का आवेदन नगर निगम में भेजा था. नगर निगम के सियासी हालत एकदम अजीब हैं. यहां मेयर और एमआईसी तो कांग्रेस की है, जबकि परिषद में बहुमत भाजपा का है. आयुक्त ने प्रस्ताव एमआईसी को भेजा और एमआईसी ने स्वीकृत कर मंजूरी के लिए परिषद में भेज दिया.
एमआईसी में नहीं अटका प्रस्ताव, BJP सांसद ने लिखा था पत्र
हालांकि, प्रस्ताव के कोंग्रेसी ताकत वाली एमआईसी में अटकने की संभावना थी, लेकिन वहां से उसे मंजूरी मिल गई. उसको लेकर जब परिषद में चर्चा शुरू हुई तो भाजपा दो फाड़ नजर आई. परिषद शुरू होने से पहले भाजपा सांसद भारत सिंह कुशवाह ने कांग्रेस की मेयर डॉ शोभा सिकरवार और भाजपा के सभापति मनोज तोमर को बाकायदा पत्र लिखकर लीज आगे ना बढ़ाने का आग्रह किया गया.
पार्षदों को भी भेजा था पत्र
सूत्रों की मानें तो ऐसा पत्र सांसद ने अपने पार्षदों को भी भेजा. इसका असर परिषद की बैठक में दिखा भी. प्रस्ताव आते ही भाजपा पार्षद गिर्राज कंसाना, राजू पलैया समेत चार लोगों ने इसका जमकर विरोध किया और इसे न बढ़ाने की मांग की गई. हालांकि, बहुमत से यह प्रस्ताव पास हो गया.
सिंधिया की जीत रही तरह देखा जा रहा
इसे सिंधिया की जीत और सांसद कुशवाह की पराजय के रूप में देखा गया. मेयर ने कहा कि सदन ने जनभावनाओं को ध्यान में रखकर निर्णय लिया है. इससे निगम की आय में भी वृद्धि होगी. सभापति मनोज तोमर ने स्वीकार किया कि इस प्रस्ताव पर भाजपा के चार सदस्यों ने विरोध जताया, लेकिन सत्ता और विपक्ष के बाकी सभी सदस्य इससे सहमत थे. इसलिए चार सदस्यों के डीसेंट नोट के साथ इसे नियमानुसार पारित कर दिया.
विरोध करने वाला भाजपा पार्षद ने क्या कहा
उधर, इस प्रस्ताव का विरोध करने वाले भाजपा पार्षद गिर्राज कंसाना ने कहा कि हम यहां विपक्ष में हैं तो हमारा टारगेट सिर्फ कांग्रेस होनी चाहिए, लेकिन हम सब देख रहे हैं कि परिषद में ज्यादातर लोग कांग्रेस का साथ देते हैं और अधिकारियों को टारगेट करते हैं. जबकि राज्य में सरकार हमारी है. अधिकारी हमारी सरकार नियुक्त करती है.
कंसाना ने कहा कि मेरा आशय ये था कि अगर स्टेडियम को रिन्यु करने की जगह यह ऑक्शन में जाता तो इससे निगम को ज्यादा आमदनी होती, क्योंकि निगम इस समय वैसे भी आर्थिक संकट से जूझ रही है. ये अच्छा अवसर था आय बढ़ाने का. मैं यह मामला अपनी पार्टी में भी उठाऊंगा.
सिंधिया समर्थक पार्षद ने क्या कहा?
उधर, सिंधिया समर्थक भाजपा पार्षद मोहित जाट का कहना है कि निगम हित ही नहीं, शहर के युवाओं के हित में भी है कि स्टेडियम जीडीसीए के पास रहे. निगम को 8 लाख रुपये मिलेंगे, स्टेडियम का रख-रखाव होगा और पहले की तरह आगे भी खेल प्रतिभाएं निकलेंगी. इसलिए सदन ने इसे पारित किया. हालांकि, सांसद के पत्र की मुझे कोई जानकारी नहीं है.