Parade Wale Hanuman Temple Sagar: मध्य प्रदेश के सागर स्थित आर्मी कैंट क्षेत्र में बना ‘परेड वाले हनुमान जी' का मंदिर अपनी अनोखी कथा और अद्भुत प्रतिमा के कारण श्रद्धालुओं के बीच खास आस्था का केंद्र बना हुआ है. मंदिर से जुड़ी एक चमत्कारी कहानी वर्षों से लोगों के बीच प्रचलित है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग पहचान दिलाती है. 2 अप्रैल 2026 को मनाई जा रहे हनुमान जयंती के मौके पर जानिए पूरी कहानी.
मंदिर की आस्था और महत्व
मंदिर के मुख्य पुजारी महंत राघवेंद्र गिरी जी बताते हैं कि ‘परेड वाले हनुमान जी' का यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह कर्तव्य, आस्था और चमत्कार का अनूठा संगम भी प्रस्तुत करता है. यह कहानी लोगों को संदेश देती है कि सच्चे मन से की गई भक्ति और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण दोनों का महत्व जीवन में बराबर है.

Pujari of Parade Wale Hanuman Temple Sagar MP
जब जवान भूल गया परेड
कहा जाता है कि कई साल पहले आर्मी का एक जवान मंदिर में पूजा करने आया था. पूजा के दौरान उसका ध्यान भगवान में इतना लीन हो गया कि वह अपनी ड्यूटी, खासकर परेड में शामिल होना ही भूल गया. जब पूजा समाप्त हुई और उसे याद आया कि उसे परेड में उपस्थित होना था, तो वह घबरा गया और तुरंत परेड ग्राउंड की ओर दौड़ा.
मेजर की बात सुनकर रह गया हैरान
परेड ग्राउंड पहुंचकर उसने अपने मेजर से माफी मांगते हुए कहा कि उससे बड़ी गलती हो गई और वह परेड में शामिल नहीं हो पाया. लेकिन मेजर का जवाब सुनकर वह जवान हैरान रह गया. मेजर ने कहा कि रजिस्टर में उसके हस्ताक्षर पहले से दर्ज हैं और वह परेड में मौजूद भी था. यह सुनते ही जवान हक्का-बक्का रह गया, क्योंकि वह तो पूरे समय मंदिर में पूजा कर रहा था. इस घटना को लोगों ने भगवान हनुमान का चमत्कार माना.
‘परेड वाले हनुमान जी' नाम की कहानी
स्थानीय लोगों में मान्यता है कि उस दिन स्वयं हनुमान जी ने सैनिक का रूप धारण कर परेड में उसकी जगह उपस्थिति दर्ज कराई. इसके बाद जब जवान ने अपने मेजर को पूरी सच्चाई बताई, तो यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई. तभी से यहां विराजमान हनुमान जी को ‘परेड वाले हनुमान जी' के नाम से जाना जाने लगा.
अनोखी है हनुमान जी की प्रतिमा
यह मंदिर आर्मी कैंट क्षेत्र के भीतर स्थित है और यहां स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा भी बेहद अनोखी है. प्रतिमा में हनुमान जी को एक सैनिक की तरह दर्शाया गया है. उनकी रौबदार मूंछें, बड़ी-बड़ी आंखें, पैरों में जूते और सलामी की मुद्रा उन्हें एक वीर सैनिक के रूप में प्रस्तुत करती है. माना जाता है कि देश में इस तरह की यह एकमात्र प्रतिमा है, जो सागर में स्थापित है.

Parade Wale Hanuman Temple Sagar Madhya Pradesh
श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था
हालांकि इस प्रतिमा के यहां स्थापित होने के बारे में कोई पुख्ता ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता, लेकिन इसकी महिमा और आस्था को लेकर लोगों के मन में गहरा विश्वास है. आर्मी के जवानों के साथ-साथ आम नागरिक भी इस मंदिर में आकर श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं.
मनोकामनाएं होती हैं पूरी
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर में आकर प्रार्थना करने वाले कई युवाओं को सेना में भर्ती होने का अवसर मिला है. वहीं, कुछ श्रद्धालु बताते हैं कि हनुमान जी की कृपा से वे अपने जीवन में उच्च पदों तक पहुंचे हैं. यही कारण है कि यहां आने वाले भक्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.
सैनिकों के लिए खास महत्व
विशेष बात यह है कि जो सैनिक या अधिकारी सागर से देश के अन्य हिस्सों में पदस्थ हो जाते हैं, वे भी समय-समय पर यहां आकर दर्शन जरूर करते हैं. उनके लिए यह मंदिर आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.
‘परेड वाले हनुमान जी' का यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह कर्तव्य, आस्था और चमत्कार का अनूठा संगम भी प्रस्तुत करता है. यह कहानी लोगों को यह संदेश देती है कि सच्चे मन से की गई भक्ति और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण दोनों का महत्व जीवन में बराबर है.
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